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धपली और शंखनाद के बीच जेएनयू में हुआ 58.69 फीसद मतदान

मतदान केंद्रों के बाहर धपली, ढोल और शंख की आवाज के बीच 58.69 फीसद मतदान हुआ।

Author September 9, 2017 5:00 AM
जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी(जेएनयू) छात्रसंघ चुनावों में आइसा-एसएफआई गठबंधन में चुनाव में हिस्सा ले रही हैं। (Express Photo)

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्र संघ पदाधिकारियों को चुनने के लिए शुक्रवार को चार स्कूलों में बने मतदान केंद्रों पर मतदान हुआ। सुबह कम संख्या में छात्र मतदान केंद्रों तक पहुंचे, लेकिन दोपहर बाद मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें नजर आर्इं। मतदान केंद्रों के बाहर ढपली, ढोल और शंख की आवाज के बीच 58.69 फीसद मतदान हुआ। पिछले साल 59.6 छात्रों ने अपने मतधिकार का इस्तेमाल किया था। इस बार कुल मतदाताओं की संख्या 8,045 थी। मतों की गणना का काम शुक्रवार रात 9:30 बजे से ही शुरू हो गया। रविवार देर रात तक परिणाम आने की संभावना जताई जी रही है।

जेएनयू परिसर में स्थित सामाजिक विज्ञान संस्थान (एसएसएस), पर्यावरण विज्ञान संस्थान (एसईएस), अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संस्थान (एसआइएस) और भाषा, साहित्य व संस्कृति अध्ययन संस्थान (एसएलएल एंड सीएस) में मतदान केंद्र बनाए गए थे। इन मतदान केंद्रों पर दो चरणों में सुबह 9:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक और दोपहर 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक मतदान हुआ। पहले चरण में मतदान केंद्रों पर छात्र संगठनों से जुड़े छात्र अधिक और आम छात्र मतदाता बहुत कम दिखाई दिए। हालांकि, मतदान के दूसरे चरण में मतदान केंद्रों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिलीं और मतदान में तेजी आई। पिछले साल के मुकाबले मतदान फीसद में इस बार सिर्फ एक फीसद की कमी दर्ज की गई है।

त्रिकोणीय मुकाबला
इस बार जेएनयू छात्र संघ का चुनाव बहुत दिलचस्प रहा है, जिसके कई कारण हैं। पहला यह कि इस बार परिसर में वाम एकता पूरी तरह से नजर नहीं हो पाई। अंतिम समय में एआइएसएफ का अलग से चुनाव लड़ना वाम मोर्चे के लिए सही संकेत नहीं है। दूसरा, बापसा की परिसर में मजबूत उपस्थिति से वाम मोर्चे में खलबली मची हुई है। तीसरा, निर्दलीय उम्मीदवार मोहम्मद फारुक आलम का अध्यक्षीय परिचर्चा में शानदार प्रदर्शन। इन सभी समीकरणों पर गौर करें तो इस बार परिसर में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है, जिसमें वाम मोर्चा, बापसा और एबीवीपी शामिल हैं।

मतदाताओं को लुभाया
जेएनयू छात्र संघ चुनाव अन्य विश्वविद्यालयों के छात्र संघ चुनावों से बिल्कुल अलग होता है। यहां छात्र संगठनों के समर्थक अपने उम्मीदवार का प्रचार मतदान केंद्रों के बाहर टोली बनाकर करते हैं। ये ढपली, ढोल, ढोलक और शंख तो बजाते ही हैं साथ ही अपने संगठन के उम्मीदवारों के नाम लेकर लगातार नारे लगाते हैं ताकि मतदाताओं को लुभाया जा सके। इसके अलावा मतदाताओं को उम्मीदवारों के नाम की पर्ची भी थमा देते हैं। छात्र संघ के अध्यक्ष पद के लिए इस बार सात उम्मीदवार मैदान में हैं। फिलहाल यह पद एसएफआइ के गठबंधन से आइसा के पास है।

सभी ने किए जीत के दावे
सभी छात्र संगठनों ने मतदान के दिन अपनी जीत के दावे किए। बापसा की अध्यक्ष पद की उम्मीदवार शबाना अली ने कहा कि हम पूरा पैनल जीत रहे हैं। इसी तरह एबीवीपी की अध्यक्ष पद की उम्मीदवार निधि त्रिपाठी ने भी पूरे पैनल पर जीत का दावा किया और कहा कि निवर्तमान छात्र संघ विद्यार्थियों के मुद्दों को उठाने में नाकाम रहा। वाम मोर्चे की अध्यक्ष पद की उम्मीदवार गीता ने कहा कि हमें छात्रों का अच्छा समर्थन मिल रहा है और छात्र संघ पर हमारा ही कब्जा रहेगा। एनएसयूआइ के छात्र नेताओं ने माना कि परिसर में वे कमजोर हैं लेकिन लड़ाई पूरी मेहनत से की जा रही है। निर्दलीय उम्मीदवार मोहम्मद फारुक आलम ने कहा कि जीत और हार से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन मैं यहां के आम छात्रों को यह बताने में सफल रहा हूं कि छात्र संगठन आम छात्रों के लिए कुछ नहीं करते हैं।

शिक्षक भी करते दिखे प्रचार
एबीवीपी से जुड़े कुछ शिक्षक भी छात्र संघ चुनाव के दौरान छात्रों के बीच प्रचार करते दिखे। इसके अलावा एबीवीपी और भाजपा से जुड़े कई बड़े पदाधिकारी भी मतदान के दौरान परिसर में नजर आए।

सिर्फ चुनाव के लिए वाम एकता नहीं चाहिए : कन्हैया
एआइएसएफ की ओर से अध्यक्ष पद की उम्मीदवार अपराजिता राजा के लिए प्रचार करने पहुंचे छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने कहा कि दो साल के दौरान परिसर में हुए विभिन्न घटनाक्रमों की वजह से इस साल कम संख्या में छात्र मतदान के लिए पहुंचे। उन्होंने कहा कि दक्षिणपंथ और सीट कटौती के खिलाफ लड़ने के बावजूद जेएनयू छात्र संघ इच्छानुसार नतीजे देने में नाकाम रहा है। उन्होंने वाम मोर्चे के साथ नहीं आने के बारे में कहा कि सिर्फ चुनाव में वाम एकता बनाने से भाजपा और आरएसएस को नहीं रोका जा सकता है। वाम एकता संघर्ष के समय दिखाई देनी चाहिए जो पिछले दो साल में नहीं दिखाई दी है।

 

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