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प्रदूषण फैलाने वाले प्रतिष्ठानों पर लटकी बंदी की तलवार

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) की फटकार के बाद उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हिंडन और यमुना नदी में बढ़ते प्रदूषण की रोकथाम के लिए 15 दिनों का विशेष जांच अभियान चलाएगा।

Author नई दिल्ली | March 5, 2016 4:47 AM
NGT File Photo

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) की फटकार के बाद उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हिंडन और यमुना नदी में बढ़ते प्रदूषण की रोकथाम के लिए 15 दिनों का विशेष जांच अभियान चलाएगा। अभियान के तहत केंद्रीय और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों का अनुपालन नहीं करने वाले प्रतिष्ठान बंद कराए जाएंगे। गौर करने वाली बात यह है कि 15 दिवसीय विशेष अभियान की टीमें फैक्ट्रियों की नहीं बल्कि शोरूम, होटल, रेस्टोरेंट और वर्कशॉप आदि की जांच करेंगी। जिन प्रतिष्ठानों में दूषित पानी के ट्रीटमेंट की सुविधा चालू हालत में नहीं पाई जाएगी, विभाग उन्हें बंद करने का आदेश जारी करेगा।

सूत्रों के मुताबिक, यह आदेश बोर्ड मुख्यालय से जारी किए गए हैं। अभियान में लगाई जाने वाली टीमें औचक निरीक्षण कर प्रतिष्ठानों से निकलने वाले पानी के नमूनों की जांच करेंगी। पिछले दो महीने के दौरान शहर के करीब डेढ़ दर्जन से ज्यादा प्रतिष्ठानों को ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगा होने के चलते बंदी के आदेश के नोटिस जारी किए गए हैं। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार यह विशेष जांच अभियान 15 मार्च से शुरू किया जाएगा। अभियान से पहले बोर्ड के जेई समेत अन्य अधिकारियों को उनके इलाके में चलने वाले ऐसे प्रतिष्ठानों की सूची तैयार करने को कहा गया है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, सीवर लाइन में होटल, रेस्टोरेंट, वर्कशॉप आदि से पानी जाने से पहले उसका शोधन (ट्रीटमेंट) किया जाना जरूरी है। उसी के बाद पानी को सीवर लाइन में डालने की इजाजत है। खासतौर पर अस्पताल, कार और मोटरसाइकिल वर्कशॉप से निकलने वाले पानी को ट्रीट नहीं करने से समूची सीवर लाइन में कीटाणु पैदा होने का खतरा होता है। लिहाजा मांग के अनुरूप ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के बाद ही पानी को सीवर लाइन में डाला जाना चाहिए।

बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी बीबी अवस्थी ने बताया कि काफी हद तक हिंडन-यमुना समेत भूजल में प्रदूषण की रोकथाम केवल प्रतिष्ठानों में ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर की जा सकती है। प्लांट लगाने वाले प्रतिष्ठानों से नमूने लेकर हर तीन महीने में एक बार प्रयोगशाला में जांच कराने का नियम है। लंबे समय से इस ओर सख्ती नहीं होने की वजह से बड़ी संख्या में प्रतिष्ठान दूषित पानी को सीधे सीवर लाइन में डाल रहे हैं।
जिन प्रतिष्ठानों में ट्रीटमेंट प्लांट लगे हैं, वे भी इन्हें चला नहीं रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विशेष अभियान के दौरान बगैर ट्रीटमेंट प्लांट के चलने वाले प्रतिष्ठानों के बंदी आदेश जारी कराकर उनके बिजली और पानी के कनेक्शन कटवाए जाएंगे।

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