बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद पटना में राजनीतिक गतिविधियां काफी तेज हो गई हैं। शुक्रवार सुबह बिहार के उपमुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री आवास पर पहुंचे। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने नीतीश कुमार के साथ लगभग 25 मिनट तक बंद कमरे में बैठक की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बैठक में आगामी दिनों की रणनीति, संभावित नेतृत्व परिवर्तन और नई सरकार की संरचना पर चर्चा हुई होगी। हालाँकि सम्राट चौधरी ने बैठक के बाद मीडिया से बात नहीं की। चौधरी के जाने के तुरंत बाद बिहार के दूसरे उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा भी मुख्यमंत्री आवास पर पहुंचे।
नीतीश कुमार ने जेडीयू विधायकों की बैठक बुलाई
इस बीच, नीतीश कुमार ने शुक्रवार शाम को जेडीयू के विधायकों की बैठक बुलाई है। पार्टी प्रवक्ता और विधायक (एमएलसी) नीरज कुमार ने बताया कि इस बैठक में नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए नामांकन के पीछे के कारणों को स्पष्ट करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि नीतीश कुमार अगर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देते हैं तो यह न केवल जेडीयू बल्कि एनडीए के लिए भी एक बड़ी चुनौती होगी। इस सबके बीच बिहार में नीतीश के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए जिन नामों की चर्चा सबसे ज्यादा है उनमें पांच नाम प्रमुख हैं- डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, उद्योग मंत्री दिलीप जयसवाल, नीतीश के बेटे निशांत कुमार और राज्य मंत्री विजय कुमार चौधरी।
भाजपा मुख्यमंत्री पद अपने पास रखना चाहती
विधानसभा में 89 विधायकों के साथ अब सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी भाजपा मुख्यमंत्री पद अपने पास रखना चाहती है। वहीं दूसरी ओर, जेडीयू नीतीश के बेटे निशांत को उनके भरोसेमंद सहयोगी विजय कुमार चौधरी के साथ औपचारिक रूप से सरकार में शामिल करने की कोशिश कर रही है। इस सबके बीच सम्राट चौधरी, नित्यानंद राय और दिलीप जायसवाल को भाजपा के मुख्यमंत्री पद के तीन सबसे संभावित चेहरों के रूप में देखा जा रहा है जबकि निशांत और विजय चौधरी को जेडीयू के उपमुख्यमंत्री पद के दावेदारों के रूप में देखा जा रहा है।
सम्राट चौधरी
सम्राट वर्तमान में बिहार के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री हैं और भाजपा विधायक दल के प्रमुख हैं। मुंगेर के कोइरी-कुशवाहा ओबीसी नेता सम्राट ने आरजेडी से अपने कैरियर की शुरुआत की, 1999 में राबड़ी देवी सरकार में कृषि मंत्री बने और बाद में जेडीयू में शामिल हो गए। अंततः वे भाजपा में आ गए, जहां वे राज्य उपाध्यक्ष, एमएलसी और फिर राज्य अध्यक्ष के पद तक पहुंचे। बिहार में भाजपा के सबसे प्रमुख ओबीसी चेहरे और लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव के मुखर आलोचक के रूप में, उन्हें मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। यह गैर-यादव ओबीसी को अपने पीछे एकजुट करने के पार्टी के प्रयास का प्रतीक है।
नित्यानंद राय
केंद्र सरकार में गृह राज्य मंत्री और भाजपा के बिहार के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं। यादव समुदाय से आने वाले किसान के बेटे नित्यानंद ने 1980 के दशक की शुरुआत में एबीवीपी के माध्यम से राजनीति में प्रवेश किया और लंबे समय से संघ परिवार से जुड़े रहे हैं। उन्होंने 2000 से 2010 तक लगातार बिहार विधानसभा में हाजीपुर का प्रतिनिधित्व किया, जिसके बाद उन्होंने 2014, 2019 और 2024 में भाजपा के लिए उजियारपुर लोकसभा सीट जीती। पार्टी ने उन्हें यादव समुदाय पर आरजेडी के एकाधिकार को कमजोर करने के लिए यादव चेहरे के रूप में पेश किया है। मुख्यमंत्री के रूप में उनका चयन यादव वोटों के कुछ वर्गों को अपनी ओर खींचने और साथ ही उच्च जाति और गैर-यादव ओबीसी के समर्थन को बरकरार रखने के प्रयास का संकेत होगा।
दिलीप कुमार जायसवाल
दिलीप वर्तमान में बिहार के उद्योग एवं सड़क निर्माण मंत्री हैं। वह खगड़िया के उसरी गांव के वैश्य-बनिया समुदाय के नेता हैं और पूर्णिया-अररिया-किशनगंज स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से तीन बार विधायक रह चुके हैं। दो बार बीजेपी के राज्य पार्टी अध्यक्ष रह चुके दिलीप राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्रालय भी संभाल चुके हैं और किशनगंज स्थित माता गुजरी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के प्रमुख हैं जो पार्टी के पारंपरिक बनिया-व्यापारी वोट बैंक का मजबूत आधार है।
निशांत कुमार
नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत राजनीति के प्रति उदासीन और आध्यात्मिकता की ओर झुकाव रखते थे। वह सालों तक सार्वजनिक जीवन से दूर रहे और केवल कभी-कभी पारिवारिक समारोहों में ही दिखाई देते थे। साल 2025 से वह अपने पिता के साथ अधिक बार दिखाई देने लगे हैं। अब वह बख्तियारपुर में कार्यक्रमों में भाषण देते हैं, पार्टी की सभाओं में भाग लेते हैं और जेडीयू के लिए समर्थन जुटाते हैं। पार्टी नेता अब खुले तौर पर निशांत को जेडीयू की भावी उम्मीद के रूप में पेश कर रहे हैं।
विजय चौधरी
भूमिहार समुदाय के विजय 1982 से लगभग लगातार विधायक हैं और नीतीश कुमार के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक हैं। स्वतंत्रता सेनानी और तीन बार के कांग्रेस विधायक जगदीश प्रसाद चौधरी के बेटे विजय चौधरी ने अपने दिवंगत पिता की सीट से चुनाव लड़ने के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में प्रोबेशनरी ऑफिसर की नौकरी छोड़ दी और कांग्रेस टिकट पर तीन बार जीत हासिल की, जिसके बाद वे जेडीयू में शामिल हो गए। जेडीयू के भीतर उन्होंने राज्य अध्यक्ष, विधानसभा अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य किया है, साथ ही वित्त, शिक्षा, जल संसाधन और संसदीय मामलों जैसे महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाला है। उन्हें पार्टी में नंबर दो और नीतीश के प्रमुख रणनीतिक मंडल का हिस्सा माना जाता है।
नीतीश दिल्ली की ओर, जेडीयू को तलाशना होगा नया चेहरा
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कल राज्यसभा के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। नीतीश कुमार के बिहार की राजनीति से अचानक विदा होने से जेडीयू के कई नेता हैरान हैं। जनता दल (यूनाइटेड) के कई नेताओं का मानना था कि नीतीश के बेटे निशांत कुमार को राज्यसभा भेजा जाएगा और वह धीरे-धीरे अपने पिता की जगह लेंगे। बुधवार दोपहर को स्थिति बदल गई और यह चर्चा ज़ोरों पर थी कि उनके बेटे की जगह मुख्यमंत्री खुद राज्यसभा जाएंगे। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
