नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG) को फटकार लगाई है। NGT ने प्रयागराज में गंगा नदी पर पुल के कथित अवैध निर्माण के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करने में विफल रहने पर NMCG को फटकार लगाई। NGT ने कहा है कि जिम्मेदारी सिर्फ एक अधिकारी पर नहीं डाली जा सकती।

BKU (पुरवा) की याचिका पर सुनवाई कर रहा था NGT

NGT की प्रिंसिपल बेंच (जिसमें चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर ए सेंथिल वेल शामिल थे) भारतीय किसान यूनियन (पुरवा) द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। NGT ने NMCG से नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों की पहचान करने को कहा।

NGT ने 30 जनवरी को कहा था, “गंगा नदी (कायाकल्प, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016 का उल्लंघन करते हुए और NMCG की अनुमति के बिना पुल के निर्माण का निर्णय लेने और आगे बढ़ने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।”

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NGT ने आगे कहा, “NMCG के जवाब से पता चलता है कि वह केवल रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर के खिलाफ कार्रवाई करने का इरादा रखता है, जो पुल के निर्माण के लिए कार्यकारी एजेंसी है। जिला स्तरीय समिति के प्रमुख की जिम्मेदारी थी कि यह सुनिश्चित किया जाए कि उसके जिले में 2016 के आदेश का उल्लंघन न हो। NMCG ने ऐसे निर्णय लेने और 2016 के आदेश की आवश्यकता का पालन किए बिना आगे बढ़ने के लिए जिम्मेदार लोगों का कोई कम्युनिकेशन रिकॉर्ड पर नहीं रखा है। रिकॉर्ड पर NMCG के रुख से यह स्पष्ट है कि ऐसा कोई मैसेज नहीं भेजा गया है या ऐसे अधिकारी की पहचान करने के लिए कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई है। इसलिए हम NMCG और प्रतिवादी नंबर पांच से किए गए टिप्पणियों के संदर्भ में आवश्यक कार्रवाई करने की अपेक्षा करते हैं। अगली सुनवाई की तारीख 23 अप्रैल से कम से कम एक हफ्ते पहले रिपोर्ट जमा करें।”

क्या है मामला?

भारतीय किसान यूनियन (पुरवा) ने 2024 में NGT से संपर्क किया और प्रयागराज में दारागंज और झूसी के बीच एक रेलवे पुल के निर्माण में उल्लंघन का आरोप लगाया। उसने आरोप लगाया कि पुल गंगा नदी के बाढ़ के मैदानों पर और नदी के पार NMCG की किसी भी पूर्व अनुमति के बिना बनाया गया था। यह गंगा नदी (कायाकल्प, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016 के प्रावधानों का उल्लंघन था।

एक और आरोप लगाया गया कि कंस्ट्रक्शन के दौरान निकलने वाला मलबा गंगा नदी में फेंका जा रहा था। RVNL इस पुल के लिए काम करने वाली एजेंसी थी।हालांकि, NGT ने पाया कि रिपोर्ट से साफ पता चलता है कि NMCG सिर्फ प्रोजेक्ट डायरेक्टर के खिलाफ कार्रवाई करना चाहता था। पढ़ें चारधाम की 13 परियोजनाओं के लिए काटे गए 17 हजार से ज्यादा पेड़