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थैलेसेमिया पीड़ित बच्चों को सरकार की इस परियोजना से मिलेगा लाभ

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने थैलेसेमिया से पीड़ित बच्चों के उपचार की परियोजना की शुरूआत की है जिसके तहत इस वित्त वर्ष में 200 बच्चों का उपचार कोल इंडिया के सहयोग से किया जाएगा।

Author नई दिल्ली | April 17, 2017 5:45 PM

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने थैलेसेमिया से पीड़ित बच्चों के उपचार की परियोजना की शुरूआत की है जिसके तहत इस वित्त वर्ष में 200 बच्चों का उपचार कोल इंडिया के सहयोग से किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार ने इस लिहाज से देशभर में चार अस्पतालों को चिह्नित किया है जहां बोन मैरो प्रतिरोपण के साथ ही सर्जरी के बाद का उपचार किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया की लागत 10 लाख रच्च्पये आती है और इसका खर्च कोल इंडिया उठाएगी। जिन चार संस्थानों का चयन किया गया है उनमें कोलकाता का टाटा मेडिकल सेंटर, सीएमसी वेल्लूर और दिल्ली में राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर तथा एम्स हैं।

इस परियोजना से वंचित वर्ग के थैलेसेमिया रोगियों को लाभ मिलेगा जिनके लिए भाई या बहन डोनर का काम कर सकते हैं और वह बोन मैरो प्रतिरोपण के लिए उपयुक्त है लेकिन इसके लिए उनके पास वित्तीय संसाधन नहीं हैं। अधिकारी ने कहा, ‘‘यह सहायता उन रोगियों को ही प्रदान की जाएगी जिनकी मासिक आय 20,000 रुपए प्रति माह से कम है।

उन्होंने कहा, ‘‘पहले परियोजना चार केंद्रों पर शुरू की जाएगी और धीरे-धीरे इसे छह और केंद्रों तक बढ़ाया जा सकता है ताकि रोगियों के लिए प्रतीक्षा समय कम हो। प्रत्येक केंद्र को एक साल में कम से कम पांच थैलेसेमिया रोगियों का बोन मैरो प्रतिरोपण करना होगा। देश में हर साल करीब 10 से 12 हजार बच्चे थैलेसेमिया के साथ जन्म लेते हैं।

एम्स के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने कहा, इन बच्चों का एकमात्र उपचार बोन मैरो प्रतिरोपण है जो थोड़ा महंगा है और निजी अस्पतालों में तो इसका खर्च करीब 22 से 25 लाख रुपए पड़ता है। अधिकारी के मुताबिक कोल इंडिया ने अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व :सीएसआर: पहल के तहत उपचार कराने वाले प्रत्येक बच्चे के लिए 10 लाख रच्च्पये की वित्तीय सहायता देने की सहमति जताई है।

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