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स्कूलों-कालेजों में पानी बचाने के उपाय किए जाएं

पानी के गहराते संकट को देखते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी)ने दिल्ली के सभी स्कूलों व कालेजो में बारिश का पानी सहजने के प्रावधान किए जाने को अनिवार्य बनाया है।

Author नई दिल्ली | November 17, 2017 12:47 AM
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल। (File Photo)

पानी के गहराते संकट को देखते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी)ने दिल्ली के सभी स्कूलों व कालेजो में बारिश का पानी सहजने के प्रावधान किए जाने को अनिवार्य बनाया है। एनजीटी ने राजधानी के सभी निजी व सरकारी स्कूल-कालेजों को गुरुवार को जारी एक निर्देश में कहा है कि सभी जगह वर्षा-जल संवर्धन उपकरण लगाए जाएं। अधिकरण ने आदेश न मानने वाले संस्थान पर जुर्माना लगाने की चेतावनी भी दी है। जुर्माना राशि पांच लाख रुपए होगी। इस बाबत एनजीटी ने दिल्ली सरकार के तमाम विभागों व जलबोर्ड के अधिकारियों वाली एक समिति गठित की और इसका जिम्मा उस समिति को दिया है।
यमुना के पानी, गंग नहर व भू-जल पर निर्भर राजधानी में गहराते जल-संकट को देखते हुए एनजीटी ने इस पर गंभीर रुख अख्तियार किया है। अधिकरण ने अबकी दिल्ली के सभी निजी, सरकारी अर्ध-सरकारी स्कूलों व कालेजों को निर्देश दिया है कि सभी स्कूल व संस्थान अपने परिसर में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाएं। इसका खर्च भी वे कालेज खुद उठाएंगे। इसके लिए दो महीने का समय दिया गया है। जो कालेज इस पर अमल नही करेंगे, उन पर कार्रवाई की जाएगी।
एनजीटी के आदेश में यह भी कहा गया है कि अधिकरण के प्रतिनिधि स्कूलों का खुद मुआयना करेंगे। जो स्कूल जल-संरक्षण उपाय नहीं करेंगे उन पर तो जुर्माना लगेगा, लेकिन जिन कालेजों या स्कूलों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना संभव नहीं होगा, उन स्कूलों-कालेजों को पर्यावरण शुल्क देना होगा। लेकिन यह भी तय तब होगा जब अधिकरण की जांच टीम आकर खुद स्कूल बाकी पेज 8 पर उङ्मल्ल३्र४ी ३ङ्म स्रँी 8
का मुआयना करेगी।
एनजीटी ने दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली के पर्यावरण मंत्रालय, दिल्ली के शिक्षा मंत्रालय सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों वाली एक समिति गठित कर दी है। समिति की जिम्मेदारी होगी कि वह पूरा ब्योरा तैयार कर इस पर जल्दी से जल्दी अमल कराए। इसके पहले भी स्कूलों में पानी के संकट को दूर करने के लिए जल संरक्षण के प्रावधान करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन इसके लिए जो डिजाइन जल बोर्ड ने तैयार किए थे, उनमें तमाम खामियां बताकर उसे खारिज कर दिया गया था। अब इस पर नए सिरे से काम किया जाना है। साथ ही इस पर जागरूकता बढ़ाने की वकालत भी की गई है ताकि जल-संरक्षण को प्रभावी ढंग से किया जाए।

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