पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंगमो ने कहा है कि उनसे यह सवाल पूछा गया था कि अगर उनके पति को रिहा कर दिया जाता है तो क्या वह फिर से प्रदर्शन करेंगे? इस सवाल के जवाब में न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में गीतांजलि ने कहा कि किसी को भी विरोध प्रदर्शन करने में या भूख हड़ताल पर बैठने में मजा नहीं आता।
गीतांजलि ने मंगलवार को कहा कि विरोध प्रदर्शन करने या भूख हड़ताल पर बैठने के पीछे मकसद यही होता है कि हम अपनी बात आगे रख सकें। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे का समाधान करना बेहद जरूरी हो गया है और यह अगर बातचीत के जरिए ऐसा होगा तो यह जल्दी हल हो सकता है और लद्दाख को रोल मॉडल बना सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई स्थगित
उधर, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 के तहत सोनम वांगचुक की हिरासत को अवैध घोषित करने की मांग वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी। यह याचिका उनकी पत्नी डॉ. गीतांजलि आंगमो ने दायर की है।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने सुनवाई को अगले मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया क्योंकि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने अदालत को सूचित किया था कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की तबीयत ठीक नहीं है और वह आज अदालत में उपस्थित नहीं हो पाएंगे।
पति की कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं
इससे पहले डॉ. गीतांजलि आंगमो ने अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ को दिए गए इंटरव्यू में कहा था कि उनके पति की कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं थी और उन्होंने लद्दाख के नेताओं के आग्रह पर ही जून, 2025 में केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय के नेतृत्व वाली समिति का सदस्य बनने की इच्छा जताई थी।
बीते साल लेह में हुई थी हिंसा
बीते साल सितंबर में लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा देने की मांग के समर्थन में हुए प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसक झड़पों में चार लोगों की मौत हो गई थी। हिंसा में 40 पुलिसकर्मियों सहित कम से कम 80 लोग घायल हो गए थे। केंद्र सरकार ने हिंसा के लिए वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया था।
