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नहीं भाती पूर्वी दिल्ली में तैनाती

दिल्ली पुलिस का उत्तर-पूर्वी जिला पुलिसवालों की पोस्ंिटग के लिए सबसे खतरनाक और जोखिम भरा है। पुलिसवाले इसे शुरू से चुनौती की तरह तो लेते ही हैं पर शब ए बारात से लेकर रामलीला, दशहरा, दीपाली, ईद, मुहर्रम, कांवड़ यात्रा, छठ पूजा के समय कानून व्यवस्था मुस्तैद करना उनके लिए अग्निपरीक्षा की तरह है।

Author नई दिल्ली | May 27, 2016 1:05 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर

दिल्ली पुलिस का उत्तर-पूर्वी जिला पुलिसवालों की पोस्टिंग के लिए सबसे खतरनाक और जोखिम भरा है। पुलिसवाले इसे शुरू से चुनौती की तरह तो लेते ही हैं पर शब ए बारात से लेकर रामलीला, दशहरा, दीपाली, ईद, मुहर्रम, कांवड़ यात्रा, छठ पूजा के समय कानून व्यवस्था मुस्तैद करना उनके लिए अग्निपरीक्षा की तरह है। आपराधिक वारदातों पर लगाम के लिए सीसीटीवी लगाने से लेकर निर्भीक, जगुआर, ई-साथी और ई-बीट बुक से तो कहने को पुलिस का सालों भर काम होता है। लेकिन बाइकर्स के स्टंट पर अभी तक रोक न लगा पाना पुलिस की नाकामी ही मानी जाती रही है। यहां के 32 थानों में करीब छह हजार 588 पुलिस वाले तैनात हैं।

सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली के ग्रामीण बहुल इलाके बाहरी दिल्ली और पश्चिमी दिल्ली में कानून व्यवस्था को लेकर जितनी पुलिस चिंतित नहीं रहती उससे ज्यादा वह उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार और लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए परेशान रहती है। वजीराबाद पुल, आइएसबीटी पुल, विवेक विहार अंडरपास, लोहे का पुल, आनंद विहार सीमापुरी बार्डर, लोनी-हापुर बार्डर, शास्त्री पार्क, सुंदरनगरी, नंदनगरी, करावलनगर, वेलकम, खजूरीखास, गांधीनगर, फर्श बाजार, कल्याणपुरी, मंडावली और मयूर विहार से सटे गाजीपुर, कोंडली, घरौली तक में पुलिस की एक नहीं चलती। जिस इलाके में जाएं अवैध निर्माण से लेकर अवैध पार्किंग, सड़क किनारे अतिक्रमण, बेतरतीब तरीके से लगाई गई व्यावसायिक गाड़ियां देखने को मिल जाती हैं। दिन में भी ट्रैफिक पुलिसवाले चालान काटने से घबराते हैं कि कहीं तबके परिवहन अधिकारी अनिल छिकारा के दफ्तर की तरह घुसकर लोग हंगामा और तोड़फोड़ न कर दें।

पुलिस वाले अपनी सुरक्षा के नाम पर समूह बनाकर जांच करते हैं ताकि किसी भी प्रकार के हमले और वारदातों पर वे खुद को बचाकर माहौल को शांत कर वारदात पर लगाम लगा सकें। स्थानीय लोगों के गुस्से को देखते हुए महीने के तय हफ्ते में वीडियो रिर्काडिंग कर चालान के आंकड़े भरे जाते हैं ताकि बाद में विवाद न हो। सामूहिक पेट्रोलिंग, मोबाइल पेट्रोलिंग, एसीपी से लेकर डीसीपी तक के औचक निरीक्षण यहां आम तौर पर देखने को मिल जाता है।

पुलिस के सालाना आंकड़े बताते हैं कि यहां पिछले साल कुल 38 हजार 870 आइपीसी के मामले दर्ज हुए। जबकि इससे पहले साल यहां 33 हजार 899 मामले दर्ज हुए थे। हालांकि डकैती, हत्या, हत्या के प्रयास, लूटपाट, दंगे, अपहरण और बलात्कार के दर्ज मामले के खुलासे का फीसद ज्यादा है। लेकिन लोगों में अभी भी जागरूकता का पूर्ण अभाव दिखता है। यही कारण है कि पुलिस की कोशिश ई बीट बुक से शुरू होकर ई साथी, निर्भीक और जगुआर तक पहुंची है जिससे इलाके के लोग खुद को राहत महसूस कर पुलिस के हाथ बंटाकर शांति महसूस करें।

सूत्रों का कहना है कि पुलिस और उपराज्यपाल को भी इन इलाके में हुड़दंगियों की करतूत की सूचना है और यही कारण है कि शब ए बारात में उपराज्यपाल और पुलिस अपनी ओर से यहां से लोगों को शांति बनाए रखने की अपील करते हैं। हालांकि इसका असर उन पर ज्यादा पड़ता नहीं दिखता। वे अपनी चलाने के लिए किसी भी स्तर तक जा सकते हैं और यही कारण है कि पुलिसवाले इस इलाके में पोस्टिंग से घबराते हैं।

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