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जद (एकी) की बागडोर अब नीतीश कुमार को

नीतीश ने जदयू अध्यक्ष चुने जाने के बाद ट्वीट में कहा, ‘‘पार्टी द्वारा मुझपर विश्वास व्यक्त करने से अभिभूत हूं।

Author नई दिल्ली | April 11, 2016 04:08 am
एनडीए में शामिल होने की दशा में 71 में से करीब 20 विधायक नीतीश के खिलाफ जा सकते हैं। पार्टी के 12 सांसदों में से 6 भी इसी तरह की मुखालफत कर सकते हैं।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रविवार (10 अप्रैल) को जदयू के नये अध्यक्ष निर्वाचित हुए। इस पहल के जरिये कुमार का पार्टी पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो गया है और बिहार से बाहर पार्टी के प्रसार की कोशिशों और 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक में रविवार को नीतीश कुमार को इस शीर्ष पद के लिए सर्वसम्मति से चुना गया। कुमार इस पद का प्रभार वरिष्ठ नेता शरद यादव से ग्रहण कर रहे हैं जो एक दशक तक अध्यक्ष पद पर रहे। शरद ने इस पद के लिए चौथी बार दावेदारी नहीं करने का निर्णय किया था।

कुमार पहली बार जदयू अध्यक्ष चुने गए हैं जो बिहार में पार्टी का चेहरा रहे हैं। इससे पहले जॉर्ज फर्नाडिस और शरद यादव पार्टी अध्यक्ष रह चुके हैं जो बिहार से बाहर से थे हालांकि उनकी कर्मभूमि बिहार ही रही।

राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक के बाद नेताओं ने बताया कि बैठक में नीतीश कुमार के नाम का प्रस्ताव शरद यादव ने किया और पार्टी महासचिव के सी त्यागी के साथ जावेद रजा एवं अन्य नेताओं ने इसका समर्थन किया। त्यागी ने बताया कि बिहार के मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक में समान विचारधाराओं वाली पार्टी को साथ लाने के प्रयासों के बारे में बताया और नयी जिम्मेदारी को स्वीकार किया।

बिहार विधानसभा चुनाव में जदयू-राजद-कांग्रेस गठबंधन को भाजपा नीत राजग पर जीत दिलाने में नीतीश ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। जदयू में अजीत सिंह के नेतृत्व वाली रालोद और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबू लाल मरांडी के झारखंड विकास मोर्चा के विलय के बारे में बात चल रही है।

जदयू 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव को प्रमुखता दे रही है और कुछ दलों के विलय को महत्व दे रही है। त्यागी ने कहा, ‘‘हमने उन्हें (भाजपा) बिहार में रोका और अब हम उन्हें उत्तरप्रदेश में भी रोकेंगे।’’

यह पूछे जाने पर कि क्या सपा के साथ विलय के प्रयासों पर भी चर्चा चल रही है, उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अकेले चुनाव लड़ेंगे।

बहरहाल, नीतीश ने जदयू अध्यक्ष चुने जाने के बाद ट्वीट में कहा, ‘‘पार्टी द्वारा मुझपर विश्वास व्यक्त करने से अभिभूत हूं। हम शरद यादव की विरासत को आगे बढ़ाने का पूरा प्रयास करेंगे और मैं जदयू के नये अध्यक्ष की भूमिका को स्वीकार करता हूं।’’

इस बीच, जदयू की राष्ट्रीय परिषद की बैठक 23 अप्रैल को पटना में होगी जहां कुमार के निर्वाचन का अनुमोदन किया जायेगा। कुमार ने जदयू को मजबूत बनाने में यादव की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि वह पार्टी के ‘मार्गदर्शक’ बने रहेंगे।

शरद यादव ने अपनी भूमिका के बारे में पूछे जाने पर कहा कि वह पार्टी का आधार बढ़ाने का काम करेंगे। इससे पहले अपने आवास पर उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘वह जैसे पहले थे, वैसे ही रहेंगे। राष्ट्रीय राजनीति में मैं पार्टी की वजह से नहीं हूं ।’’

कार्यकारिणी में पारित एक प्रस्ताव में शरद यादव की प्रशंसा करते हुए कहा गया कि उन्होंने भाई-भतीजावाद, आत्म-स्तुति और गुटबाजी से पूरी तरह दूरी बनाए रखी। नीतीश कुमार के साथ पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल यादव 2006 से ही पार्टी अध्यक्ष थे और 2013 में उन्हें तीसरी बार इस पद के लिए चुना गया। उन्हें तीसरी बार अध्यक्ष पद देने के लिए जद(यू) के संविधान में संशोधन किया गया था।

के. सी. त्यागी ने कहा कि देश में मायूसी की स्थिति, बिलकुल वैसी ही है जैसी पिछले लोकसभा चुनावों के पहले थी, फैली हुई है, और भाजपा ‘‘विवादास्पद’’ मुद्दों के पीछे पड़ी हुई है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने के लिए पीडीपी के साथ भाजपा के गठबंधन को ‘‘सर्वोच्च दर्जे का अवसरवाद करार दिया।’’

उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी और भाजपा के नेतृत्व में भाजपा वह पार्टी नहीं रह गयी जो अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी के वक्त थी। राष्ट्रवाद के मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पर निशाना साधते हुए त्यागी ने कहा कि हिन्दूवादी संगठन के प्रमुख ने 1947 में तिरंगे को अस्वीकार करते हुए कहा था कि तीन (रंगों की संख्या) अशुभ संख्या है।

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