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दिल्ली कांग्रेसः नए मुखिया के नाम पर आम सहमति बनाने की कवायद

दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन के इस्तीफा देने पर अड़े होने के कारण पार्टी ने नए अध्यक्ष के नाम पर आम सहमति बनाने की कवायद शुरू कर दी है।

Author नई दिल्ली, 27 अक्तूबर। | Published on: October 28, 2018 4:11 AM
नए अध्यक्ष के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है, लेकिन उनकी उम्र, स्वास्थ्य और उनके पक्ष व विपक्ष में नेताओं की लामबंदी के मद्देनजर पार्टी इस मुद्दे पर जल्दबाजी में फैसला करने से बचना चाहती है।

अजय पांडेय

दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन के इस्तीफा देने पर अड़े होने के कारण पार्टी ने नए अध्यक्ष के नाम पर आम सहमति बनाने की कवायद शुरू कर दी है। कुछ ही महीनों बाद होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी इस मुद्दे पर जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करना चाहती। पार्टी के तमाम नेताओं से सलाह-मशविरे के बाद ही नए अध्यक्ष के नाम का एलान किया जाएगा। नए अध्यक्ष के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है, लेकिन उनकी उम्र, स्वास्थ्य और उनके पक्ष व विपक्ष में नेताओं की लामबंदी के मद्देनजर पार्टी इस मुद्दे पर जल्दबाजी में फैसला करने से बचना चाहती है। माकन के हटने की सूरत में शीला दीक्षित को प्रदेश अध्यक्ष या चुनाव अभियान समिति में से किसी एक पद पर बिठाया जाना तय है क्योंकि माकन के बाद दिल्ली में पार्टी का सबसे अहम चेहरा उन्हीं का बताया जा रहा है।

बीमारी के कारण अजय माकन की ओर से बार-बार पद छोड़ने की पेशकश के मुद्दे पर दिल्ली के प्रभारी महासचिव पीसी चाको ने शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। करीब पौने घंटे चली इस मुलाकात के बारे में चाको ने बताया कि उन्होंने माकन की बीमारी और पद छोड़ने की पेशकश की जानकारी कांग्रेस अध्यक्ष को दे दी है। राहुल गांधी ने उनसे कहा है कि दिल्ली में नए अध्यक्ष को लेकर फैसला सही समय पर किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष ने उनसे कहा है कि वे नए अध्यक्ष के मुद्दे पर पार्टी नेताओं से विचार-विमर्श करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि फिलहाल माकन अपने पद पर बने रहेंगे। इस बीच पार्टी सूत्रों ने बताया कि दिल्ली में भी केरल व बिहार आदि राज्यों की तर्ज पर चार कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाएंगे। इनकी नियुक्ति के समय जातिगत समीकरण को भी ध्यान में रखा जाएगा। कार्यकारी अध्यक्ष ब्राह्मण समाज से आने वाले किसी नेता को बनाया जा सकता है जबकि दलित व अल्पसंख्यक समाज के नेताओं सहित अन्य पिछड़े वर्ग से ताल्लुक रखने वाले नेताओं को कार्यकारी अध्यक्ष की एक-एक कुर्सी दी जाएगी।

कांग्रेस अध्यक्ष से मुलाकात के तुरंत बाद चाको ने सूबे के कई पार्टी नेताओं से मुलाकात की और उनकी राय जानी। दिलचस्प यह है कि कुछ दिन पहले शीला दीक्षित समर्थक नेताओं के एक गुट ने चाको से दीक्षित को दिल्ली की बागडोर सौंपने का आग्रह किया था, वहीं दूसरी ओर शीला की मुखालफत करने वाले नेताओं के एक गुट ने भी उनसे मिलकर दीक्षित को यह जिम्मेदारी नहीं सौंपने की मांग की थी। सूत्रों की मानें तो पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भाजपा व आम आदमी पार्टी के संपर्क में हैं, अगर अध्यक्ष की नियुक्ति पर सहमति नहीं बनी तो ये नेता पाला बदलकर चुनाव से पहले पार्टी को झटका दे सकते हैं। समझा जा रहा है कि चाको ने कांग्रेस अध्यक्ष से मुलाकात के दौरान उन्हें इन तमाम स्थितियों की जानकारी दी है और उन नेताओं के नाम भी गिनाए हैं जिनको आगे जिम्मेदारी दी जा सकती है। बहरहाल, समझा जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान इस मामले में ठोक-बजाकर फैसला करना चाहता है क्योंकि कांग्रेस के मीडिया विभाग के मुखिया की कुर्सी छोड़कर तीन साल पहले दिल्ली आए माकन के लिए पार्टी को नई जिम्मेदारी भी तय करनी है।

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