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ग्राउंड रिपोर्ट: ये है “मंदिर बिकाऊ है” वाली इस तस्वीर के पीछे की पूरी कहानी, पढ़िए

सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से एक तस्वीर वायरल हो रही है जिसमें एक मंदिर दिखाया गया है।

Author March 19, 2017 3:02 PM

सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से एक तस्वीर वायरल हो रही है जिसमें एक मंदिर दिखाया गया है। मंदिर जिसकी एक दीवार पर लिखा है कि ‘यह मंदिर बिकाऊ’ है। सोशल मीडिया पर आते ही तस्वीर को लोगों ने शेयर करना शुरू कर दिया। तस्वीर को देखकर यूपी के कैराना की यादें ताजा हो गई जिसमें एक घर के बाहर लिखा था कि ‘वह मकान बिकाऊ है।’ इस बार मामला मंदिर के बिकने का था तो फोटो और तेजी से फैलनी शुरू हुई। लेकिन शेयर हो रही फोटो पूरे मामले का सिर्फ एक पक्ष ही दिखा रही है। इसका दूसरा पक्ष समझने के लिए हम मंदिर पहुंचे। वहां जाकर जो पता चला, वह कुछ इस तरह है-

यह मंदिर दिल्ली में यमुना पार वाले इलाके के घड़ोली गांव में है। जिस इलाके में यह मंदिर है वह मुस्लिम बहुल है। मंदिर के ही आसपास तीन चार मस्जिद भी हैं। कुछ पूरी बनी हैं और कुछ में निर्माण कार्य जारी है। इलाके को ‘मुल्ला कॉलोनी’ के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर, जिसके बिकाऊ होने की बात कही गई उसमें एक साध्वी रहती हैं जिनका नाम है शकुन्तला गुप्ता। उनकी उम्र 68 साल के करीब है। शकुन्तला देवी 1970 के करीब दिल्ली आई थीं। शकुन्तला गौ जीव दया मंडल नाम के संगठन से जुड़ी हैं। वह पढ़ी-लिखी हैं। खबरों-अखबारों पर उनकी नजर रहती है। बताती हैं कि वह पहले नेहरू आदर्श विद्यालय की लाइब्रेरी में काम भी किया करती थीं। उन्होंने कुछ पत्र-पत्रिकाओं के लिए लेखन भी किया है।

क्या है मामला: शकुन्तला से बात करने पर पता चला कि उन्होंने सन 2000 के आसपास वह जमीन खरीदी थी। उस वक्त वह शकुन्तला का घर हुआ करता था। लेकिन 2010 में उन्हें लगा कि घर को अब मंदिर में बदल देना चाहिए और उन्होंने ऐसा ही किया। शकुन्तला का कहना है कि उन्होंने अपनी निजी जमीन पर यह मंदिर बनाने का काम आसपास रहने वाले बाल्मीकि समाज के लोगों के कहने पर किया था। शकुन्तला के मुताबिक, वहां आसपास कई मस्जिद थीं लेकिन कोई मंदिर नहीं था। शकुन्तला ने अपनी ही जमीन, जिसका क्षेत्रफल 25 गज के करीब है, पर मंदिर बना दिया। यह सब बताते हुए शकुन्तला कहती हैं, ‘चार-पांच मस्जिदों के बीच भी एक मंदिर नहीं बन सकता क्या?’ शकुन्तला ने यह भी बताया था कि उनसे पहले भी एक शख्स ने पास ही में मंदिर बनाने की कोशिश की थी लेकिन उसको मंदिर बनाने नहीं दिया गया था।

इसलिए बेचना चाहती हैं जगह: शकुन्तला का कहना है कि जब वह वहां रहने आई थीं तो सब ठीक था लेकिन मुस्लिम समाज के लोगों और उनके पड़ोसी महबूब की आंखों में वह तब से खटकने लगीं जब से उन्होंने मंदिर बनाने का काम किया। शकुन्तला ने बताया कि मंदिर का निर्माण शुरू होने पर उन्हें तंग करना शुरू किया गया था जो कि अबतक जारी है। शकुन्तला के मुताबिक, उनको वहां के दुकानवालों ने, जो कि अधिकतर मुसलमान थे, खाने-पीने का सामान देने से मना कर दिया था और जो देते भी थे वे मंहगा देते थे। इतना ही नहीं शकुन्तला के मुताबिक, उनको मुसलमानों के बच्चे तक धक्का देकर भाग जाते थे, या फिर उनका रास्ता रोककर खड़े हो जाते थे। शकुन्तला ने कहा कि एक बार तो उन्हें कई दिन तक घर (मंदिर) से निकलने ही नहीं दिया गया था। शकुन्तला ने कहा कि वे लोग मंदिर के आगे मांस के टुकड़े फेंक जाते थे और कई बार तो मुसलमान मंदिर के आगे पेशाब तक करके भाग गए। शकुन्तला के मुताबिक, एक बार तो उनके पड़ोसी महबूब ने उनका गला तक दबा दिया था और उनको गंदी-गंदी गालियां भी दी थीं।

आग की तरह फैली बात: दिल्ली और आसपास के इलाकों में यह बात आग की तरह फैल गई है। शनिवार (18 मार्च) को मंदिर में चालीसा का भी आयोजन किया गया था। जिसमें बाहर के काफी लोगों ने आकर हिस्सा लिया। उन्होंने वहां ‘जय श्री राम, मोदी-मोदी, योगी-योगी’ जैसे नारे भी लगाए। सब लोगों ने मिलकर मंदिर के नाम से पैसा भी एकत्रित किया था। लोगों की भीड़ को वहां लेकर पहुंचने वालों में हिंदू युवा वाहिनी संगठन भी शामिल था। उसके दिल्ली प्रदेश मंत्री राजीव शर्मा ने कहा, ‘हम लोगों को पूरा मामला नहीं पता लेकिन हम सब यहां हिंदुत्व के लिए एकत्रित हुए हैं।’ अब लोगों ने मंदिर के बाहर से उसे बेचने वाली लाइन को भी मिटा दिया है। साथ ही मंदिर की रक्षा के लिए खराब पड़े सीसीटीवी को सही करवाने की बात भी कही जा रही है।

दूसरे पक्ष का क्या कहना है: कहानी में नया मोड़ एक मुस्लिम शख्स लाता है। वह शकुंतला का भी काफी करीबी है। उसने हमें अकेले में बताया कि असल में मामला राजनीति से प्रेरित है और साध्वी खबरों में आने के लिए सब कर रही हैं। साध्वी के पास बैठे लोगों के मुंह से भी सुनने को मिला था कि साध्वी का मन चुनाव लड़ने का है। बता दें कि दिल्ली में नगर निगम के चुनाव होने हैं। उस शख्स के मुताबिक शकुंतला पहले भी मंदिर की दीवार पर लिखती रही हैं। शख्स ने एक फोटो भी दिखाई जो कि उसी दीवार की थी जिसपर मंदिर को बेचने की बात लिखी थी। लेकिन फोटो पहले की थी जब साध्वी ने कथित रूप से पड़ोसी महबूब और मुसलमानों के लिए अपशब्द लिखे थे।

हमें उस शख्स ने ही महबूब से भी मिलवाया। महबूब ने बताया कि यह सब गलत हो रहा है। महबूब ने बताया कि बच्चों के कूड़ा फेंकने को लेकर कहा-सुनी होती रहती थी।

आसपास के कुछ और मुसलमानों और हिंदुओं के मुताबिक, वहां पहले कभी इतना माहौल नहीं बिगड़ा। लोगों के मुताबिक उस इलाके को तो पुलिस की तरफ से शांति प्रिय तरीके से रहने के लिए मेडल भी मिल चुका है। वहां रहने वाले मुसलमानों के मुताबिक, वे तो खुद कावंड़ यात्रा के वक्त टेंट लगाकर हिंदुओं की सेवा करते हैं। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि साध्वी ही लोगों से लड़ती रहती थीं और मंदिर के आगे बाइक-गाड़ी खड़ी होने जैसी छोटी-छोटी बातों पर किसी को कुछ भी बोल देती थीं। लेकिन बूढ़ी महिला समझकर कभी किसी ने पलटकर जवाब नहीं दिया।

महबूब अपने खिलाफ लिखी बातों का जिक्र करते हुए बताते हैं कि उन्होंने उसकी शिकायत पुलिस में की थी लेकिन पुलिस ने आकर कहा कि महिला बुजुर्ग है और उसकी बातों को दिल से ना लगाया जाए। वहीं इस मामले पर जब पुलिस से बात की गई तो उन्होंने भी कहा कि ऐसा कुछ नहीं है और साध्वी पहले भी ऐसा लिख चुकी है। महबूब ने यह भी कहा कि साध्वी ने नाले की जमीन को कब्जा करके बाद में मंदिर बनाया। हालांकि, साध्वी ने भी कहा था कि वह पुलिस को बुलाती है तो कोई उसकी सुनता ही नहीं है।

आसपास के लोगों का कहना है कि पहले उनकी तरफ से मामला दबा लिया जाता था लेकिन इस बार मामला सोशल मीडिया पर ज्यादा ही उछाल दिया गया।

पुलिस वाले का किस्सा: साध्वी के घर (मंदिर) पर एक पुलिसवाले का भी बोर्ड लगा था। पूछने पर पता लगा कि वह साध्वी का रिश्तेदार था जो कि पहले वहां रहता था लेकिन फालिश पड़ने के बाद अपने घर चला गया। उससे जब फोन पर बात की गई तो उसने कहा कि साध्वी ने कभी भी अपनी परेशानी का जिक्र उससे नहीं किया।

साध्वी ने अपने मंदिर (घर) में एक छोटी गाय भी पाल रखी है। जब पूछा गया कि वह उसका और अपना पेट कैसे पालती हैं तो साध्वी ने बताया कि वह पास के खेतों में जाकर बझिया के लिए घास काटकर लाती हैं और उनका खर्चा आने वाली वृद्धा पेंशन और जमा राशि पर मिलने वाले ब्याज से चलता है। साध्वी ने बताया कि उनके पास लगभग 3 लाख रुपए जमा हैं।

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