बिहार की राजनीति में इन दिनों बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के बीच अब एक ही परिवार से जुड़ी दो अलग-अलग राजनीतिक यात्राओं की तैयारी हो रही है। एक तरफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के अंतिम चरण पर निकलने वाले हैं, तो दूसरी ओर उनके बेटे निशांत कुमार भी अपनी पहली राजनीतिक यात्रा शुरू करने जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं। ऐसे में उनकी समृद्धि यात्रा का यह चरण उनके राजनीतिक जीवन की उपलब्धियों और विरासत को जनता के सामने रखने का अंतिम बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, समृद्धि यात्रा के इस चरण में नीतीश कुमार 10 जिलों का दौरा करेंगे। इनमें सुपौल, मधेपुरा, सहरसा, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, खगड़िया, बेगूसराय और शेखपुरा शामिल हैं। यह यात्रा 10 मार्च से 14 मार्च तक चलेगी।
दरअसल, नीतीश कुमार ने इस यात्रा की शुरुआत 16 जनवरी को की थी। पहले दो चरणों में वे 12 जिलों का दौरा कर चुके हैं। यात्रा के दौरान वे सरकार की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा करेंगे, कई नई परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और नई योजनाओं की आधारशिला भी रखेंगे। इसके साथ ही वे अलग-अलग जगहों पर जनसभाओं को भी संबोधित करेंगे।
उधर, हाल ही में जनता दल यूनाइटेड में शामिल हुए निशांत कुमार भी अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने की तैयारी में हैं। उन्होंने घोषणा की है कि वे बिहार के सभी 38 जिलों का दौरा करेंगे। इस यात्रा का मकसद पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलना और संगठन को मजबूत बनाए रखना बताया जा रहा है।
निशांत कुमार ने कहा- वे बिहार के सभी 38 जिलों का दौरा करेंगे
सोमवार को उन्होंने पटना के कंकड़बाग में अपनी मां मंजू सिन्हा को श्रद्धांजलि देने के बाद कहा कि वे पूरे राज्य का दौरा करेंगे और कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, निशांत कुमार अपनी यात्रा की शुरुआत पश्चिम चंपारण से करेंगे। यह स्थान महात्मा गांधी के सत्याग्रह आंदोलन से जुड़ा रहा है। खास बात यह भी है कि नितीश कुमार ने भी अपनी कई यात्राओं की शुरुआत इसी जिले से की थी।
निशांत कुमार ने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश भी लिखा। उन्होंने कहा कि माता-पिता जीवन की सबसे बड़ी ताकत और प्रेरणा होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनकी मां आज जीवित होतीं तो उन्हें यह नई जिम्मेदारी संभालते देखकर बहुत खुशी होती।
यात्रा की शुरुआत से पहले निशांत कुमार ने पटना साहिब गुरुद्वारा और पटन देवी मंदिर में भी मत्था टेका। उन्होंने कहा कि बिहार की यही खूबसूरती है कि यहां आस्था, भाईचारा और आपसी सम्मान की परंपरा सदियों से लोगों को जोड़ती रही है।
इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। भारतीय जनता पार्टी, जो बिहार में जनता दल यूनाइटेड के साथ मिलकर सरकार चला रही है, ने कहा कि निशांत कुमार की यात्रा पार्टी का आंतरिक मामला है। पार्टी नेताओं का कहना है कि नीतीश कुमार की यात्राएं हमेशा से जनता से सीधे जुड़ने का एक प्रभावी तरीका रही हैं।
वहीं, विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल ने इस पर अलग राय जताई है। पार्टी का कहना है कि नीतीश कुमार की यात्रा का मकसद यह दिखाना है कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने का फैसला उन्होंने अपनी इच्छा से लिया है, न कि किसी दबाव में। विपक्ष का यह भी कहना है कि राजनीति और प्रशासन को समझने के लिए निशांत कुमार को अपने पिता के साथ समृद्धि यात्रा में शामिल होना चाहिए था।
कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति में इन दोनों यात्राओं को काफी अहम माना जा रहा है। एक तरफ यह नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को मजबूत करने का प्रयास है, तो दूसरी ओर निशांत कुमार के राजनीतिक सफर की शुरुआत के तौर पर भी इसे देखा जा रहा है।
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जनता दल यूनाइटेड (JDU) के सांसद संजय कुमार झा ने साफ कर दिया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्य में रहेंगे और नई सरकार को मार्गदर्शन देते रहेंगे। उन्होंने कहा कि यह भ्रम बिलकुल गलत है कि नीतीश कुमार राज्य छोड़ रहे हैं या सक्रिय नहीं रहेंगे। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
