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जापान की ‘मियावाकी’ तकनीक से आएगी नोएडा में हरियाली, सेक्टर-91 से शुरू होगा ये शानदार प्रोजेक्ट

नोएडा अथॉरिटी द्वारा इस साल नई पौधारोपण तकनीक 'मियावाकी' का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह तकनीक विश्वभर में प्रसिद्ध है। इस तकनीक के अंतर्गत मिश्रित प्रजाति के पौधे एक साथ लगाए जाते हैं।

Author नोएडा | June 8, 2019 6:55 PM
प्रतीकात्मक तस्वीर (इंडियन एक्सप्रेस)

नोएडा (न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी) इस साल मॉनसून के दौरान हरियाली को बढ़ाने के लिए पौधारोपण के लिए एक नई तकनीक ‘मियावाकी’ का इस्तेमाल करेगी। जापान की इस तकनीक के तहत छोटे अंतराल में किसी जगह पर बहुत सारे स्थानीय प्रजाति के पौधे लगाने पर फोकस किया जाता है, जिससे जंगल विकसित हो सके। अथॉरिटी के जनरल मैनेजर राजीव त्यागी ने बताया कि ‘मियावाकी’ तकनीक का नाम प्लांट इकोलॉजिस्ट और बोटानिस्ट ‘अकीरा मियावाकी’ के नाम पर रखा गया है। इस तकनीक में पौधों की तेजी से प्रगति के लिए मिश्रित प्रजाति के पौधे एक साथ लगाए जाते हैं।

सेक्टर 91 से शुरू होगा प्रोजेक्टः अधिकारी ने बताया कि इस तरह की पौधारोपण प्रक्रिया को शुरुआत में सेक्टर-91 में शुरू किया जाएगा। यहां करीब 6 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में इसे अपनाया जाएगा। इसके बाद इस तकनीक का इस्तेमाल शहर के अन्य भागों में भी किया जाएगा। बता दें यह वही स्थान है जहां नोएडा अथॉरिटी ने पिछले साल 4 हजार पेड़ों को काट दिया गया था। इसके विरोध में यहां के रिहायशी लोगों के साथ मिलकर ‘चिपको मूवमेंट’ चलाया था। यहां रहने वाले लोगों ने मांग की थी कि इस इलाके का रख-रखाव सिटी फॉरेस्ट की तरह किया जाएगा।

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विश्वभर में प्रसिद्ध है ये तकनीकः जनरल मैनेजर ने कहा, ‘हम करीब 144 एकड़ जमीन पर पौधे विकसित कर रहे हैं और नोएडा के भू-जल स्तर को बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। यह तकनीक विश्व स्तर पर प्रचलित है, इस तकनीक में उच्च घनत्व वाला वृक्षारोपण शामिल है, जिसके कई फायदे हैं जैसे कि पौधे की तेजी से वृद्धि और कम रखरखाव। यह एक कम बजट की तकनीक है, जो पारंपरिक रोपण तकनीक की तुलना में तेज परिणाम देती है। जंगल भी आसपास के वातावरण को जल्दी से छाया और अन्य पारिस्थितिक लाभ प्रदान करता है।’ उन्होंने कहा कि प्राधिकरण की मौजूदा प्रवृत्ति के अनुसार दो पेड़ों के बीच तीन मीटर का अंतर होता है। हालांकि, मियावाकी तकनीक के मुताबिक प्रति वर्ग मीटर में तीन से पांच पौधे लगाए जाते हैं।

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