ताज़ा खबर
 

नीतीश कुमार की रेलवे यांत्रिकी व विद्युत इंजीनियरिंग संस्थान बंद न करने की अपील, पीएम के सामने रेलमंत्री से गुहार

जानकार बताते है कि इस संस्थान को जमालपुर से शिफ्ट करने की कई दफा कोशिश हो चुकी है। इतना ही नहीं 2015 के बाद इसके लिए प्रवेश परीक्षा लेने का अधिकार यूपीएससी से ले लिया गया है। यूं कहें कि प्रवेश बंद ही है।

जमालपुर का रेलवे यांत्रिकी व विद्युत इंजीनियरिंग संस्थान (इरिमी)।

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने रेलमंत्री पीयूष गोयल से जमालपुर स्थित रेलवे इंस्टीट्यूट फॉर मैकेनिकल एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (ईरीमी) के गौरव को फिर से लौटाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने आग्रह किया कि इरिमी जैसी दूसरी संस्था की भी स्थापित की जाए।

शुक्रवार 18 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेलवे से जुड़ी बिहार की कई योजनाओं को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए राष्ट्र को समर्पित किया। इसी दौरान मुख्यमंत्री को भी बोलने का मौका दिया गया। यह पहले से तय था। उन्होंने सभी के सामने अपनी बात रखते हुए इरिमी का मुद्दा भी उठाया। यह संस्थान ब्रिटिश काल में ही 1888 में स्थापित की गई थी। 1927 से यहां छात्र रेलवे मेकेनिकल और विद्युत इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रेलवे में ही नौकरी पाते थे। इसमें संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा के माध्यम से प्रवेश होता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां चार साल की पढ़ाई कर निकलने वाले छात्र अपने को गौरवान्वित महसूस करते थे। प्रधानमंत्री और रेलमंत्री ने उनकी बातों को गौर से सुना जरूर, मगर इस बाबत कोई जवाब नहीं दिया।

जानकार बताते है कि इस संस्थान को जमालपुर से शिफ्ट करने की कई दफा कोशिश हो चुकी है। इतना ही नहीं 2015 के बाद इसके लिए प्रवेश परीक्षा लेने का अधिकार यूपीएससी से ले लिया गया है। यूं कहें कि प्रवेश बंद ही है। बताते है कि 2015 में प्रवेश लिए केवल छह छात्र ही बचे है। इसके बाद से दाखिला बंद है। यहां 65 छात्रों का दाखिल होता था।

कोरोना काल में इस संस्थान को जमालपुर से लखनऊ स्थानांतरित करने को लेकर रेल मंत्रालय ने नोटिस भेजी थी। यह अप्रैल की बात है। इसका बिहार सरकार ने केंद्र सरकार के इस फैसले का विरोध पत्र लिखकर किया था। अब इस फैसले पर रेल मंत्रालय ने आश्वस्त किया है कि फिलहाल जमालपुर के इस संस्थान को स्थानांतरित करने की कोई योजना नहीं है। रेलवे ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि संस्थान को उत्तरप्रदेश ले जाने का दावा गलत और भ्रामक है। हालांकि प्रधानमंत्री के सामने सीएम नीतीश कुमार के इस मुद्दे को उठाना इस बात की पुष्टि करता है कि इसके स्थानंतरण की सुगबुगाहट कहीं न कहीं है।

यदि रेलवे महाप्रबंधक के पत्र पर गौर करे तो बहुत कुछ साफ है। चयन स्थल को लेकर मंथन बीते साल से ही किया जा रहा है। गोरखपुर के महाप्रबंधक (यांत्रिक) के मुयांई/ नियोजन पदाधिकारी ने 27 अप्रैल 20 को पत्र जारी कर स्थल के ब्योरा की पुष्टि कर दी है। पत्र में कहा गया है कि मोहीबुल्ला रेलवे स्टेशन (लखनऊ जंक्शन- सीतापुर खण्ड) के पास जगह उपलब्ध है। इरिमी को स्थानांतरित किए जाने को लेकर महाप्रबंधक से दूरभाष वार्ता के बाद अपर महाप्रबंधक ने अनुमोदन प्रदान किया है, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके। अब देखना है कि मुख्यमंत्री की बातों का कितना असर प्रधानमंत्री और रेलमंत्री पर पड़ता है।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 UP डिटेंशन सेंटर का विरोध: बैकफुट पर योगी आदित्य नाथ सरकार, नहीं बनेगा गाजियाबाद में
2 Delhi Riots 2020 में ‘बर्बाद हुए’ 3200 परिवारों ने मांगा मुआवजा, पर 900 के आवेदन खारिज, जिसका हुआ 3 लाख का नुकसान उसे मिले सिर्फ 750 रुपए
3 Bihar Elections 2020: चिराग के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं नीतीश! JDU की चाहत- LJP को अपने कोटे से सीटें दे BJP, हमें मिले 115
यह पढ़ा क्या?
X