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गुंडागर्दी और अराजकता का अड्डा बन चुका नोएडा-न्यू अशोक नगर बॉर्डर

अगर आप मयूर विहार फेज-1 या न्यू अशोक नगर मेट्रो स्टेशन से नोएडा आना चाहते हैं, तो शाम 4 बजे के बाद सेक्टर-1 की तरफ जाने वाले रास्ते से बचें।

Author नोएडा | July 21, 2016 5:32 AM
देश की राजधानी दिल्ली और उप्र के स्वागत द्वार।

अगर आप मयूर विहार फेज-1 या न्यू अशोक नगर मेट्रो स्टेशन से नोएडा आना चाहते हैं, तो शाम 4 बजे के बाद सेक्टर-1 की तरफ जाने वाले रास्ते से बचें। इस रास्ते पर न केवल मोबाइल छीने जाने या जेब कटने का खतरा है, बल्कि आपकी कार या स्कूटर से खुद टकराकर किसी भी नशेड़ी के भिड़ने की भी आशंका है। खास तौर पर महिलाओं के लिए दिल्ली बॉर्डर से नोएडा के सेक्टर-1 जाने वाला यह प्रमुख मार्ग खतरनाक साबित हो चुका है।

देश की राजधानी दिल्ली और उप्र के स्वागत द्वार पर ऐसी स्थिति होना अजीब जरूर लगता है, लेकिन हकीकत यही है। इसकी एकमात्र वजह नोएडा और दिल्ली के बार्डर पर बना शराब का ठेका है। ठेका खुलने के साथ सुबह से ही यहां पियक्कड़ों की भीड़ जुटनी शुरू हो जाती है। शाम होते-होते ठेके के आसपास का पूरा इलाका सड़क पर ‘मधुशाला’ में तब्दील हो जाता है। शाम 4-5 बजे के बाद हालात ऐसे हो जाते हैं कि कार या स्कूटर तो दूर, यहां से पैदल निकलना भी दूभर हो जाता है। रिक्शे, साइकिल, स्कूटर, कार के अलावा सड़क पर खुलेआम शराब पीने का सिलसिला यहां आधी रात तक जारी रहता है। ठेके के आसपास के इलाकों में सड़क पर ही दर्जनों पानी, बर्फ, मांस, चखना आदि की दुकानें सजी रहती हैं। यह आलम तब है, जब ठेके के एक तरफ दिल्ली इलाके में दिल्ली पुलिस और नोएडा के इलाके में यूपी पुलिस की पीसीआर बदस्तूर शाम से देर रात तक खड़ी रहती है।

न्यू अशोक नगर और नोएडा, वहीं पर लेकिन दिल्ली के इलाके में करीब 25 साल से शराब का ठेका है। इस ठेके के सामने करीब 250 मीटर की जमीन खाली है। बताया गया है कि शराब के ठेके वाली बिल्डिंग मालिक की यह जमीन है। उसके बाद नोएडा सेक्टर-1 की पहली बिल्डिंग में स्टेट बैंक आॅफ पटियाला चल रहा है। बैंक का गेट ठेके के ठीक सामने खुलता है। उसके बाद भारत सरकार के उपक्रम एचएससीसी, केंद्रीय उत्पाद कर, निर्माणाधीन सीबीएसई आॅफिस, एलआइसी और उप्र वन विभाग का कार्यालय है। जबकि सड़क की दूसरी तरफ इंडियन आॅयल और उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का नोएडा कार्यालय है। केंद्र, उप्र और पीएसयू के इतने कार्यालय होने के बावजूद नोएडा को दिल्ली से जोड़ने वाला पहला प्रमुख मार्ग शराब के ठेके पर अराजक तत्त्वों की गुंडागर्दी से बेहाल है। ठेका दिल्ली के इलाके में है, यह कहकर उप्र पुलिस अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही है। जबकि दिल्ली पुलिस ठेके के दिल्ली में होने लेकिन शराब पीने वालों के नोएडा के हिस्से में खड़े होने का तर्क देकर अपना बचाव करती है। अलबत्ता इलाके की इस जद्दोजहद का खमियाजा दिल्ली और नोएडा, दोनों के आम लोग भुगत रहे हैं।

शाम 4 बजे से ठेके के सामने खाली प्लॉट और रोड के दूसरी तरफ (नोएडा इलाके में) में रेहड़ी, ठेली और सड़क पर पटरियों पर दुकानें लग जाती हैं। जबकि दिन में रिक्शों, स्कूटर और कार में बेखौफ शराब पीते हैं। रोड के दूसरी तरफ मदर डेयरी भी शराबियों के आतंक के कारण बंदी के कगार पर पहुंच गई है। जानकारों के मुताबिक, ठेके के आसपास ज्यादातर शराब पीने वाले कम पढ़े-लिखे और असामाजिक तत्त्व होते हैं। इस वजह से पुलिस उन्हें नहीं हटाती है। जबकि नोएडा की तरफ रेहड़ी, पटरी लगाने वालों से नोएडा पुलिस और दिल्ली की तरफ वालों से दिल्ली पुलिस की पीसीआर रुपए लेती है। थाना सेक्टर-20 पुलिस ने डेढ़ महीने पहले करीब 3 दिनों तक ठेके के आसपास अभियान चलाया था। इस दौरान न तो कोई शराबी और न ही कोई दुकान वहां लगी थी। इस बदलाव का लोगों ने स्वागत कर रास्ते का इस्तेमाल करना शुरू किया था लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण 3 दिनों बाद पहले से हालात बन गए हैं।

(आशीष दुबे)

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