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रिपोर्ट में सामने आया सच : कम्पाउंडर्स ने बच्चे को इतनी तेज खींचा कि पैरों की हड्डियां टूट गईं और लिवर फट गया

जैसलमेर के एक अस्पताल में डिलिवरी के दौरान बच्चे का सिर मां की कोख में रहने के मामले में 2 कम्पाउंडर्स की लापरवाही सामने आई है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, प्रसव के दौरान बच्चे को इतने तेज खींचा गया कि उसके पैरों की हड्डियां टूट गईं और लीवर फट गया।

प्रतीकात्मक फोटो, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

जैसलमेर के एक अस्पताल में डिलिवरी के दौरान बच्चे का सिर मां की कोख में रहने के मामले में 2 कम्पाउंडर्स की लापरवाही सामने आई है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, प्रसव के दौरान बच्चे को इतने तेज खींचा गया कि उसके पैरों की हड्डियां टूट गईं और लिवर फट गया। फिलहाल दोनों कम्पाउंडर्स के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है और उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। वहीं, ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर को एपीओ किया गया।

50 मीटर दूर था डॉक्टर का घर, लेकिन नहीं बुलाया : बताया जा रहा है कि रामगढ़ स्थित इस अस्पताल से डॉक्टर का घर महज 50 मीटर दूर है, लेकिन कम्पाउंडर्स ने उन्हें नहीं बुलाया। वे खुद ही डिलिवरी कराने लगे। अस्पताल के कर्मचारियों के मुताबिक, अमृतराम कम्पाउंडर है, जबकि जूंझारसिंह संविदा पर कार्यरत है।

आरोपी का कहना- मानवता के नाते कराया प्रसव : कम्पाउंडर अमृतराम का कहना है कि उसने बच्चे के परिजनों के कहने पर और मानवता के नाते डिलिवरी कराने का प्रयास किया। वह सफल नहीं हुआ तो उसने जूंझारसिंह को बुलाया और दोबारा डिलिवरी कराने लगा। इस दौरान बच्चे का धड़ बाहर आ गया, लेकिन सिर अंदर ही रह गया। अमृतराम ने बताया कि रेफर करने के बाद उसने परिजनों से नवजात का धड़ ले जाने के लिए कहा तो उन्होंने इनकार कर दिया।

मां की हालत गंभीर : जोधपुर के अस्पताल में भर्ती दीक्षा कंवर की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। लोगों का कहना है कि बच्चे की मौत के बारे में उन्हें फिलहाल कुछ नहीं बताया गया है।

अब नहीं किया नवजात का अंतिम संस्कार : मृत नवजात के पिता तिलोकसिंह के मुताबिक, लापरवाह चिकित्साकर्मी के खिलाफ जल्द ही कोई कार्रवाई नहीं की हुई तो वे बच्चे के शव के साथ धरना प्रदर्शन करेंगे। फिलहाल पुलिस ने अमृतराम व जूंझारसिंह के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिलने के बाद संगीन धाराएं लगाई जा सकती हैं।

मानवाधिकार आयोग ने भी लिया संज्ञान : जैसलमेर जिला स्थित रामगढ़ कस्बे के अस्पताल में डिलिवरी के दौरान बच्चे के दो टुकड़े होने की घटना पर राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लिया। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश टाटिया ने जैसलमेर के सीएमएचओ व एसपी से रिपोर्ट मांगी है। वहीं, रामगढ़ अस्पताल के डॉ. निखिल शर्मा को एपीओ कर दिया गया। वहीं, कम्पाउंडर्स अमृतराम व जूंझारसिंह को सस्पेंड किया गया।

मेल नर्स करा सकते हैं प्रसव : सीएमएचओ डॉ. बी.एल. बुनकर का कहना है कि अमृतराम ने डिलिवरी कराने की ट्रेनिंग नहीं ली थी, लेकिन वह प्रसव करा सकता है। अगर अस्पताल में ट्रेंड नर्स होती तो उसे प्राथमिकता दी जाती। ऐसा न होने की स्थिति में अमृतराम डिलिवरी कराने के लिए सक्षम था।

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