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तिहाड़ जेल को 50 करोड़ से अधिक का नुकसान

जेल द्वारा 10,000 वर्ग फुट मिरांडी लकड़ी की सप्लाई 595 रुपए से 621.5 रुपए प्रति वर्ग फुट की दर से खरीद की गई जो कि बाजार दर से बहुत अधिक है।

Author नई दिल्ली | October 6, 2016 9:12 AM
(तिहाड़ जेल)

दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से तिहाड़ जेल को 50 करोड़ रुपए से अधिक की हानि पहुंचाई गई। विपक्ष के नेता ने उपराज्यपाल नजीब जंग से इस मामले में सीबीआइ जांच की मांग की है।  विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि तिहाड़ जेल के 12,000 कैदियों को सजा काटकर छूटने के बाद उनका पुनर्वास करने की भारत सरकार की नीति के तहत जेल में कैदियों को बेकरी चलाने, बढ़ईगीरी, लोहागीरी, कपड़ा उत्पादन जैसे कौशल में प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसके लिए कच्चे माल की जरूरत होती है। गुप्ता ने आरोप लगाया कि इस काम में भारी गोलमाल ठेकेदारों और जेल अधिकारियों द्वारा मिलकर किया गया है और यह घपला अभी भी जारी है।
गुप्ता ने आगे कहा, ‘दिल्ली की दो सप्लाईकर्ता फर्मों द्वारा बिक्री कर, एक्साइज और कस्टम ड्यूटी की चोरी के बाद भी तिहाड़ जेल के अधिकारियों की मिलीभगत से इन फर्मों द्वारा जेल को लगातार कच्चे माल की आपूर्ति की गई। टेंडर की शर्तों के मुताबिक माल आपूर्ति न करके घटिया माल कम मात्रा में भेज ज्यादा आपूर्ति दिखाई गई। इससे जेल को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ। इन्हीं फर्मों को अब भी माल आपूर्ति का कार्य सौंपा जा रहा है। इससे जेल को हर साल करोड़ों रुपए की हानि हो रही है। यह बात जेल के उच्च अधिकारियों को पता है।’

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मामले का ब्योरा देते हुए विजेंद्र गुप्ता ने कहा, ‘जेल द्वारा 10,000 वर्ग फुट मिरांडी लकड़ी की सप्लाई 595 रुपए से 621.5 रुपए प्रति वर्ग फुट की दर से खरीद की गई जो कि बाजार दर से बहुत अधिक है। लकड़ी टेंडर के अनुसार आपूर्ति न करके घटिया लकड़ी आपूर्ति की गई। यह बात कुछ ईमानदार अधिकारियों ने पकड़ ली जिसके बाद आपूर्तिकर्ता फर्मों की सिक्योरिटी जब्त कर ली गई। इस काम में जेल को 50 लाख रुपए की हानि हुई। एक बार घपला पकड़े जाने के बाद इन फर्मों को काली सूची में डाल दिया जाना चाहिए था। लेकिन कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की इन फर्मों से सांठगांठ के कारण ऐसा नहीं किया गया। इन्हीं फर्मों को अधिकारियों ने उनसे मिलीभगत के कारण 1050 रुपए प्रति वर्ग फुट की दर से लकड़ी खरीदने का आॅडर्र दिया। इससे जेल को एक करोड़ रुपए की हानि हुई।

गुप्ता ने आरोप लगाया कि चाय पत्ती, बेकरी के मैदे की खरीद में भी घोटाला किया गया और गुणवत्ता से समझौता कर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया। इसके साथ ही माल आपूर्ति में जेल मैनुअल के नियमों का उल्लंघन कर भारी गबन भी किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘नेफेड जैसी प्रतिष्ठित संस्था द्वारा धर्मकांटा की रसीद तक ट्रकों ने जेल में दिए बगैर माल सप्लाई करना दिखाया है। सरसों की आपूर्ति लीलैंड टाटा ट्रक द्वारा प्रति ट्रक 25 से 30 टन सप्लाई दिखाई गई है जबकि इस ट्रक की कुल भार वाहन क्षमता सिर्फ 8 से 10 टन की होती है। इस आपूर्ति में फर्मों ने सरकार को बिक्री कर न अदा करके करोड़ों रुपए की हानि पहुंचाई गई है’। विपक्ष के नेता ने कहा कि इसी तरह के दर्जनों अन्य घपले करके जेल को अबतक 50 करोड़ रुपए से अधिक की हानि पहुंचाई गयी है, उपराज्यपाल इसमें जांच का आदेश दें और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

 

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