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नृत्यः ए री सखी आज घेर लो श्याम को

कथक नृत्यांगना टीना तांबे ने पिछले दिनों इंडिया हैबिटाट सेंटर में आयोजित समारोह में नृत्य पेश किया। उन्होंने शिव स्तुति ‘आंगिकम भुवनम’ से नृत्य आरंभ किया।

कथक नृत्यांगना टीना तांबे ने पिछले दिनों इंडिया हैबिटाट सेंटर में आयोजित समारोह में नृत्य पेश किया। उन्होंने शिव स्तुति ‘आंगिकम भुवनम’ से नृत्य आरंभ किया। इसमें शिव की वंदना और उनका सुंदर रूप पेश किया गया। यह सामूहिक पेशकश थी। इसके बाद उन्होंने तीन ताल में निबद्ध शुद्ध नृत्य पेश किया।
उन्होंने विलंबित लय में उपज से शुरुआत की। इसमें 6 चक्करों के साथ खड़े पैर का दुरुस्त काम प्रस्तुत किया गया। एक से पांच अंकों व ‘ता-धा’ के बोल से सजी तिहाई में नायक-नायिका की छेड़छाड़ को दर्शाया गया। वहीं अगली तिहाई ‘धा-धिंन-धा’ पर नायिका ने शृंगार को हस्तकों और मुद्राओं के बनाव से निरूपित किया। टीना ने जयपुर घराने की खास थाट, परण, आमद को पेश किया। उन्होंने परण ‘थुंग-नग-नग’ व आमद ‘किट-धा-धा-धा’ के बोल पर सोलह व इक्कीस चक्करों का सुंदर प्रयोग किया। उन्होंने मध्य लय में परमेलू और फरमाइशी चक्रदार परण पेश किया।
अगले अंश में उनकी चार शिष्याओं ने शुद्ध नृत्य प्रस्तुत किया। उन्होंने तीन ताल द्रुत लय में टुकड़े, परण और तिहाइयों की लड़ी को पेश किया। नृत्य के क्रम में गत निकास के तहत सादी गत और रुख्सार की गत की प्रस्तुति रसात्मक थी। नृत्यांगनाओं की तैयारी और आपसी तालमेल अच्छी थी। नृत्य के अंत में सामूहिक प्रस्तुति थी। यह राग अहीर भैरव और एक ताल में निबद्ध तराना था।
नायक कृष्ण के जीवन में कई महिलाओं की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही थी। इसी परिकल्पना को नृत्य रचना ‘रस नायिका’ में टीना ने साकार किया। देवकी, यशोदा, गोपिका, राधा, कुब्जा, द्रौपदी, सत्यभामा, वृंदा और मीरा के जरिए नौ रसों का निरूपण मोहक था। काव्यांश, सरगम, बंदिश ‘ए री सखी आज घेर लो श्याम को’, मीरा के पद ‘मीरा मगन भई’ के जरिए इसे पिरोया गया था। कथक की तकनीकी पक्ष के साथ अभिनय की बारीकियों का यह निरूपण सरस और मोहक था।

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