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बिहार: चुनाव से पहले शिक्षा को लेकर नीतीश सरकार उठाने जा रही एक बड़ा कदम

पिछले अनुभवों को ध्यान में रखकर इस बिहार विद्यालय परीक्षा समिति बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। (फोटो सोर्स इंडियन एक्सप्रेस)

पिछले अनुभवों को ध्यान में रखकर इस बार बिहार विद्यालय परीक्षा समिति बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। मतलब मान्यता प्राप्त सरकारी स्कूलों की कमी और छात्रों की बढ़ती संख्या को देखकर एक बार फिर बोर्ड इंटर स्कूलों और कॉलेजों को संबंधन देने की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। उल्लेखनीय है कि बोर्ड का ये प्रयोग कोई नया नहीं है। पिछली बार इसी प्रक्रिया में चूक का लाभ उठाकर बिहार बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. लालकेश्वर प्रसाद ने अपने लोगों के माध्यम से शिक्षा की दुकान खोलवा ली थी। नतीजा टॉपर घोटाला सामने आया। बहरहाल, बोर्ड इंटर स्कूलों और कॉलेजों को संबंधन देने की ये प्रक्रिया अगले माह से शुरू कर सकता है। बताते चलें कि टॉपर घोटाला के बाद 2016 से बोर्ड प्रशासन ने संबंधन की प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।

इस दरम्यान बोर्ड प्रशासन संबंधन के सही तरीके पर विचार करने और पहले से संबंधन प्राप्त कॉलेजों व स्कूलों की जांच में जुटा था। जून 2016 से इस जांच प्रक्रिया की शुरुआत हुई और अप्रैल 2017 तक चार चरणों में संस्थानों की जांच प्रक्रिया चली। तब दो सौ से अधिक संस्थानों की मान्यता पहले तो निलंबित की गयी और फिर रद्द। इस बार बोर्ड प्रशासन ने संबंधन के लिए आवेदन प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है। संबंधन के इच्छुक संस्थानों को अपनी पूरी डिटेल बोर्ड प्रशासन को ऑनलाइन ही मुहैया करानी होगी। इसके लिए बोर्ड ने विशेष सॉफ्टवेयर तैयार कराया है। इस सॉफ्टवेयर से इच्छुक संस्थानों को सभी आवश्यक जानकारियां भरने की बाध्यता होगी। आवेदन प्रक्रिया के बाद तीन से पांच माह के अंदर संस्थानों का फिजिकल वेरिफिकेशन बोर्ड करा लेगा। दोनों में मिलान के बाद संस्थान को मान्यता और सीटों का आवंटन जारी कर दिया जाएगा। जिन संस्थानों को मान्यता मिलेगी, वो 2019 में नौवीं और 11वीं कक्षा में नामांकन ले सकेंगे।

बिहार बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. लालकेश्वर प्रसाद के कार्यकाल में टॉपर घोटाला सामने आने के बाद बोर्ड का पूरा मेकओवर प्रोग्राम शुरू हुआ था। डॉ. प्रसाद को हटाए जाने के बाद बोर्ड का जिम्मा पटना के प्रमंडलीय आयुक्त आनंद किशोर को दिया गया, जो अब तक इस पद पर काम कर रहे हैं। बोर्ड के मेकओवर प्रोग्राम में उन सभी संस्थानों की जांच हुई, जिन्हें डॉ. लालकेश्वर प्रसाद के कार्यकाल के दौरान मान्यता मिली थी।

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