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दुनिया के सभी हिस्से में फैले आतंकवाद की जड़ को लेकर आया राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का बयान

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि दुनिया के सभी हिस्सों में शांतिप्रिय देशों को आवश्यक एवं विस्तृत कदमों से आतंकवाद के सभी स्वरूपों को जड़ से उखाड़ फेंकने की जरूरत है ।

Author नई दिल्ली | April 11, 2017 4:32 PM
राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि दुनिया के सभी हिस्सों में शांतिप्रिय देशों को आवश्यक एवं विस्तृत कदमों से आतंकवाद के सभी स्वरूपों को जड़ से उखाड़ फेंकने की जरूरत है । कल यहां राष्ट्रपति भवन में आॅस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री मैलकम टर्नबुल से मुलाकात के दौरान प्रणव ने इस बात पर जोर दिया । प्रणव ने कहा, ‘‘यह संतोष की बात है कि आतंकवाद की चुनौतियों पर हमारे लोगों में नियमित वार्ता होती है ।’’
आज जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया, ‘‘भारत अपने रूख पर कायम रहा है कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता और दुनिया के सभी हिस्सों में शांतिप्रिय देशों की ओर से आवश्यक एवं विस्तृत कदमों के जरिए आतंकवाद के सभी स्वरूपों एवं इसके परिणामों को जड़ से उखाड़ फेंकने की जरूरत है ।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाने और जीवाश्म ईंधनों को बचाने की हमारी कोशिशों के तहत अपनी कुल उर्च्च्जा संग्रहण के क्रम में भारत को परमाणु ऊर्जा की मात्रा बढाने की जरूरत है । उन्होंने कहा, ‘‘भारत इस प्रक्रिया में आॅस्ट्रेलियाई यूरेनियम आपूर्ति के लिए अहम भूमिका देखता है । भारत इस दिशा में आॅस्ट्रेलिया के प्रयासों की सराहना करता है । आॅस्ट्रेलिया में 60,000 से ज्यादा भारतीय छात्रों के अध्ययनरत होने का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की विशाल संभावनाएं हैं ।

इससे पहलेे राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने वाद-विवाद और परिचर्चा के मुद्दे पर शनिवार (1 अप्रैल) को छात्र समुदाय का आह्वान किया कि वे तर्क-वितर्क करने वाले बनें, लेकिन असहनशील नहीं बनें। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को आधुनिक भारत का निर्माता बताते हुए प्रणव ने कहा कि उन्होंने संघर्ष और टकराव का माहौल नहीं बनाकर खुली बहस और परिचर्चा का माहौल बनाने में मदद की।

भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) कलकत्ता के 52वें दीक्षांत समारोह में प्रणव ने कहा, ‘‘जैसा कि अमर्त्य सेन ने कहा था, कोई भारतीय तर्क-वितर्क करने वाला तो हो सकता है, लेकिन असहनशील नहीं हो सकता।’’

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘भारत सहनशीलता, बुद्ध की भूमि, चैतन्य की भूमि है, लेकिन असहनशीलता की भूमि नहीं है। अगर ऐसा कहकर मैंने किसी की भावनाएं आहत कर दी हों, तो मुझे माफ करें।’’

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