नोएडा में भूमि अधिग्रहण के दौरान किसानों को दिए गए अत्यधिक मुआवजे के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एसआइटी ने बड़ा खुलासा किया। जांच में सामने आया है कि कुछ किसानों को जरूरत से ज्यादा मुआवजा दिलाने के बदले अधिकारियों को 10 फीसद कमीशन देने की बात तय हुई थी। 100 करोड़ रुपए के अतिरिक्त मुआवजा घोटाले मामले में सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने जांच में देरी पर सख्ती दिखाते हुए एसआइटी को छह सप्ताह के भीतर जांच पूरी कर रपट अदालत में दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

उत्तर प्रदेश की वकील रुचिरा गोयल ने प्रधान न्यायाधीश की पीठ को बताया कि एसआइटी को जांच पूरी करने के लिए दो और महीने की आवश्यकता है। वहीं, किसानों ने आरोप लगाया है कि अतिरिक्त मुआवजे की राशि का लगभग 10 फीसद हिस्सा नकद में अधिकारियों को वापस दिया गया था। करीब एक दशक पुराने इन नकद लेन-देन का ट्रेल खोजना काफी मुश्किल और समय लेने वाला है। एसआइटी ने अब तक नोएडा और अन्य प्राधिकरणों के अधिकारियों द्वारा अर्जित संपत्तियों का विवरण भी जुटाया है।

जांच एजेंसी ने बताया कि जिन 160 किसानों को अधिक मुआवजा मिला है, उनमें से अधिकांश की पहचान कर उनके बयान दर्ज किए जा चुके हैं। एसआइटी ने इस कथित घोटाले में शामिल अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की अनुमति भी मांगी है। बता दें कि, नोएडा में 1982 में जमीन अधिग्रहण की एक बड़ी प्रक्रिया हुई थी।

जमीन मालिक को उसकी 10-15 बीघा जमीन के लिए शुरुआती मुआवजा 10.12 रुपए प्रति वर्ग की दर से दिया गया। इस बात से जमीन मालिक खुश नहीं था। उसने 1993 में गाजियाबाद की जिला अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने दर बढ़ाकर 16.61 रुपए प्रति वर्ग गज भुगतान करने का आदेश दिया। इस आदेश के अनुसार मालिक को भुगतान कर दिया गया। इसके साथ मामला निपट गया। जमीन मालिक की कानूनी वारिस रामवती ने 2015 में इलाहाबाद हाई कोर्ट में फिर से मुआवजे का दावा दायर किया था।

मगर, इस बार अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। उसी वर्ष नोएडा प्राधिकरण ने भूमि मालिकों के लंबित दावों का निपटारा करने के लिए एक नई नीति बनाई और दर 297 रुपए प्रति वर्ग गज तय कर दी। इसी नीति का दुरुपयोग करते हुए, नोएडा प्राधिकरण के दो अधिकारियों ने कथित तौर पर रामवती के खारिज दावे को लंबित दिखाकर 7.28 करोड़ रुपए की राशि जारी करवा ली। बस वहीं से मुआवजा घोटाला शुरू हुआ।

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चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने पश्चिम बंगाल की स्थिति पर चिंता जताते हुए बड़ी टिप्पणी की है। पश्चिम बंगाल के मालदा में एसआईआर प्रक्रिया में शामिल न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर संज्ञान लिया है। एसआईआर को लेकर बंगाल में विरोध-प्रदर्शन हुए थे। अदालत ने मालदा जिले के एक गांव से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि तीन महिलाओं समेत सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाना बेहद निंदनीय है। इस घटना पर SC ने पश्चिम बंगाल सरकार पर कड़ी नाराजगी जताई है। पूरी खबर पढ़ें…