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ये है यमुना

दिल्ली वाले को 10 साल पहले सरकार ने एक सपना दिखाया था, स्वच्छ यमुना का। कहा था कि यमुना ऐसे बहेगी जैसे लंदन में टेम्स बहती है।

दिल्ली मेरी दिल्ली।

दिल्ली वाले को 10 साल पहले सरकार ने एक सपना दिखाया था, स्वच्छ यमुना का। कहा था कि यमुना ऐसे बहेगी जैसे लंदन में टेम्स बहती है। लोग ऐसे डुबकी लगाएंगे जैसे प्रयाग और वाराणसी में लगाते हैं। लेकिन सच्चाई ये है कि यहां पीने तक का साफ पानी नहीं नसीब हो रहा। हालात ऐसी हो रही है कि सरकारों का पीने के पानी के संयंत्र तक बंद करने पड़ रहे हैं। और इसके बाद टैंकर को लेकर मारामारी है सो अलग। इसी यमुना को टेम्स बनाने के नाम पर कई यमुना एक्शन योजना नदी में ऐसे बह गया जैसे गंदगी बहती है।

हार का डंक

कहते हैं राजनीति में मौका मिलते हैं पलटवार होता है। जो यह दांव न चल सके वह खाटी राजनीतिज्ञ कहां! बीते दिनों दिल्ली के शिक्षा मंत्री का पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर बरसना, उन्हें लक्षित कर केंद्र के बड़े नेता से छुपी दोस्ती का आरोप लगाने के पीछे का माजरा भी कुछ ऐसा ही था। दरअसल यह हार का दंश था या यूं कहें कि यह नहले पर दहला था । बीते दिनों कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आप के तीन विधायकों को पंजाब में तोड़कर अपने साथ मिला लिया था, तब दिल्ली के आप नेता झेंप कर रह गए थे। वे खंभा नोचते नजर आए। उनके पास कोई चारा न था। लेकिन जैसे ही केंद्र की एक रपट में सरकारी स्कूलों की रेटिंग में पंजाब को टॉप और दिल्ली को नीचे दिखाया गया, उसे लेकर दिल्ली के शिक्षा मंत्री और आप नेता मनीष सिसोदिया कैप्टन पर बरस पड़े। कहना ना होगा की पंजाब के सरकारी स्कूल रपट में भले एक नंबर पर आए लेकिन रेटिंग में दिल्ली और पंजाब के बीच कई और राज्यों के स्कूल भी थे। लेकिन आप नेता ने केवल पंजाब के कैप्टन पर ही दांव लगाया। केवल कैप्टन पर दांव लगाना अनायास नहीं था। पार्टी तोड़ने का गुस्सा था ही केंद्र की रपट के बहाने उन्हें लपेटने का मौका जो मिल गया। किसी ने ठीक ही कहा- यह तो नहले पर दहला था!

खजूर पर अटके

कहावत है आसमान से गिरे खजूर पर अटके। दिल्ली नगर निगम में यह चरितार्थ होता दिख रहा है। यहां ऐसा पहली बार देखा गया है कि तीनों मौजूदा महापौर को आने वाले सदन में किसी महत्वपूर्ण पद पर नहीं बिठाया गया। पहले होता था कि महापौर अपनी कुर्सी छोड़ने के बाद या तो स्थायी समिति के अध्यक्ष बनते थे या सदन के नेता। एकदम विपरीत हालत में किसी- किसी को स्थायी सदस्य समिति में कम से कम एक सदस्य के तौर पर एक साल के लिए कार्यकाल कर प्रतिष्ठित किया ही जाता था। लेकिन इस बार तो उत्तरी, पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली के तीनों महापौर जयप्रकाश, निर्मल जैन और अनामिका मिथिलेश सिंह को सीधे तौर पर बतौर पार्षद अपने कार्यकाल के बचे दिन को निगम में बिताने को विवश कर दिया गया है। आपको बता दें कि 2022 के शुरुआती दिनों में ही दिल्ली के तीनों नगर निगमों में चुनाव होने हैं।

प्रचार पर चुटकी

दिल्ली सरकार जो करती है उसका लंबा-चौड़ा प्रचार जरूर करती है। इस पर विपक्ष को भी सरकार को घेरने का मौका मिल जाता है। दिल्ली में चाहे मुफ्त बिजली-पानी की बात हो या फिर बस में महिलाओं के मुफ्त यात्रा की। सरकार ने लोगों को जोर-शोर से इस बारे में बताया। अब यही प्रचार विपक्ष हथियार के तौर पर इस्तेमाल करता है। सोशल मीडिया पर इन दिनों मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री की आपस में बात करते हुए एक फोटो साझा की जा रही है। विपक्षियों ने मजे लेने के लिए अपनी बातचीत जोड़ दी। एक फोटो में दोनों बात करते दिख रहे हैं कि ‘आप रूई व इंजेक्शन मुफ्त दे रही है।’ इस पर उपमुख्यमंत्री के फोटो से एक कमेंट पास किया गया ‘क्या विज्ञापन दे दें।’

हफ्ते की बंदी

उत्तर प्रदेश में साप्ताहिक पूर्णबंदी घोषित है। लेकिन बाजारों में इसका पालन करा पाना पुलिस ने लिए किसी चुनौती से कम नहीं। केवल पॉश सेक्टरों में ही बंदी के प्रशासनिक आदेशों का अनुपालन हो पा रहा है, जबकि अधिकांश शहरी गांवों से सटे इलाकों में साप्ताहिक पूर्णबंदी तभी दिखती है जब पुलिस का वाहन सायरन बजाते निकलता है। इस दौरान सभी दुकानदार अपने शटर गिरा लेते हैं और ग्राहक पुलिस के जाने का इंतजार करते हैं। तो पुलिस भी क्या करे। वह रोज अपने आदेश को पूरा करते हुए ठीक शाम सात बजे मोटरसाइकिल से गश्त लगाकर हफ्ते की बंदी की ड्यूटी बजा लेती है।

छिपाना फिर बताना

दिल्ली पुलिस अच्छे कामों को प्रचारित करने में भी माहिर है और वारदातों को छिपाने में भी। कोई खुलासा करना हो तो न केवल प्रेस ब्रीफिंग बल्कि संचार के कई साधनों का प्रयोग कर जनता तक पहुंचने की कोशिश की जाती है। लेकिन जैसे ही कोई बड़ी घटना घटी सब चुप्पी साध लेते हैं। खबरनवीसों को यह पुख्ता करना मुश्किल हो जाता है कि आखिर वारदात हुई भी है या नहीं। कोई बोलने को तैयार ही नहीं होता। लेकिन अगर उसी पर्दा की गई वारदात का दो दिन बाद पर्दाफाश कर लिया गया हो तो बताने में फक्र महसूस करते हैं कि फलां वारदात हो गई थी जिसका खुलासा दिल्ली पुलिस ने कर लिया है और शुरू हो जाता है पीठ थपथपाने का सिलसिला। -बेदिल

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