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सोशल मीडिया हब गठित करने की कोशिश पर नाराज सुप्रीम कोर्ट ने कहा – सरकार की मंशा निगरानी राज की

सोशल मीडिया हब बनाने के केंद्र सरकार के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कड़ा रुख अपनाया। देश की सबसे अदालत ने टिप्पणी की कि सरकार इसकी आड़ में लोगों के वाट्स ऐप संदेश देखना चाहती है, जिसकी इजाजत नहीं दी जा सकती।

Author नई दिल्ली, 13 जुलाई। | July 14, 2018 06:32 am
ऑनलाइन डाटा पर निगरानी करने के लिए सोशल मीडिया हब के गठन के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के निर्णय पर सख्त रुख अपनाते हुए अदालत ने कहा कि यह निगरानी राज बनाने जैसा होगा।

सोशल मीडिया हब बनाने के केंद्र सरकार के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कड़ा रुख अपनाया। देश की सबसे अदालत ने टिप्पणी की कि सरकार इसकी आड़ में लोगों के वाट्स ऐप संदेश देखना चाहती है, जिसकी इजाजत नहीं दी जा सकती। ऑनलाइन डाटा पर निगरानी करने के लिए सोशल मीडिया हब के गठन के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के निर्णय पर सख्त रुख अपनाते हुए अदालत ने कहा कि यह निगरानी राज बनाने जैसा होगा। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ के एक पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर दिया। सरकार से दो हफ्ते के भीतर जवाब मांगा गया है। जजों ने तृणमूल कांग्रेस के विधायक महुआ मोइत्रा की जनहित याचिका का संज्ञान लिया। साथ ही इस मामले में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से सहयोग भी मांगा।

मोइत्रा की पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील एएम सिंघवी ने दलील दी कि सरकार ने बाकायदा साफ्टवेयर की आपूर्ति के लिए निविदाएं मांगी हैं और ये निविदा 20 अगस्त को खुल भी जाएंगी। लिहाजा अदालत को समय रहते सरकार को जरूरी निर्देश देने चाहिए। सिंघवी ने कहा कि सरकार सोशल मीडिया हब के जरिए सोशल मीडिया की विषयवस्तु की निगरानी करना चाहती है। सिंघवी की आशंका को देखते हुए जजों ने कहा कि अदालत 20 अगस्त को टेंडर खुलने के पहले इस मामले को तीन अगस्त के लिए सूचीबद्ध कर रही है। अटॉर्नी जनरल या सरकार का कोई भी विधिक अधिकारी इस मामले में अदालत की सहायता करेगा।

गौरतलब है कि इससे पहले 18 जून को शीर्ष अदालत की अवकाशकालीन पीठ ने इस याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। याचिका में सोशल मीडिया कम्युनिकेशन हब बनाने के केंद्र सरकार के कदम पर रोक लगाने की मांग की गई थी। यह हब डिजिटल व सोशल मीडिया की विषयवस्तु को एकत्र कर उसका विश्लेषण करेगा। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार के उपक्रम ब्राडकास्ट इंजीनियरिंग कंसलटेशन इंडिया लिमिटेड ने सोशल मीडिया कम्युनिकेशन हब परियोजना के लिए सॉफ्टवेयर की आपूर्ति के लिए निविदाएं मांग रखी हैं। इस हब के जरिए सूचना प्रसारण मंत्रालय ऑन लाइन डाटा की निगरानी के बहाने ट्विटर, फेसबुक व वाट्स ऐप जैसे सोशल मीडिया खातों को ट्रैक करेगी। जजों ने साफ कहा कि सरकार की मंशा निगरानी राज्य स्थापित करने की लगती है।

जनहित याचिका

सरकार के उपक्रम ब्राडकास्ट इंजीनियरिंग कंसलटेशन इंडिया लिमिटेड ने सोशल मीडिया कम्युनिकेशन हब परियोजना के लिए सॉफ्टवेयर की आपूर्ति के लिए निविदाएं मांग रखी हैं। इस हब के जरिए सूचना प्रसारण मंत्रालय ऑन लाइन डाटा की निगरानी के बहाने ट्विटर, फेसबुक व वाट्स ऐप जैसे सोशल मीडिया खातों को ट्रैक करेगी।

अदालत नाराज

सरकार को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब मांगा। कहा, सरकार इसकी आड़ में लोगों के वाट्स ऐप संदेश देखना चाहती है, जिसकी इजाजत नहीं दी जा सकती।

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