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दिव्यांग पिता ने बेटा खोया और आठ महीने की बच्ची ने पिता

निर्भय कुमार पांडेय

मोतीनगर की डीएलएफ सोसायटी में रविवार को सीवर की सफाई के दौरान चार मजदूरों की दम घुटने से मौत हो गई थी, जबकि एक मजदूर की मौत राम मनोहर लोहिया अस्पताल में इलाज के दौरान हुई। इस घटना के बाद मजदूरों के परिजनों ने आरोप लगाया है कि इनमें से ज्यादातर लोग निर्माणाधीन डीएलएफ सोसायटी में सफाई कर्मचारी का काम नहीं करते थे। कोई पंप ऑपरेटर का काम करता था तो कोई हाउसकीपिंग कर्मचारी या फिटर था। मरने वालों में सरफराज, पंकज, राजा, उमेश और विशाल शामिल हैं। वहीं जिला पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि इस मामले में जेएलएल के इंजीनियर 32 साल के अजय चौधरी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

इस घटना में एक दिव्यांग पिता मोहम्मद हैजूल ने अपने जवान बेटे सरफराज को खो दिया है। वहीं, हाउसकीपिंग का काम करने वाले उमेश कुमार की बेटी आठ महीने की है। इनके अलावा राजा अपने परिवार का इकलौता बेटा था और उसके कंधे पर एक छोटी बहन और माता-पिता की जिम्मेदारी थी। पुलिस का कहना है कि ठेकेदार और संबंधित कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। सरफराज के पिता मोहम्मद हैजूल ने बताया कि वे अपने परिवार के साथ कठपुतली कॉलोनी में रहते थे, लेकिन फिलहाल आनंद पर्वत में बने ट्रांजिट कैंप में रह रहे हैं। सरफराज के पिता दिव्यांग हैं। आठ-नौ महीने पहले ही सरफराज यहां काम पर लगा था। इसी कैंप में रहने वाले मोहम्मद शाकिर के बेटे ने उसे काम पर लगवाया था। हैयूल ने बताया कि रविवार को दोपहर दो बजे से उसकी ड्यूटी थी लेकिन तीन बजे फोन आया कि उनका बेटा हादसे का शिकार हो गए हैं। वे जब आचार्य भिक्षु अस्पताल पहुंचे तो पता चला कि उनके बेटे की मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि उनका बेटा सफाई का काम करता था, लेकिन ठेकेदार ने उसे जबरन सफाई के लिए सीवर में उतार दिया।

आठ महीने की है उमेश की बेटी

इसी घटना में जान गंवाने वाले एक अन्य युवक उमेश कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के रहने वाले थे। उनके परिवार में माता-पिता, पत्नी रूपा और आठ महीने की बेटी अंशिका है। उनके भाई संतोष कुमार ने बताया कि चार साल पहले उनकी शादी हुई थी। उसके बाद वह दिल्ली कमाने के लिए आ गए थे। वह डीएलएफ सोसायटी में क्रेस्टा कंपनी के माध्यम से हाउसकीपिंग का काम करते थे। रविवार को वह ड्यूटी पर आए तो उन्हें भी जबरन सीवर की सफाई के काम में लगा दिया गया। जहरीली गैस की चपेट में आने के बाद जब उनकी हालत बिगड़ने लगी तो उन्हें पहले आचार्य भिक्षु अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में आरएमएल अस्पताल रेफर कर दिया गया, लेकिन इलाज के दौरान रविवार रात को उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद उनके परिवार में गम का माहौल बना हुआ है। परिजन सोमवार को दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में उमेश का शव लेने पहुंचे थे।

पंप चलाने का काम करते थे पंकज

ठेकेदार की लापरवाही की वजह से जान गंवाने वाले पंकज मूल रूप से जौनपुर, उत्तर प्रदेश के निवासी थे। वह पिछले एक साल से यहां पंप चलाने का काम कर रहे थे। इससे पहले वह गुजरात में काम करते थे। उनके भाई दीपक ने बताया कि पंकज के दोस्तों ने घटना की जानकारी तीन बजे ही उन्हें दी थी। वे गुरुग्राम से सीधे डीएलएफ सोसायटी पहुंचे, जहां पता चला कि पंकज को अस्पताल ले जाया गया है। उन्होंने बताया कि वह उन्नति इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में काम करते थे। उनके परिवार में माता-पिता, पत्नी, एक बेटा और एक बेटी है। सभी लोग गांव में रहते हैं।

कमाने के लिए दिल्ली आया था राजा

सफाई के दौरान जान गंवाने वाला राजा उर्फ मृत्युजंय मूल रूप से बिहार के मधुबनी का रहने वाले थे। 23 साल का राजा अपने परिवार का इकलौता बेटा होने के साथ अकेला कमाने वाला भी था। उसकी दो बड़ी बहनें हैं, जिनकी शादी हो चुकी है जबकि एक बहन छोटी है। राजा के जीजा कुंदन ने बताया कि आठ-नौ महीने पहले ही राजा कमाने के लिए दिल्ली आया था। वह अपनी छोटी बहन की शादी धूमधाम से करना चाहता था। इस सोसायटी में वह फिटर का काम करता था, लेकिन उसे भी ठेकेदार ने जबरन सीवर की सफाई के लिए उतार दिया। कुंदन ने बताया कि इस घटना के बाद राजा के परिवार के सामने जीवनयापन की समस्या खड़ी हो गई है। घटना में जान गंवाने वाला पांचवा युवक विशाल अपने परिवार के साथ उत्तम नगर में रहता था। वह भी इस सोसायटी में सफाई कर्मचारी नहीं था।

अब बेटे को नहीं भेजूंगा काम पर

डीएलएफ सोसायटी में काम करने वाले एक मजदूर के पिता मोहम्मद शाकिर ने कहा कि अब वे अपने बेटे को सोसायटी में काम करने के लिए नहीं भेजेंगे। उन्होंने कहा कि क्या पता ठेकेदार इस बार उनके बेटे पर दबाव डालकर या पैसे का लालच देकर सीवर की सफाई करवाए। मोहम्मद हैजूल की तरह मोहम्मद शाकिर भी दिव्यांग हैं और बेटे के भरोसे ही उनका घर चल रहा है।

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