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कोई भी सीमा पर हस्तक्षेप नहीं कर सकता, मिलेगा करारा जवाब- सर्जिकल स्ट्राइक को याद कर बोले अमित शाह, ट्विटर पर लोग दिलाने लगे चीन की याद

नृपथुंगा विश्वविद्यालय के उद्घाटन समारोह में अमित शाह ने कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव ये 75वां वर्ष एक संकल्प लेने का वर्ष है।

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बेंगलुरु में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Photo Source- Twitter)

एक दिवसीय दौरे पर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु पहुंचे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने वहां कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया और नयी परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इस दौरान गृहमंत्री ने कहा कि अब पूरी दुनिया जानती है कि कोई भारतीय सीमा में दखल नहीं दे सकता, नहीं तो करारा जवाब दिया जाएगा। अमित शाह के इस भाषण के बाद सोशल मीडिया पर लोग उन्हें लद्दाख में चीन की घुसपैठ की याद दिलाने लगे।

बेंगलुरु के नृपथुंगा विश्वविद्यालय के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि पहले केवल अमेरिका और इजरायल, उनकी सीमाओं और सेना के साथ हस्तक्षेप करने वालों पर जवाबी कार्रवाई करते थे, लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कारण पिछले कुछ सालों में भारत ने इतनी ताकत हासिल कर ली है कि वह भी दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने की ताकत रखता है।

देश की सुरक्षा का जिक्र करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि 2014 से पहले आए दिन पाकिस्तान से जुड़े आतंकवादी देश में हमला करते थे और केंद्र सरकार की ओर से केवल बयानबाजी की जाती थी। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद स्थिति में सुधार हुआ है।

ट्विटर यूजर्स ने कसे तंज: अमित शाह के इसी बयान को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स ने सरकार पर जमकर निशाना साधा। तंज कसते हुए यूजर्स अमित शाह को एलएसी विवाद याद दिलाने लगे। शुभाशीष (@sm_pf) ने लिखा- “हम चीन सीमा पर दो साल से ज्यादा समय से जवाब देख रहे हैं, हैं ना।”

एक अन्य यूजर जयप्रकाश (@mathurapuri) ने लिखा- “हां उसके बाद चीन भी लद्दाख में नहीं घुसा।” एक यूजर मैथ्यू (@MathewCongress) ने भी व्यंग्यात्मक अंदाज में पूछा- “क्या चीन भारत में है?”

क्या है एलएसी विवाद? एलएसी पर तनाव तब शुरू हुआ जब चीनी सैनिकों ने भारतीय सीमा के कई किलोमीटर अंदर तक आकर अपने टेंट और दूसरे भारी उपकरण लगाए थे। चीन के इस अप्रत्याशित कदम को देखते हुए भारतीय सेना ने लद्दाख में सीमा पर हज़ारों सैनिकों की तैनाती की और वहां अतिरिक्त हथियार जमा करने शुरू किए थे। यह तनाव जून, 2020 में गलवान घाटी में हाथपाई और हिंसक झड़प में तब्दील हो गया था। इस झड़प में दोनों तरफ के कई सैनिकों की मौत हुई थी। गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हुई सहमति के बाद फरवरी 2021 में डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया शुरू की गई थी।

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