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NIRF ranking 2019: 7वें से 20वें नंबर पर पहुंची दिल्ली यूनिवर्सिटी की रैंकिंग, पिछले साल की रैंकिंग पर बरकरार जेएनयू-जामिया

NIRF की रैंकिंग सामने आई है जिसमें दिल्ली यूनिवर्सिटी की रैंकिग गिरी है। बता दें कि पिछली बार जहां यूनिवर्सिटी 7वें नंबर पर थी वहीं इस बार वो खिसकर 20वें नंबर पर आ गई है।

Author Updated: April 9, 2019 8:21 PM
दिल्ली यूनिवर्सिटी (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

नेशनल इंस्टीट्यूट रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) द्वारा हाल में ही एक सर्वे में दिल्ली यूनिवर्सिटी को 20वां स्थान दिया गया है। पिछले साल हुए सर्वे में देश के सभी यूनिवर्सिटियों में डीयू को सातवां स्थान प्राप्त हुआ था। बताया जा रहा है कि डीयू के पिछले कुछ सालों में डीयू के यूनिवर्सिटी रैंकिंग में भारी गिरावट आई है।

रैंकिंग में गिरावट का कारणः राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा रैंकिंग का ऐलान किया गया है। देश में स्थित सभी शिक्षण संस्थानों को अलग अलग कैटगरी में यह रैंकिंग दी जाती है। बता दे कि इस रौंकिंग में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)- मद्रास को अव्वल नंबर मिला है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा जारी की गई रैंकिंग में जेएनयू को फिर से दूसरे और जामिया को 12वां स्थान प्राप्त हुआ है। दोनों ने अपने पिछले साल की रैंकिंग को बरकरार रखा है। लेकिन डीयू की रैंकिंग में लगातार गिरावट देखने को मिली है। मापदंडों के अनुसार डीयू ने ‘स्थायी संकाय पर जोर’, बजट का सही से उपयोग, प्रकाशनों की संख्या और गुणवत्ता के साथ छात्र-शिक्षक अनुपात पर जोर नहीं देने की बात सामने आई हैं । वहीं डीयू के रैंकिंग में गिरावट का कारण शिक्षण, शिक्षण और संसाधन (टीएलआर) और अनुसंधान, व्यावसायिक अभ्यास और सहयोगात्मक प्रदर्शन (आरपीसी) को बताया जा रहा है।

 

 

National Hindi News, 9 April 2019 LIVE Updates:पढ़ें आज की बड़ी खबरें

 

आधे डीयू के शिक्षक अनौपचारिक आधार पर नियुक्तः डीयू में स्थायी संकाय भी एक कारण है जो इसके रैंकिंग को पहले से और भी खराब किया है। डीयू को रैंकिंग में 100 में 47.87 अंक दिया गया है जो पिछले साल 52.52 अंक था। इसमें नियुक्त किए गए 50 प्रतिशत (करीब 4000) से ज्यादा शिक्षक अनौपचारिक आधार पर नियुक्त किए गए हैं। बता दें कि शिक्षक अनौपचारिक आधार पर नियुक्त के लिए डीयू के शिक्षक संघ ने विरोध भी किया था। NIRF के वेबसाइट के द्वारा यह पता चला है कि डीयू ने ‘कैपिटल एसेट्स का निर्माण’ में बहुत ही कम खर्च किया है। वहीं इसके सेमिनार / सम्मेलन / कार्यशालाओं पर खर्च भी 2016-17 में 1.06 करोड़ रुपये से गिरकर 2017-18 में 81.81 लाख रुपए हो गया है। डीयू ने कुछ भाग में अच्छा काम किया है। आंकड़ो के अनुसार ग्रैजुएशन आउटकम (100 में से 87.18, पिछले वर्ष के 85.14 के विपरीत), आउटरीच और विशिष्टता (पिछले वर्ष के 51.26 की तुलना में इस वर्ष 100 में से 55.4) और धारणा (इस वर्ष 100 में से 41.11, जैसा कि पिछले वर्ष 33.15 के विपरीत था) में अच्छी बढ़त मिली है।

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