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साहित्‍य अकादमी ने की इमरजेंसी मीटिंग, ‘बढ़ती कट्टरता’ पर बाद में जारी होगा बयान

लेखक कुलबर्गी की हत्‍या की निंदा तो की, पर बढ़ती कट्टरता की निंदा की लेखकों की मांग अभी नहीं मानी

Author नई दिल्ली | October 23, 2015 5:40 PM
(फोटो-एजेंसी)

साहित्‍य अकादमी ने शुक्रवार को लेखक एम.एम. कलबुर्गी की हत्‍या की निंदा की। अकादमी ने सर्वसम्‍मति से प्रस्‍ताव पारित कर केंद्र और राज्‍य सरकारों से ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाने की अपील की।

‘बढ़ती कट्टरता’ के विरोध में जिन लेखकों ने साहित्‍य अकादमी पुरस्‍कार लौटा दिया है, अकादमी ने उनसे पुरस्‍कार वापस लेने की अपील भी की।

लेखकों के विरोध के मद्देनजर अकादमी ने शुक्रवार को इमरजेंसी मीटिंग की। इसमें अकादमी से इस्‍तीफा देने वाले सदस्‍यों से पद पर लौटने की अपील भी की गई।

दो घंटे चली बैठक के बाद इग्‍जेक्‍युटिव कमेटी बोर्ड के सदस्‍य कृष्‍णास्‍वामी नचिमुथु ने कहा, ‘अकादमी लेखक कुलबर्गी की हत्‍या की कड़ी निंदा करता है और भविष्‍य में ऐसी घटना न हो, इसके उपाय करने की केंद्र व राज्‍य सरकारों से अपील करता है।’ बैठक में इग्‍जेक्‍युटिव काउंसिल के 24 में से 20 सदस्‍य शामिल हुए।

लेखकों की इस मांग कि बढ़ती कट्टरता पर साहित्‍य अकादमी की ओर से निंदा की जाए, के बारे में पूछे जाने पर कृष्‍णास्‍वामी ने बताया कि इस मसले पर बैठक में चर्चा हुई। साहित्‍य अकादमी इस बारे में जल्‍द ही विस्‍तृत बयान जारी करेगा।

अब 17 दिसंबर को अकादमी के बोर्ड की मीटिंग होगी। लेखकों द्वारा पुरस्‍कार लौटाए जाने से पैदा हुई स्थिति पर उस दिन चर्चा की जाएगी। अब तक करीब तीन दर्जन साहित्‍यकार अकादमी पुरस्‍कार लौटा चुके हैं। इनमें नयनतारा सहगल, अशोक वाजेपयी, उदय प्रकाश, के.एन. दारूवाला, के. वीरभद्रप्‍पा, मुनव्‍वर राणा आदि शामिल हैं।

उधर, जिन पांच लेखकों ने साहित्‍य अकादमी के अपने पदों से इस्‍तीफा दिया है, उन्‍होंने शुक्रवार को अलग से बैठक की। उन्‍होंने साहित्‍य अकादमी की मीटिंग से पहले पैदल मार्च भी किया।

इनके विरोधी गुट ने भी मार्च निकाला और कहा कि साहित्‍यकार निजी स्‍वार्थ के चलते पुरस्‍कार लौटा रहे हैं और साहित्‍य अकादमी को उनके दबाव में नहीं आना चाहिए।

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