गौतमबुद्ध नगर इन दिनों आर्थिक और सामाजिक संकट के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ जहां ईरान और अमेरिका के बीच गहराते सैन्य तनाव और वैश्विक अस्थिरता ने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समीकरणों को बिगाड़ दिया है। वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर वेतन वृद्धि को लेकर भड़की श्रमिक हिंसा ने जिले की कानून व्यवस्था और उत्पादन चक्र को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है।

नोएडा और ग्रेटर नोएडा के हजारों उद्योगों में पिछले कई दिनों से ताले लटके हुए हैं, जिससे प्रतिदिन करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है। एडा एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन के प्रारंभिक आंकलन के अनुसार, इस गतिरोध के कारण अब तक जिले को करीब 30 हजार करोड़ रुपए से अधिक का व्यापारिक नुकसान हो चुका है।

इस नुकसान के अलावा, राज्य सरकार द्वारा दबाव में आकर की गई वेतन वृद्धि से उद्योगों पर हर माह लगभग 450 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने का अनुमान है। उद्यमियों का तर्क है कि एक तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग कम हो रही है और दूसरी तरफ अचानक श्रम लागत बढ़ने से वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ सकते हैं।

जानकारों का मानना है कि यदि यह गतिरोध जल्द समाप्त नहीं हुआ, तो कई बड़ी कंपनियां अपने संयंत्र पड़ोसी राज्यों या अन्य सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने पर विचार कर सकती हैं, जो उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका होगा।

अहम है कि संकट की शुरुआत तब हुई, जब ईरान-अमेरिका तनाव के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई। गौतमबुद्धनगर में स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल हब काफी हद तक आयातित कच्चे माल और निर्यात पर निर्भर हैं। युद्ध की आशंका ने कच्चे तेल की कीमतों और कंटेनर भाड़े में भारी बढ़ोतरी कर दी, जिससे उत्पादन लागत में उछाल आ गया।

अभी उद्यमी इस वैश्विक झटके से संभलने की कोशिश ही कर रहे थे कि जिले के श्रमिक संगठनों ने न्यूनतम वेतन और अन्य सुविधाओं को लेकर मोर्चा खोल दिया। स्थिति इतनी गंभीर है कि जिले की लगभग 50 फीसद से अधिक इकाइयां सुरक्षा कारणों और श्रमिकों की कमी के कारण बंद पड़ी हैं।

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ईरान-अमेरिका में जारी युद्ध के कारण तेल व रसोई गैस आपूर्ति बाधित होने की चिंता दिल्ली के थोक बाजारों में बैठे व्यापारियों पर दिखने लगी है। उनका कहना है कि पहले ही 30 फीसदी मजदूर पलायन कर चुके हैं, जो सदर बाजार, चांदनी चौक, करोलबाग, जामा मस्जिद, खारी बावली, नई सड़क इत्यादि में माल उतारने और चढ़ाने का काम करते थे। अगर हालात नहीं सुधरे तो मजदूरों का पलायन तेजी से होगा। पूरी खबर पढ़ें…