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संघमुक्त भारत समर्थक पार्टियों को एकजुट करता रहूंगा : नीतीश

नीतीश कुमार ने केंद्र की वर्तमान सरकार के कार्यकाल में देश में आर्थिक स्थिति में सुधार की गुंजाइश नहीं होने का आरोप लगाया

Author पटना | April 24, 2016 5:24 AM
पटना में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मीडिया से बात करते हुए। (पीटीआई फाइल फोटो)

बिहार के मुख्यमंत्री और जद (एकी) अध्यक्ष नीतीश कुमार ने शनिवार को स्पष्ट किया कि वह प्रधानमंत्री पद के दावेदार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उत्प्रेरक की भूमिका वो हमेशा निभाएंगे ताकि गैर भाजपाई दलों में एकजुट हो सकें। पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हाल में आयोजित जद (एकी) की राष्ट्रीय परिषद की बैठक के दौरान नीतीश के पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचन पर मुहर लगाई गई।

नीतीश ने कहा कि जब गैर भाजपाई दलों की एकजुटता की बात करते हैं तो उन पर कितना प्रहार हो रहा है। ‘संघ मुक्त भारत’ के पक्षधर पार्टियों को एकजुट होने के बयान पर क्या-क्या नहीं कहा जा रहा है। वह नेतृत्व या सर्वोच्च पद (प्रधानमंत्री) की दावेदारी कहां कर रहे हैं। विलय को लेकर बहुत सारी बातें की जाती हैं। विलय, गठबंधन, तालमेल अथवा आपसी समझ हो जो कुछ भी संभव है वह हो, जितनी अधिक से अधिक संभावना है। एकजुटता का प्रयास किया जाना चाहिए और यह काम वह करते रहेंगे क्योंकि उनका इसमें कोई अपना स्वार्थ नहीं है।

नीतीश ने कहा कि संघ (आरएसएस) की राजनीतिक शाखा भाजपा जिस प्रकार की राजनीति कर रही और जिस प्रकार से देश को चलाने की कोशिश कर रहे हैं। उसके कारण आज देश के सामने जिस प्रकार की चुनौती खड़ी हुई है। उसका सभी गैरभाजपाई दलों को एकजुट होकर मुकाबला करना होगा।

उन्होंने कहा कि वे मीडिया के लोगों से हाथ जोड़कर विनम्र प्रार्थना करना चाहते हैं कि हम गरीब घर में पैदा हुए हैं। बिहार को आगे ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। पहले भाजपा वाले भी उन्हें पीएम मेटेरियल कह दिया करते थे, आज भी आप लोग कहलवा देते हैं। कृपया करके इतना अन्याय न करें। हमने न तो बिहार के साथ कभी अन्याय किया है और न ही राष्ट्रीय स्तर पर कोई जिम्मेदारी मिली है तो किसी पद पर आसीन (सांसद या मंत्री) होकर अन्याय किया है।

नीतीश ने केंद्र की वर्तमान सरकार के कार्यकाल में देश में आर्थिक स्थिति में सुधार की गुंजाइश नहीं होने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्यों पर केंद्र सरकार आर्थिक बोझ बढ़ा रही है। केंद्र प्रायोजित योजनाओं में केंद्र का हिस्सा कम किया जा रहा है और राज्यों का हिस्सा बढ़ाया जा रहा है। ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में केंद्र ने अपनी हिस्सेदारी घटा दी और मनरेगा एवं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना सहित आम लोगों की जरूरतों को पूरा करने वाली योजनाओं पर उनका ध्यान नहीं है। उन्होंंने आरोप लगाया कि देश की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है और वादे पूरी नहीं हो रहे हैं तो ऐसी स्थिति में इनके पास एक ही शगूफा है कि समाज और लोगों को धर्म और मजहब के नाम पर बांटो। कभी लव जिहाद, कभी घर वापसी तो कभी गोमांस का मुद्दा और अब देशभक्ति के नाम पर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में कालाधन वापस लाने, किसानों को उनकी लागत से डेढ़ गुना उनके फसल का दाम दिए जाने तथा युवाओं को रोजगार दिए जाने सहित अन्य कई वादों को भाजपा भूल गई और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कह दिया कि ये तो ‘जुमला’ था। नीतीश ने आरोप लगाया कि यह झूठा आश्वासन देते हैं कि वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी हो जाएगी। आज कितनी है, किसान की आमदनी। ये बताएं कि वर्ष 2019 तक किसान की आमदनी क्या होगी। आज औसतन किसान की आमदनी 3000 रुपए से 3500 रुपए प्रतिमाह है। देश में इससे कृषि का विकास संभव नहीं है।

उन्होंने भाजपा पर नारा देने में महारत रखने का आरोप लगाते हुए कटाक्ष किया, ‘कभी स्टैंड अप इंडिया का नारा देते हैं जो कुछ दिन के बाद सिट डाउन इंडिया हो जाएगा। फिर आ जाएगा ले डाउन इंडिया उसके बाद स्लीप फार एवर इंडिया। क्या नारे देते जा रहे हैं, नारों को कुछ हकीकत में भी बदलिए।’

* कहा, मौजूदा चुनौतियों का सामना करने के लिए गैर भाजपाई दलों को एक होना होगा
* घर वापसी, गोमांस और देशभक्ति के नाम पर लोगों को गुमराह करने की कोशिश हो रही है

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