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नीतीश ने अब गुप्‍तेश्‍वर पांडे को दी अपराधमुक्‍त बिहार बनाने की जिम्‍मेदारी

1987 बैच के आईपीएस गुप्तेश्वर पांडे को बिहार सरकार ने गुरुवार 31 जनवरी को अधिसूचना जारी कर इस उम्मीद के साथ राज्य का नया पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया है कि अब इनकी अगुवाई में बिहार अपराध मुक्त होगा।

1987 बैच के आईपीएस गुप्तेश्वर पांडे को बिहार सरकार ने राज्य का नया पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया है। (Image Source: Facebook/@NitishKumarJDU and Gupteshwar Pandey)

एक वक्त था जब बेगूसराय बिहार के सबसे अपराधग्रस्त जिले की सूची में शुमार था। जिसे गुप्तेश्वर पांडे की कप्तानी में “आपरेशन फ्लश आउट” चलाकर छह महीने में ही अपराधमुक्त कर दिया था। यह बात साल 1993 की है। 1987 बैच के आईपीएस गुप्तेश्वर पांडे को बिहार सरकार ने गुरुवार 31 जनवरी को अधिसूचना जारी कर इस उम्मीद के साथ राज्य का नया पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया है कि अब इनकी अगुवाई में बिहार अपराध मुक्त होगा। वह बिहार पुलिस आकदमी व बिहार सैन्य पुलिस के महानिदेशक थे। डीजीपी ओहदे से रिटायर होने वाले केएस द्विवेदी से उन्‍होंने कार्यभार लिया। इनका कार्यकाल 28 फरवरी 2021 तक रहेगा। ये बिहार के बक्सर जिले के वाशिंदें है। भागलपुर पुलिस जोन के नौ जिलों में बेगूसराय हत्या, लूट, फिरौती के लिए अपहरण, तस्करी जैसे संगीन अपराधों के लिए जाना जाता था। दियारा की रेत खून से लाल रहती थी। सरकार के चलाए आपरेशन कोबरा जैसे पांच अभियान नाकाम रहे। मगर आपरेशन फ्लश आउट ने लोगों के मन में पुलिस के प्रति खोया यकीन वापस ला दिया था। और यह काम इन्होंने जन जागरण से संभव किया था। जनजागरण में इनका शुरू से ही यकीन रहा है। आज भी शराब बंदी व नशामुक्ति के लिए ये गांव-गांव, शहर-शहर जाकर जन जागरण का काम करने में लगे हैं।

बेगूसराय बतौर एसपी इनकी पहली पोस्टिंग थी। इससे पहले ये बाढ़ में एएसपी थे। आईपीएस गुप्तेश्वर पांडे ने बताया था कि बाढ़ में तैनाती के दौरान बेगूसराय के बदमाशों के बारे में पता था। वहां जाते ही इनके अड्डों की पहचान की। गांवों में शांति सेना बनाकर सूचनाएं जुटाई। पुलिस के बड़े अधिकारियों के सहयोग से आपरेशन फ्लश आउट चलाया।

ढाई दशक पहले बेगूसराय के नाम से रूह कांप उठती थी। कामदेव सिंह, कैलू यादव के खूनी संघर्ष को कौन नहीं जानता। साल 1986 में इन शातिरों से हुई पुलिस मुठभेड़ के बाद छह जवान शहीद हो गए थे। उन्हें उठा नाव पर लाद बीच गंगा नदी में ले जाकर उनके पेट चीर बहा दिया था। स्त्रेधा यादव, आनंदी यादव कुख्यात तो वहीं मारे गए थे। इनके अलावे शत्रुघन राय और सुरंती सिंह के दो अलग-अलग गिरोह थे। ये भी मारे गए थे। अशोक सम्राट, हिप्पी साहनी, चुनचुन महतो फरार हो गए थे। मगर पुलिस के लिए सिरदर्द थे।

उस वक्त इन्होंने एक दर्जन से ज्यादा मुठभेड़ में दो दर्जन बदमाश मार गिराए थे। चार हजार गिरफ्तारियां की थी। दो सौ से ज्यादा हथियार बरामद किए थे। जिनमें एके 47, एके 74, स्वचालित रायफल भी थीं। हजारों जिंदा गोलियां जब्त की थीं। उन्होंने बताया था कि अशोक सम्राट का आतंक कम नहीं था। इसके खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ जनसभाएं कीं। पुलिस को सामाजिक उत्थान का औजार बनाया। 80 से ज्यादा जनसभाएं कीं। बछवाड़ा, मंसूरचड़ और बेगूसराय वगैरह की सभाएं बड़ी थीं। 22 जनसभाओं में हाथी-घोड़े के साथ लोगबाग पहुंचे थे।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इनकी वहीं वाली छवि को ध्यान में रख इन्हें राज्य के पुलिस महकमा का मुखिया बनाया है। वाकई आज बिहार एक दफा फिर अपराधियों के शिकंजे में है। जहां रोजाना आठ हत्याएं और चार बलात्कार के मामले हो रहे हैं। सामने लोकसभा चुनाव हैं। इनके सामने बड़ी चुनौती है।

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