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समारोह में डिग्रियां बंटीं, बाहर डिग्रीधारकों का प्रदर्शन

दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास में शनिवार को अनूठा दिन रहा, जब एक ओर डिग्रियां बांटी जा रही थीं, तो दूसरी ओर बेरोजगार डिग्री धारक मूक प्रदर्शन कर रहे थे। इस आंदोलन का बड़ी संख्या में लोगों ने समर्थन किया

Author नई दिल्ली | Published on: November 19, 2017 3:40 AM
राष्ट्रपति दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास में शनिवार को अनूठा दिन रहा, जब एक ओर डिग्रियां बांटी जा रही थीं, तो दूसरी ओर बेरोजगार डिग्री धारक मूक प्रदर्शन कर रहे थे। इस आंदोलन का बड़ी संख्या में लोगों ने समर्थन किया। डीयू में एक ओर शनिवार को आयोजित 94वें दीक्षांत समारोह में महामहिम राष्ट्रपति आए और पीएचडी पूरी कर चुके शोधार्थियों को डिग्रियां दीं। वहीं दूसरी ओर, डीयू के छात्रों, कर्मचारियों और शिक्षकों ने मिलकर रोजगार अधिकार शृंखला बनाकर विश्वविद्यालय में खाली पड़े पदों पर तत्काल स्थायी नियुक्ति के लिए मानव शृंखला बनाकर महामहिम से अपील की।इस रोजगार अधिकार शृंखला में बड़ी संख्या में शामिल छात्रों, कर्मचारियों और शिक्षकों ने अपनी मांग लिखी हुई तख्तियां गले में लटका रखी थीं। इसके साथ ही सबके चेहरे पर एक जैसा नकाब लगा हुआ था। यह नकाब बेरोजगारी से त्रस्त पीड़ा को एक जैसे महसूस करते तीनों समूहों का प्रतीक बताया गया। राष्ट्रपति दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हैं। उनसे अपील का पर्चा भी विश्वविद्यालय में बांटा गया। पर्चे मेंं सभी खाली पदों पर पारदर्शी न्यायप्रिय स्थायी नियुक्ति, आरक्षण की संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करने की मांग लिखी हुई है। डीयू सहित देश के सभी विश्वविद्यालयों में लगभग 40 फीसद पद खाली पड़े हैं। बेरोजगारी से त्रस्त युवा अब डीयू में आंदोलन कर रहे हैं। रोजगार अधिकार शृंखला के आयोजकों ने बताया कि यह आंदोलन और मजबूत होकर आगे बढ़ेगा। बहुत जल्द ही वह स्थायी नियुक्तियों और रोजगार के मसले पर बड़ा प्रदर्शन करने की योजना बनाई जा रही है।

सीखना एक कभी समाप्त न होने वाली प्रक्रिया : कोविंद
दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के 94वें दीक्षांत समारोह में 672 विद्यार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। इसके साथ ही 171 पदक और पुरस्कार भी प्रदान किए गए। शनिवार को विश्वविद्यालय के स्पोर्ट्स स्टेडियम के बहुउद्देशीय सभागार में आयोजित दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद मुख्य अतिथि थे। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सीखना एक कभी समाप्त न होने वाली प्रक्रिया है। दीक्षांत समारोह शिक्षा की यात्रा में एक मील का पत्थर है। जो लोग हाशिए पर हैं और कम भाग्यशाली हैं, छात्र उनकी सहायता करें। जरूरतमंदों की मदद कर किसी भी रूप में समाज को वापस दें। यही छात्रों की डिग्री और शिक्षा की असली परीक्षा होगी। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय को ज्ञान का खजाना बताते हुए कहा कि यह देश का प्रमुख शैक्षणिक संस्थान है।

मिरांडा की छात्रा प्रियंका मोदी को पांच स्वर्ण पदक
मिरांडा हाउस की छात्रा प्रियंका मोदी को समारोह में सबसे अधिक पांच स्वर्ण पदक मिले। यह सम्मान उन्हें एमएससी गणित की परीक्षा में 1600 में से 1463 अंक हासिल करने के कारण मिला। मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज की छात्रा ऐश्वर्या गुलाटी को एमबीबीएस परीक्षा में कुल 1300 में से 930 अंक हासिल करने के लिए तीन स्वर्ण पदक और एक पुरस्कार दिया गया, जबकि श्रीराम कॉलेज आॅफ कॉमर्स की तिशारा गर्ग को दो स्वर्ण पदक और तीन पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। पहली बार शुरू किया गया पंडित दीनदयाल उपाध्याय पदक आइपी कॉलेज की छात्रा कोमल खंडेलवाल को दिया गया। जबकि स्वर्गीय अवध बिहारी रोहतगी पदक एलएलबी के छात्र रहे भास्करन बालाकृष्णन को मिला। दीक्षांत समारोह में मंच पर कुलपति प्रो योगेश कुमार त्यागी, समकुलपति प्रो जेएम खुराना समेत अन्य अधिकारी उपस्थित थे। इसके अलावा विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्य भी समारोह में उपस्थित रहे।

 

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