Union Minister Prakash Javadekar was spotted using a landline-receiver on smartphone, in Parliament - हाथ में मोबाइल और कान में रिसीवर लेकर चलते दिखे मंत्री प्रकाश जावड़ेकर - Jansatta
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हाथ में मोबाइल और कान में रिसीवर लेकर चलते दिखे मंत्री प्रकाश जावड़ेकर

यह रिसीवर फोन से वैसे ही कनेक्ट हो जाता है जैसे कि ईयरफोन को मोबाइल से कनेक्ट करते हैं।

यह उसी 3.5mm के जैक के माध्यम से कनेक्ट होता है जिसमें हम म्यूजिक सुनने के लिए ईयरफोन लगाते हैं।

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडे़कर पार्लियामेंट के बाहर हाथ में मोबाइल और कान पर लैंडलाइन फोन के जैसा रिसीवर लिए नजर आए। शायद वह ऐसा मोबाइल से निकलने वाले रेडिएशन से बचने के लिए कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री के हाथ में बैंगनी रंग का लैंडलाइन जैसा रिसीवर लगा है। इससे वह बिलकुल वैसे ही बात कर रहे हैं जैसे कि लैंडलाइन फोन पर बात करते हैं। हालांकि वह ऐसा क्यों कर रहे हैं इसका खुद उन्होंने खुलासा नहीं किया। दरअसल यह रिसीवर स्मार्टफोन से वैसे ही कनेक्ट हो जाता है जैसे कि ईयरफोन को मोबाइल से कनेक्ट करते हैं। यह उसी 3.5mm के ऑडियो जैक के माध्यम से कनेक्ट होता है जिसमें हम म्यूजिक सुनने के लिए ईयरफोन लगाते हैं।

आपको बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2011 में एक रिपोर्ट में कहा था कि मोबाइल फोन के इस्तेमाल से कैंसर होने की संभावना रहती है। कुछ अध्ययनों से पता चला है कि मोबाइल फोन के रेडिएशन कई तरह से शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। रेडिएशन सीधे डीएनए पर भी असर करता है। खासकर नवजात शिशु को इससे कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। शोध बताते हैं कि इससे आंख का कैंसर, थायराइड, मेलेनोमा ल्यूकेमिया और स्तन कैंसर जैसी बीमारियां हो सकती हैं।

दरअसल, देश भर में मोबाइल रेडिएशन को लेकर फैली गलतफहमियों को दूर करने के लिए टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने एक पोर्टल भी चला रहा है। तरंग संचार https://tarangsanchar.gov.in/emfportal नाम के इस वेब पोर्टल पर मोबाइल रेडिएशन से जुटी जानकारियां दी गई है। इसके पीछे सरकार का कहना था कि मोबाइल टॉवर्स को लेकर समाज में कई तरह की झूठी बातें फैलाई गई हैं, जिनका कोई साइंटीफिक रीजन भी नहीं है। दरअसल, मोबाइल रेडिएशन को लेकर गलत जानकारी को रोकने के लिए सरकार ने तरंग पोर्टल की शुरुआत की है।

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