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भाजपा के साथ जाकर भी केंद्र से दीघा जमीन विवाद नहीं सुलझा सकी है नीतीश सरकार

आर ब्लॉक दीघा रेलवे रेल लाईन पर एक बार फिर राज्य सरकार और रेल मंत्रालय आमने सामने है।

Author पटना | April 14, 2018 00:22 am
पीएम के साथ नीतीश कुमार।

आर ब्लॉक दीघा रेलवे रेल लाईन पर एक बार फिर राज्य सरकार और रेल मंत्रालय आमने सामने है। केन्द्र और सूबे में एनडीए सरकार होने से लोगों के बीच ये उम्मीद बंधी थी कि बर्षो से लंबित लगभग 72 एकड़ जमीन का मामला अब सुलझा लिया जायेगा। फिलहाल इस पर सहमति बनती नहीं दिखती है। रेल मंत्रालय ने जमीन देने के संबंध में अब तक कोई मंजूरी नहीं दी है। उसका दावा है कि ये जमीन कॉमर्शियल है। दाम वही लगेगा। इधर सूबे के पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव का कहना कि अब भी जमीन का मामला सुलझा नहीं है। हाँ उनका दावा है कि अप्रैल माह के अंत तक वो खुद रेल मंत्री पीयूष गोयल से मिल कर मामला सुलझा लेगें। बताते चलें रेल मंत्रालय इस पूरे जमीन की कीमत 896 करोड़ रुपये लगा चुका है। दूसरी ओर बिहार सरकार के निर्देश पर पटना के जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित एक कमेटी ने इस पूरे जमीन का दाम 221 करोड़ रुपये तय किया है। दरअसल यही इस मामले का पेंच है।

अब खबर है कि एक बार फिर से सूबे के पथ निर्माण मंत्री ने रेल मंत्रालय को जमीन का मूल्यांकन करने का आग्रह करने वाले हैं। बताते चलें राजधानी पटना के शहरी यातायात को सुगम बनाने के लिए खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कई बार इस पर पहल किया है। अब राज्य सरकार की बात करें तो वो इस रेल लाईन की जगह फोर लेन सड़क बनाने के मुड में है। लोगों की उम्मीद तब और बढ़ गयी जब ब्लॉक-दीघा के बीच लगभग छह किलोमीटर रेल लाइन की जमीन पर फोर लेन की सड़क के साथ-साथ मेट्रो ट्रैक तैयार करने का भी प्रस्ताव बिहार सरकार की ओर से आया अगर राज्य सरकार की योजना धरताल पर आ जाती है तो बिषेश कर पश्चिमी पटना को इस फोर लेन और उसके समानान्तर मेट्रो से काफी सहूलियत होती।

उल्लेखनिय है कि जन सरोकार से जुड़े इस मुद्दे पर पटना हाइकोर्ट ने भी कई बार टिप्पणी की है। बताते चलें आर ब्लाक से दीघा छ: किलोमीटर के इस रेलवे लाईन पर प्रति दिन एक फेरी सवारी गाड़ी चलाती है, वो भी भारी नुकसान के बीच।

पिछले दिनों रेलवे का एक उटपटाग बयान भी मीडिया के सुर्खियों में रहा। जब रेल पदाधिकारी ने इस बावत कहा था कि “रेलवे नुकसान में रहकर इस रेल पथ पर गाड़ी नहीं चलायेगी तो लोग इस जमीन को अतिक्रमित कर लेगें।” वैसे रेलवे और बिहार सरकार के बीच मान मनौव्वल का ये खेल बहुत पूराना है। अभी इसी साल जनवरी में पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव ने रेल मंत्री पीयूष गोयल से मिल कर रेलवे की लगभग बेकार पड़ी इस जमीन को राज्य सरकार के देने का आग्रह किया था। प्रतिउत्तर में राज्य सरकार को प्रस्ताव बना कर देने के लिए कहा गया था।

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