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इस गर्मी में नहीं रुलाएगी बिजली

इस साल गर्मी के मौसम में दिल्ली में बिजली की मांग 6100 मेगावॉट तक पहुंचने का अनुमान है। पिछले साल यह 5846 मेगावॉट थी। पिछली गर्मियों में बीआरपीएल इलाके में बिजली की पीक डिमांड 2427 मेगावॉट थी, जो इस साल बढ़कर 2563 मेगावॉट तक जा सकती है।

Author नई दिल्ली | March 5, 2016 04:43 am
बिजली सप्लाई।

बिजली वितरण कंपनी टाटा पावर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (टीपीडीडीएल) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रवीर सिंहा का कहना है कि बिजली वितरण कंपनियों का लेखा-जोखा दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) के हाथों में है इसलिए सीएजी से लेखा-जोखा को कानून सम्मत नहीं बताने के हाई कोर्ट के फैसले को दिल्ली सरकार सुप्रीम कोर्ट ले गई है। मामला कोर्ट में है लिहाजा इस पर ज्यादा बातचीत नहीं की जा सकती है। डीईआरसी खुद एक वैधानिक संस्था है और इसकी जांच कोर्ट की तरह ही है। सिन्हा ने टीपीडीडीएल के बीते 12 सालों के कार्यकाल में बिजली चोरी को 53 फीसद से नौ फीसद पर लाने का दावा किया। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों में कहीं 50 तो कहीं 70 फीसद तक बिजली चोरी होती है।

दिल्ली शायद अकेला ऐसा राज्य है जहां बिजली चोरी को निजी वितरण कंपनी ने नौ फीसद पर ला दिया है। टीपीडीडीएल दिल्ली के उत्तरी और उत्तर-पश्चिम क्षेत्र के 15 लाख उपभोक्ताओं को बिजली मुहैया कराती है। सिन्हा ने कहा कि बिजली चोरी रोकने का फायदा यह हुआ कि अब दिल्लीवालों को बिजली का रोना नहीं रोना पड़ता। इसके लिए दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस, आरडब्लूए और सबसे ज्यादा दिल्ली के लोगों का साथ रहा है। हमने चोरी ही नहीं रोकी, बल्कि निजीकरण के समय से अपने खर्चे भी कम किए हैं और कर्मचारियों में भी कमी की है। बिजली वितरण के साथ हमने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए कई योजनाएं शुरू कीं जिसे सभी लोगों ने सराहा है। हमारे 30 हजार छोटे और चार हजार बड़े ट्रांसफॉर्मर से दिल्ली के लोगों को बिजली पहुंचाने का भरसक प्रयास किया जाता है। साप्ताहिक जांच से हम यह तय करते हैं कि कहां-किस कारण से बिजली सप्लाई बाधित हो रही है

इस साल गर्मी के मौसम में दिल्ली में बिजली की मांग 6100 मेगावॉट तक पहुंचने का अनुमान है। पिछले साल यह 5846 मेगावॉट थी। पिछली गर्मियों में बीआरपीएल इलाके में बिजली की पीक डिमांड 2427 मेगावॉट थी, जो इस साल बढ़कर 2563 मेगावॉट तक जा सकती है। वहीं, बीवाइपीएल इलाके में पिछले साल बिजली की पीक डिमांग 1366 मेगावॉट थी, जो इस बार बढ़कर 1476 मेगावॉट के आंकड़े को छू सकती है। चालू वित्त वर्ष में वित्तीय संकटों के बावजूद, उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली आपूर्ति मुहैया कराने के लिए बीएसईएस ने अपने बिजली नेटवर्क में 350 करोड़ रुपए का निवेश किया है।

साथ ही उसने अपनी बिजली वितरण क्षमता में 450 एमवीए की बढ़ोतरी भी की है। बीआरपीएल और बीवाइपीएल ने गर्मियों के दौरान बिजली की बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए समर एक्शन प्लान बनाने और पूरी तैयारी करने का दावा किया है। इन कंपनियों का कहना है कि बिजली खरीद समझौतों की प्रक्रिया पूरी कर, बिजली के पर्याप्त इंतजाम किए जा चुके हैं, ताकि बीएसईएस के 37 लाख ग्राहकों को बेहतर बिजली आपूर्ति दी जा सके।

इसके अलावा विभिन्न स्रोतों से भी बिजली की व्यवस्था की गई है। इनमें, पावर प्लांटों से लॉन्ग टर्म वाले पावर परचेज अग्रीमेंट के अलावा कई राज्यों की पावर बैंकिंग भी शामिल हैं। सामान्य बिजली खरीद समझौतों के अलावा, गर्मियों में पावर बैंकिंग की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका होगी। पावर बैंकिंग के माध्यम से बीआरपीएल और बीवाइपीएल को जम्मू-कश्मीर से 150 मेगावॉट बिजली चौबीसों घंटे उपलब्ध होगी। जम्मू-कश्मीर मई से लेकर सितंबर तक बीएसईएस को बिजली देगा। बीवाइपीएल को मेघालय से भी 50 मेगावॉट बिजली मिलेगी। किसी विशेष पावर प्लांट में बिजली उत्पादन कम होने या बंद होने की स्थिति में बिजली कंपनियां शॉर्ट टर्म आधार पर पावर एक्सचेंज से बिजली खरीदेंगी।

बिजली की पर्याप्त व्यवस्था करने के अलावा, बीएसईएस ने अपने उपभोक्ताओं को विश्वसनीय बिजली आपूर्ति मुहैया कराने के लिए अपनी बिजली वितरण प्रणाली को सशक्त बनाया है। इसके अतिरिक्त, ज्यादातर ग्रिडों, ट्रांसफॉर्मरों और अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों की सर्विसिंग व मेंटेनेंस/रखरखाव का काम भी पूरा हो चुका है। बाकी बचे उपकरणों की सर्विसिंग और मेंटेनेंस का काम भी गर्मी शुरू होने के पहले ही पूरा कर लिया जाएगा। इसके अलावा, दीनदयाल उपाध्याय मार्ग और नजफगढ़ में दो नए ग्रिड भी लगाए गए हैं, ताकि गर्मियों में उपभोक्ताओं को सुचारू बिजली मुहैया कराई जा सके।

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