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उपहार सिनेमा अग्निकांड: रियल एस्टेट कारोबारी गोपाल अंसल को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल नहीं मिली राहत

उपहार सिनेमाघर में 13 जून 1997 को बार्डर फिल्म के प्रदर्शन के दौरान हुये अग्निकांड में 59 लोगों की मृत्यु हो गयी थी।

Author नई दिल्ली | February 28, 2017 9:17 PM
एक निचली अदालत ने वर्ष 2007 में उपहार के मालिकों – असंल बंधुओं को दो साल के सश्रम कारावास की सजा सुनायी थी।

उपहार सिनेमा अग्निकांड मामले में जेल जाने से बचने के प्रयास में रियल एस्टेट कारोबारी गोपाल अंसल को मंगलवार (28 फरवरी) को उच्चतम न्यायालय से कोई राहत नहीं मिल सकी क्योंकि शीर्ष अदालत ने उनकी अर्जी पर सुनवाई तीन मार्च के लिये निर्धारित कर दी। गोपाल अंसल चाहते हैं कि उनके बड़े भाई सुशील अंसल की तरह ही उन्हें भी सजा की शेष अवधि के लिये जेल नहीं भेजा जाये। शीर्ष अदालत ने नौ फरवरी को बहुमत के निर्णय में 78 वर्षीय सुशील अंसल की वृद्धावस्था से जुडी परेशानियों को ध्यान में रखते हुये उन्हें जेल में बिताई गयी अवधि की ही सजा सुनायी थी जबकि न्यायालय ने छोटे भाई गोपाल को चार सप्ताह के भीतर समर्पण करके एक साल की शेष सजा भुगतने का आदेश दिया था। उपहार सिनेमाघर में 13 जून 1997 को बार्डर फिल्म के प्रदर्शन के दौरान हुये अग्निकांड में 59 लोगों की मृत्यु हो गयी थी।

वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी ने प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष नयी अर्जी का उल्लेख करते हुये इस पर शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया। साथ ही उन्होंने गोपाल को जेल में समर्पण के लिये एक सप्ताह और देने की अंतरिम राहत भी मांगीं। इस पर पीठ ने कहा, ‘आपको (जेठमलानी) इंतजार करना होगा। इसकी सुनवाई उसी पीठ को करनी होगी, यदि वह अभी भी है, जिसने पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई की थी। हम इसे शुक्रवार के लिये रख सकते हैं यदि कोई आपत्ति नहीं हो।’ जेठमलानी ने जब कहा कि वह किसी भी पीठ के समक्ष बहस के लिये तैयार हैं तो न्यायालय ने कहा, ‘पीठ के आबंटन की एक व्यवस्था है। हम अपनी तरफ से बेहतर करने का प्रयास करेंगे।’

जेठमलानी ने कहा कि गोपाल के लिये भी जेल में बिताई गयी अवधि पर्याप्त सजा होनी चाहिए। यही नहीं, यह दोषी भी अपने बड़े भाई की तरह ही बढ़ती उम्र से जुड़ी बीमारियों से ग्रस्त है। इसलिए उसे जेल नहीं भेजा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोषी जुर्माने के रूप में तीस करोड रूपए का भुगतान कर चुका है। एसोसिएशन फॉर विक्टिम्स ऑफ उपहार ट्रेजडी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के टी एस तुलसी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि सीबीआई और एसोसिएशन की पुनर्विचार याचिकाओं पर फैसला किया जा चुका है और ‘अब पुनर्विचार के बाद आये फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया जा सकता है।’

सीबीआई की ओर से वकील अपराजिता सिंह ने कहा कि दोषी के पास राहत के लिये अब सुधारात्मक याचिका दायर करने का ही विकल्प उपलब्ध है और उसे ऐसा ही करना चाहिए। उनका कहना था कि निर्णित पुनर्विचार याचिका में कोई अर्जी दायर नहीं की जा सकती। न्यायालय ने जब इस मामले की सुनवाई तीन मार्च के लिये निर्धारित की तो सिंह ने कहा कि इस मामले में सीबीआई का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे शुक्रवार को उपलब्ध नहीं है। इस पर पीठ ने कहा कि संबंधित पीठ उस दिन ज्यादा से ज्यादा नोटिस ही जारी करेगी।

उपहार अग्निकांड: सुप्रीम कोर्ट ने गोपाल अंसल को 1 साल जेल की सजा सुनाई

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