गौतमबुद्ध नगर में सार्वजनिक परिवहन से सफर करने वाले यात्रियों, खासकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले में यात्री वाहनों के लिए अनिवार्य की गई व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग (वीएलटी) उपकरण योजना कागजों तक ही सीमित नजर आ रही है। परिवहन विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जिले में पंजीकृत करीब एक लाख यात्री वाहनों में से महज 160 वाहनों में ही अब तक जीपीएस आधारित पैनिक बटन सक्रिय पाया गया है। यह आंकड़ा ओला, उबर जैसे बड़े कैब ऑपरेटरों के साथ-साथ टैक्सी, ऑटो और बस संचालकों की लापरवाही को उजागर करता है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर सभी यात्री वाहनों में वीएलटी डिवाइस और आपातकालीन पैनिक बटन लगाना अनिवार्य किया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में वाहन की सटीक लोकेशन तुरंत कंट्रोल रूम तक पहुंच सके और समय रहते सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
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लेकिन नोएडा में इस नियम का पालन लगभग शून्य के स्तर पर दिखाई दे रहा है। करीब 15 हजार रुपए की लागत वाला यह सुरक्षा उपकरण नए वाहनों में तो कंपनी की ओर से लगाया जा रहा है, लेकिन पहले से सड़कों पर दौड़ रहे पुराने वाहनों में इसे लगवाने को लेकर वाहन मालिकों में कोई रुचि नहीं दिख रही है।
यह स्थिति इस ओर इशारा करती है कि संबंधित विभागीय स्तर पर भी प्रभावी निगरानी और सख्ती का अभाव रहा है। मानो किसी अप्रिय घटना के बाद ही कार्रवाई की जाएगी। परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वीएलटी उपकरण कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि यात्रियों के लिए सुरक्षा कवच है। खासकर रात के समय चलने वाले ई-रिक्शा, बस और टैक्सी में यह तकनीक वाहन की रियल टाइम लोकेशन, ठहराव और संचालन अवधि का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध कराती है, जिससे आपराधिक घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है।
अब विभाग ने इस लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया है। परिवहन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन वाहन मालिकों ने वीएलटी डिवाइस लगवाकर उसे विभागीय पोर्टल पर अपडेट नहीं कराया है, वे विभाग से संबंधित कोई भी कार्य नहीं करा सकेंगे।
एआरटीओ प्रशासन नंद कुमार ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। जिन वाहनों में वीएलटी डिवाइस सक्रिय नहीं मिलेगी, उनकी फिटनेस रोकी जाएगी, परमिट निरस्त किए जाएंगे और भारी चालान की कार्रवाई भी की जाएगी। विभाग की इस चेतावनी के बाद अब वाहन संचालकों के पास अपनी गाड़ियों को सुरक्षा तकनीक से लैस करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
