transport strike in delhi - Jansatta
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ट्रांसपोर्टरों ने केंद्र और दिल्ली सरकार को दी चेतावनी, मांगें नहीं मानीं तो करेंगे हड़ताल

ट्रांसपोर्टरों के इस आंदोलन में दिल्ली आॅटो रिक्शा संघ, एसटीए आॅपरेटर एकता मंच और राजधानी ट्रांसपोर्टर पंचायत शामिल है।

Author नई दिल्ली | July 26, 2017 2:46 AM
दिल्ली में चलते ऑटो।

दिल्ली के ट्रांसपोर्टर अपनी मांगों को लेकर बुधवार से केंद्र और दिल्ली सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू करेंगे। इस आंदोलन में ट्रांसपोर्टरों के तीन संगठन शामिल हैं। आंदोलन के पहले चरण में ये संगठन राजघाट स्थित समता स्थल पर एकजुट होंगे और वहां से नारेबाजी करते हुई दिल्ली सचिवालय तक जाएंगे। ट्रांसपोर्टरों के इस आंदोलन में दिल्ली आॅटो रिक्शा संघ, एसटीए आॅपरेटर एकता मंच और राजधानी ट्रांसपोर्टर पंचायत शामिल है।  आंदोलनकारी ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार उनके धंधे को चौपट करने में लगी है। संगठनों का कहना है कि वे लगातार अपनी मांगों को लेकर दोनों सरकारों को ज्ञापन दे रहे हैं, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। यूनियनों का कहना है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द गौर नहीं किया गया तो वे हड़ताल पर चले जाएंगे, जिससे दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था चौपट हो जाएगी।

दिल्ली आॅटो रिक्शा संघ के अध्यक्ष राजेंद्र सोनी का कहना है कि पहले उनके आॅटो और टैक्सियों के सिलेंडर की हर पांच साल बाद जांच होती थी। उसके बाद केंद्र ने इसकी समयसीमा तीन साल तय कर दी। पहले सिलेंडर जांच के 900 रुपए लगते थे और अब 2500 रुपए लग रहे हैं और जांच भी निजी कंपनियों को सौंप दी गई है। गाड़ियों के इंश्योरेंस की रकम में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पहले गाड़ी की थर्ड पार्टी इंश्योरेंस 3200 रुपए में हो जाती थी, जो बाद में 4800 रुपए कर दी गई है, लेकिन अब केंद्र सरकार के परिवहन मंत्रालय ने उसकी राशि करीब 7 हजार रुपए कर दी है और उस पर जीएसटी अलग से लग रहा है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि रेलवे प्रशासन करीब 36 रेलवे स्टेशनों पर आॅटो-टैक्सी स्टैंड का निजीकरण कर रहा है। पहले इन स्टैंड पर एक आम चालक भी सवारी ढोने के लिए अपना वाहन खड़ा कर लेता था। अब सभी बड़े रेलवे स्टेशनों पर टैक्सी-आॅटो स्टैंड का निजीकरण कर दिया गया है। अब निजी कंपनियां देखेंगी कि वहां किसके वाहन को खड़ा होने देना है।

ट्रांसपोर्टर यूनियन के नेता इंद्रजीत का कहना है कि निजीकरण के बाद यहां पर ओला और उबर की ही गाड़ियां खड़ी होंगी, जिससे उनका धंधा चौपट हो जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी गाड़ियों में अब स्पीड ब्रेकर लगाए जा रहे हैं, जिससे गाड़ियों की रफ्तार पर रोक लग जाएगी। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि रात के समय सड़कें खाली होती हैं, लेकिन गाड़ियों में स्पीड ब्रेकर लगे होने की वजह से वे ज्यादा रफ्तार से वाहन नहीं चला पाएंगे। एसटीए आॅपरेटर एकता मंच के मुताबिक, दिल्ली सरकार की सार्वजनिक परिवहन की नीतियां उनकी समझ से परे हैं। मंच के अध्यक्ष श्याम लाल गोला के मुताबिक, दिल्ली में आठ साल से सार्वजनिक वाहनों के किराए में बढ़ोतरी नहीं हुई है। उन्होेंने बताया कि राजधानी में करीब 6153 ग्रामीण सेवा और 1500 मिनी बसें चल रही हैं। इनका किराया साल 2009 में तय हुआ था, उसके बाद से अब तक इनके किरायों में सरकार बढ़ोतरी नहीं करने दे रही है।

 

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