गौतमबुद्धनगर जिले में औद्योगिक विकास और भारी-भरकम निवेश को लेकर किए जा रहे प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच बेहद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। जिला प्रशासन की आधिकारिक रिपोर्ट के विश्लेषण से यह साफ हो गया है कि अरबों-खरबों रुपए के निवेश के ये आंकड़े वर्तमान में केवल कागजी समझौतों तक ही सीमित हैं, जबकि जमीन पर वास्तविक निवेश और रोजगार की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है।

जिला उद्योग केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय ट्रेड शो 2025 में जिले के विकास के लिए विभिन्न विभागों के अंतर्गत कुल 2,181 समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिनके तहत जिले में कुल 14,35,871.39 करोड़ रुपए का रिकार्ड निवेश प्रस्तावित किया गया था। लेकिन जब बात इस निवेश को जमीन पर उतारने यानी व्यावसायिक रूप से इकाइयों को चालू करने की आती है, तो स्थिति पूरी तरह निराशाजनक दिखती है।

गौतमबुद्धनगर जिले में कुल हस्ताक्षरित समझौतों में से केवल 180 समझौता ज्ञापन ही व्यावसायिक रूप से चालू हो सके हैं, जिनमें मात्र 81,064.24 करोड़ रुपए का निवेश ही धरातल पर उतरा है। कुल प्रस्तावित निवेश का लगभग 94.35 फीसद हिस्सा आज भी केवल फाइलों और कागजों में बंद है, और मात्र 5.65 फीसद निवेश ही जमीन पर दिख रहा है, जिससे सरकारी दावों की हवा निकलती नजर आ रही है।

समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करते वक्त वैश्विक और घरेलू कंपनियों ने जिले के युवाओं को कुल 33,36,956 (लगभग 33.3 लाख) नौकरियां देने का बड़ा और लोक-लुभावन वादा किया था, जिसे बेरोजगारी के खात्मे के रूप में प्रचारित किया गया था। जो इकाइयां वाणिज्यिक स्तर पर शुरू हो पाई हैं, उनसे अब तक केवल 1,47,591 लोगों को ही वास्तविक रोजगार मिल सका है।

यानी रोजगार देने का जो वादा किया गया था, उसका 95 फीसद से अधिक हिस्सा अभी भी हवा में है और हजारों बेरोजगार काम के लिए भटकने को मजबूर हैं।

इस रिपोर्ट में उन प्रमुख विभागों की हकीकत भी सामने आई है जो सीधे तौर पर रोजगार और बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़े हैं। उदाहरण के लिए, अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग ने 29,712.5 करोड़ रुपए के 15 समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन धरातल पर इस विभाग का निवेश और रोजगार दोनों पूरी तरह शून्य है।

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उत्तर प्रदेश सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना’ के अंतर्गत चल रहे मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान का उद्देश्य शिक्षित युवाओं को अपना कारोबार शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना है, लेकिन प्रदेश के सबसे विकसित माने जाने वाले शहरों नोएडा और गाजियाबाद में इस योजना की रफ्तार बेहद धीमी दिखाई दे रही है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक