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नई स्वास्थ्य नीति में मुफ्त दवाएं व अनिवार्य स्वास्थ्य देखभाल

नई स्वास्थ्य नीति में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता दिए जाने को रेखांकित करते हुए सरकार ने गुरुवार को कहा कि इसमें स्वास्थ्य खर्च को समयबद्ध ढंग से जीडीपी के 2.5 फीसद तक बढ़ाने के साथ सार्वजनिक अस्पतालों में नि:शुल्क दवाएं एवं अनिवार्य स्वास्थ्य देखभाल करने पर जोर दिया गया है।

Author नई दिल्ली | March 17, 2017 6:23 AM
हेल्थ मिनिस्टर जेपी नड्डा

नई स्वास्थ्य नीति में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता दिए जाने को रेखांकित करते हुए सरकार ने गुरुवार को कहा कि इसमें स्वास्थ्य खर्च को समयबद्ध ढंग से जीडीपी के 2.5 फीसद तक बढ़ाने के साथ सार्वजनिक अस्पतालों में नि:शुल्क दवाएं एवं अनिवार्य स्वास्थ्य देखभाल करने पर जोर दिया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 पर संसद में दिए गए अपने बयान में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने बताया कि मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 को अनुमोदित कर दिया है जो देश के स्वास्थ्य क्षेत्र के इतिहास में बहुत बड़ी उपलब्धि है। यह नीति बदलते सामाजिक आर्थिक, प्रौद्योगिकी और महामारी विज्ञान परिदृश्य में मौजूदा और उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए 15 साल के अंतराल के बाद अस्तित्व में आई है।

उन्होंने कहा कि नई नीति में रोकथाम और स्वास्थ्य संवर्द्धन पर बल देते हुए बीमार की देखभाल के बजाए आरोग्यता केंद्रित करने पर जोर दिया गया है। इसमें जन्म से संबंधित जीवन प्रत्याशा को 67.5 से बढ़ा कर साल 2025 तक 70 करने, 2022 तक प्रमुख रोगों की व्याप्तता तथा इसके रुझान को मापने के लिए अशक्तता समायोजित आयु वर्ष (डीएएलवाई) सूचकांक की नियमित निगरानी करने के साथ साल 2025 तक पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में मृत्यु दर को कम करके 23 करना, नवजात शिशु मृत्यु दर को घटा कर 16 करना और मृत जन्म लेने वाले बच्चे की दर को 2025 तक घटाकर ‘एक अंक’ में लाना है।

नड्डा ने बताया कि इसमें साल 2018 तक कुष्ठ रोग, वर्ष 2017 तक कालाजार और वर्ष 2017 तक लिम्फेटिक फाइलेरियासिस का उन्मूलन करने की बात कही गई है। इसके साथ ही क्षय रोगियों में 85 फीसद से अधिक की इलाज दर प्राप्त करने पर जोर दिया गया है ताकि वर्ष 2025 तक इसके उन्मूलन की स्थिति को प्राप्त किया जा सके। नई स्वास्थ्य नीति में साल 2025 तक दृष्टिहीनता की व्याप्तता घटाने और इसके रोगियों के वर्तमान स्तर को घटाकर एक तिहाई करने का प्रस्ताव किया गया है। इसके साथ ही हृदयवाहिका रोग, कैंसर, मधुमेह या श्वांस संबंधी पुराने रोगों से होने वाली अकाल मृत्यु दर को साल 2025 तक घटाकर 25 फीसद करने की बात कही गई है। उन्होंंने बताया कि नीति में आयुष प्रणाली के त्रिआयामी एकीकरण की परिकल्पना की गई है जिसमें क्रॉस रेफरल, सह स्थल और औषधियों की एकीकृत पद्धतियां शामिल हैं। इसमें प्रभावी रोकथाम और चिकित्सा करने की व्यापक क्षमता पर जोर दिया गया है जो सुरक्षित और किफायती है। योग को अच्छे स्वास्थ्य संवर्द्धन के भाग के रूप में स्कूलों एवं कार्यस्थलों में अधिक व्यापक ढंग से लागू किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि नीति में स्वास्थ्य सुरक्षा का समाधान करने और औषधियों एवं उपकरणों के लिए मेक इन इंडिया को लागू करने की परिकल्पना की गई है। इसमें जन स्वास्थ्य लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए चिकित्सा उपकरणों तथा उपस्करों के लिए नीतियों के साथ सामंजस्य स्थापित करने की भी परिकल्पना की गई है। नई स्वास्थ्य नीति में नीतिगत लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक समयबद्ध कार्यान्वयन ढांचा लागू करने का प्रयास किया गया है। इसमें स्वास्थ्य एवं आरोग्यता केंद्रों के माध्यम से सुनिश्चित व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल का बड़ा पैकेज प्रदान करने की परिकल्पना की गई है जो व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल पैकेज में महत्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाता है।

मंत्री ने बताया कि इसमें प्राथमिक परिचर्या के लिए संसाधनों के व्यापक अनुपात अर्थात दो तिहाई या इससे अधिक आवंटन की हिमायत की गई है। इसका उद्देश्य प्रति 1000 आबादी के लिए दो बिस्तरों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है ताकि आपात स्थिति में जरूरत पड़ने पर इसे उपलब्ध कराया जा सके। इस नीति में उपलब्धता और वित्तीय सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए सभी सार्वजनिक अस्पतालों में नि:शुल्क दवाएं, नि:शुल्क निदान तथा नि:शुल्क आपात एवं अनिवार्य स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं प्रदान करने का प्रस्ताव किया गया है।

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