Art Of Living के कार्यक्रम को लेकर NGT ने केंद्र और DDA को लगाई फटकार

पूर्वी दिल्ली के यमुना तट पर श्री श्री रविशंकर के आर्ट आॅफ लिविंग द्वारा आयोजित विश्व सांस्कृतिक उत्सव का भविष्य बुधवार को तय होगा।

Author नई दिल्ली | Published on: March 9, 2016 5:00 AM
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पूर्वी दिल्ली के यमुना तट पर श्री श्री रविशंकर के आर्ट आॅफ लिविंग द्वारा आयोजित विश्व सांस्कृतिक उत्सव का भविष्य बुधवार को तय होगा। मंगलवार को मामले पर सुनवाई करते हुए एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने इस कार्यक्रम पर रोक की मांग वाली याचिका पर कोई भी अंतरिम आदेश नहीं दिया। सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने सभी पक्षों को फटकार लगाते हुए सवाल किया कि उत्सव की अनुमति देने के पहले क्या पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का मूल्यांकन किया गया था। सेना द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए पंटून पुल का निर्माण भी जांच के दायरे में है।

आर्ट आॅफ लिविंग की पैंतीसवीं वर्षगांठ पर 11 मार्च से आयोजित तीन दिवसीय भव्य समारोह का भविष्य अधर में लटका हुआ है। मंगलवार चली सुनवाई में एनजीटी ने सभी पक्षों को फटकार लगाई। ट्रिब्यूनल ने कहा कि किसी भी आॅथोरिटी ने यह जानने की जहमत नहीं उठाई कि इतना बड़ा आयोजन हो रहा है तो उससे पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचेगा। यह कार्यक्रम दो या चार घंटों के लिए नहीं बल्कि तीन दिनों तक चलना है।

एनजीटी ने केंद्र से सवाल किया कि यमुना के जल ग्रहण क्षेत्र में अस्थाई ढांचे के निर्माण के लिए पर्यावरण मंजूरी की जरूरत क्यों नहीं है। साथ ही दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमिटी को ट्रिब्यूनल के समक्ष यह जानकारी देनी है कि इस आयोजन के लिए उनसे मंजूरी की जरूरत क्यों नहीं है।

वहीं कार्यक्रम की अनुमति देने वाली आॅथोरिटी, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) से भी एनजीटी ने पूछा कि क्या अनुमति देने के बाद मौके पर जाकर किसी अधिकारी ने देखा कि निर्माण कार्य कैसे चल रहा है। एनजीटी ने कहा कि जिस तरह का पुल और रैम्प बनाया जा रहा है उसके लिए ठोस निर्माण की जरूरत है, लेकिन क्या इसके निरीक्षण की जहमत उठाई गई।

डीडीए से पूछा गया कि आयोजन में नियमों में अनदेखी तो नहीं हुई? क्या डीडीए ने अनुमति देने के बाद देखा कि नदी में कोई मलबा तो नहीं डाला गया?

एनजीटी के तीखे सवालों के जवाब में डीडीए ने कहा कि कार्यक्रम की मंजूरी नियमों के मुताबिक दी गई थी। मनोरंजन गतिविधि हेतु सीमित क्षेत्र के लिए अनुमति दी थी लेकिन आयोजकों ने क्षेत्र बढ़ा लिया। डीडीए ने दलील दी कि जितनी जगह में कार्यक्रम की अनुमति दी गई थी वहां कोई मलबा नहीं था और नदी तट कोई नुकसान नहीं हुआ है।

वहीं आॅर्ट आॅफ लिविंग से एनजीटी ने पूछा कि इतने बड़े आयोजन की तैयारियों का विवरण डीडीए को क्यों नहीं सौंपा गया। ट्रिब्यूनल ने टिपण्णी की कि स्टेज, सड़क, पार्किंग क्षेत्र और ब्रिज बनाए जाएंगे इसकी जानकारी डीडीए को क्यों नहीं दी गई। आर्ट आॅफ लिविंग की
दलील थी कि उसने सभी शर्तों का पालन किया और कार्यक्रम के लिए तमाम जरूरी मंजूरी ली। आर्ट आॅफ लिविंग अपना पक्ष बुधवार को भी रखेगा।

उधर मंगलवार शाम आर्ट आॅफ लिविंग ने अपनी तय प्रेस कॉन्फरेंस रद्द कर दी। एनजीटी ने उत्तर प्रदेश और दिल्ली सरकार से भी सवाल किए। जवाब में दिल्ली सरकार ने ट्रिब्यूनल को बताया कि कार्यक्रम के लिए दिल्ली पुलिस और अग्निशमन विभाग की मंजूरी अभी भी लंबित है।
कार्यक्रम को लेकर याचिकाकर्ता की शिकायत है कि इसके लिए मयूर विहार फेस-1 के पास यमुना तट पर 1000 एकड़ जमीन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे यमुना और आस-पास के जैवपारिस्थिकी तंत्र को नुकसान पहुंचेगा। शिकायतकर्ता यमुना जिए अभियान ने कार्यक्रम पर रोक लगाने की मांग की है। एनजीटी ने इस शिकायत के आधार पर आॅर्ट आॅफ लिविंग पर 120 करोड़ रूपए का जुर्माना लगाया था। 11 मार्च से 13 मार्च तक होने वाले इस कार्यक्रम में 35 लाख लोगों का शामिल होना अपेक्षित है।

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