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जंग के बाद फाइल नजीब के पास

दिल्ली महिला आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर दिल्ली में केजरीवाल सरकार और उपराज्यपाल के बीच पैदा हुए ताजा टकराव का सुखद अंत होता दिख रहा है..

Author July 24, 2015 8:41 AM
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल

आप सरकार ने दो दिन के मतभेद के बाद दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्लू) प्रमुख की नियुक्ति संबंधी फाइल उपराज्यपाल को भेजते हुए कहा कि यह कोई प्रतिष्ठा का सवाल नहीं है। लेकिन साथ ही दिल्ली में ‘वही सरकार’ हैं वाले उनके रुख की कड़ी आलोचना करते हुए तानाशाही करार दिया।

दिल्ली महिला आयोग के प्रमुख के रूप में स्वाति मालीवाल की नियुक्ति को लेकर शुरू हुए मतभेद के गहराने की आशंकाओं के बीच उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने गुरुवार को उपराज्यपाल नजीब जंग से भेंट करने के बाद घोषणा की कि फाइल को मंजूरी के लिए उपराज्यपाल के पास भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसा पैनल को कमजोर करने के प्रयासों को रोकने के लिए किया गया है।

इस घटना के कुछ ही घंटों बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जंग को एक रूखा सा पत्र लिखा जिसमें उन्होंने उनके इस बयान के लिए आलोचना की कि दिल्ली में सरकार मतलब ‘उपराज्यपाल’ है। केजरीवाल ने कहा कि उपराज्यपाल के इस कथन का परिणाम होगा तानाशाही और उनका रुख ना सिर्फ असंवैधानिक है बल्कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में हास्यास्पद भी है।

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मुख्यमंत्री ने जंग पर आरोप लगाया कि दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्लू) में ताला लगाने के बाद उन्होंने वहां से फाइलें मंगार्इं। केजरीवाल ने इसे ब्लैकमेल करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इशारों पर काम कर रहे हैं और उन्होंने डीसीडब्लू को बिलकुल निष्क्रिय बना दिया है।

केजरीवाल ने अपने पत्र में लिखा है, ‘उपराज्यपाल कहते हैं कि वह दिल्ली की सरकार हैं। ऐसा कैसे हो सकता है? कोई खुद को सरकार कैसे कह सकता है? इससे दिल्ली में तानाशाही हो जाएगी। इससे ज्यादा हास्यास्पद कुछ नहीं होगा। भारत लोकतंत्र है। दिल्ली में एक निर्वाचित सरकार है।

उन्होंने लिखा है, ‘यह और कुछ नहीं बल्कि तथ्य है कि दिल्ली सरकार का अर्थ एक निर्वाचित सरकार है कोई व्यक्ति नहींं’। उन्होंने लिखा है, ‘लेकिन उपराज्यपाल ऐसे हास्यास्पद और असंवैधानिक बयान क्यों दे रहे हैं। सच्चाई यह है कि उपराज्यपाल खुद कुछ नहीं कर रहे हैं। उनसे सबकुछ कराया जा रहा है’।

डीसीडब्लू प्रमुख के रूप में स्वाति मालीवाल की नियुक्ति को खारिज करते हुए, नजीब जंग ने मंगलवार को अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा था, ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में सरकार का अर्थ उपराज्यपाल’’है जो राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त होता है और शीर्ष पदों पर नियुक्ति सहित अन्य अहम मुद्दों पर फैसला लेने का पूरा अधिकार उसके पास होता है।

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने जंग को लिखे पत्र में कहा है, ‘हमारे लिए यह अहंकार की लड़ाई नहीं है। सम्माननीय उपराज्यपाल, प्रधानमंत्री जीत गए हैं, हम सभी हार गए हैं। हम हाथ जोड़कर आपसे अनुरोध करते हैं कि आप डीसीडब्लू से संबंधित फाइलों पर जल्दी हस्ताक्षर करें और उसे सक्रिए बनाएं। मैं फाइल आपके पास भेज रहा हूं’।

जंग ने मंगलवार को मालीवाल की नियुक्ति रद्द करते हुए कहा था कि इसकी कानूनी वैधता नहीं है और यह संविधान का उल्लंघन है। उपराज्यपाल कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि वह समय पर संविधान के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए केजरीवाल के पत्र का उत्तर देंगे। गुरुवार सुबह मालीवाल ने दावा किया था कि उनके दफ्तर में ताला जड़ा हुआ था, हालांकि कुछ ही घंटों बाद वह खुला हुआ मिला। उनकी नाम पट्टिका वहां से जरूर हटी हुई थी। मालीवाल ने यह भी दावा किया कि उनके दफ्तर में पड़ी सभी फाइलें हटा ली गई हैं।

बाद में मालीवाल का आइटीओ के विकास सदन स्थित कार्यालय खुला हुआ मिला। डीसीडब्लू की सदस्य सचिव अर्चना अरोड़ा ने बाद में पुष्टि की कि उपराज्यपाल कार्यालय से उनके दफ्तर में ताला जड़ने संबंधी कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ था और वह सामान्य रूटीन के तहत बंद था। जंग को लिखे अपने पत्र में केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि उपराज्यपाल ‘यह सब कुछ प्रधानमंत्री के निर्देशों पर कर रहे हैं। यहां तक कि गृह मंत्रालय भी प्रधानमंत्री कार्यालय के समक्ष बेबस है।

उन्होंने आरोप लगाया है, ‘डीसीडब्लू को बंद करने के प्रधानमंत्री के कदम बहुत गलत हैं। उपराज्यपाल डीसीडब्लू के गठन से संबंधित फाइलों पर उनकी अनुमति चाहते हैं। कानून के अनुसार डीसीडब्लू से जुड़े संवैधानिक मामले उपराज्यपाल के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ‘इसी कारण उपराज्यपाल पैनल के कार्यालय को बंद करके जबरन फाइलें ले रहे हैं, जो असंवैधानिक है। यह ब्लैकमेल है’। केजरीवाल ने कहा कि जंग ने प्रधानमंत्री के ईशारों पर डीसीडब्लू को ‘पूरी तरह निष्क्रिय’ बना दिया है।

हम हारे, आप जीते
हमारे लिए यह अहंकार की लड़ाई नहीं है। सम्माननीय उपराज्यपाल, प्रधानमंत्री जीत गए हैं, हम सभी हार गए हैं। हम हाथ जोड़कर आपसे अनुरोध करते हैं कि आप डीसीडब्लू से संबंधित फाइलों पर जल्द हस्ताक्षर करें और उसे सक्रिए बनाएं। मैं फाइल आपके पास भेज रहा हूं। डीसीडब्लू को बंद करने के प्रधानमंत्री के कदम बहुत गलत हैं। इसी कारण उपराज्यपाल पैनल के कार्यालय को बंद करके जबरन फाइलें ले रहे हैं, जो असंवैधानिक है। यह ब्लैकमेल है।
-अरविंद केजरीवाल

(एजंसी)

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