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पूर्व जस्टिस की राय- प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले जजों पर चले महाभियोग

Supreme Court Senior Judges Address Media: 'वे सिर्फ 4 जज है, वहां 24 और भी जज हैं। 4 जज एक साथ आ जाते हैं और चीफ जस्टिस को गलत तरीके से पेश करते हैं, यह अपरिपक्व और बचकाना व्यवहार है।'
सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने देश की सबसे बड़ी अदालत में काम-काज में अनियमितता का आरोप लगाया।

सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने यह कहकर न्यायपालिका में बवंडर खड़ा कर दिया है कि देश के सर्वोच्च न्यायालय का प्रशासन सुचारू रूप से काम नहीं कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगाई, जस्टिस मदन भीमराव और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केसों के आवंटन में अनियमितता बरती जा रही है। न्यायपालिका के इतिहास में यह घटना ऐतिहासिक है और पहली बार सुप्रीम कोर्ट के जजों को सामने आना पड़ा है। चेलामेश्वर ने कहा कि पिछले 2 महीने से सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक से नहीं चल रहा है। हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज आर एस सोढ़ी ने सुप्रीम कोर्ट के इन चार जजों के इस कदम का कड़ा विरोध किया है। रिटायर्ड जस्टिस सोढ़ी ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा कि उनके विचार से इन सभी जजों पर महाभियोग चलाया जाना चाहिए।। जस्टिस आर एस सोढ़ी ने कहा, ‘इनके खिलाफ महाभियोग चलाया जाना चाहिए, अब इन लोगों को वहां बैठकर फैसला देने का हक नहीं बनता है। ये ट्रेड यूनियनिज्म गलत है। लोकतंत्र खतरे में है ऐसा उन्हें नहीं कहना चाहिए, हमारे यहां संसद है, कोर्ट और पूरी पुलिस प्रणाली काम कर रही है।’

जेसिका लाल हत्याकांड, तंदूर कांड और प्रियदर्शनी मट्टू जैसे हाई प्रोफाइल केसों को देखने वाले पूर्व जस्टिस ने कहा, ‘ये कोई मसला नहीं है। उनकी शिकायत प्रशानिक मुद्दों पर है। वे सिर्फ 4 जज है, वहां 24 और भी जज हैं। 4 जज एक साथ आ जाते हैं और मुख्य न्यायधीश को गलत तरीके से पेश करते हैं, यह अपरिपक्व और बचकाना व्यवहार है।’ वहीं बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यन स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट के काम-काज पर सवाल उठाने वाले जजों का समर्थन किया है। स्वामी ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ‘हम उनकी आलोचना नहीं कर सकते हैं, वे लोग उच्च सत्य निष्ठा के व्यक्ति हैं, इनलोगों ने अपने करियर की कुर्बानी दी है, तब यहां पहुंचे हैं अन्यथा वरिष्ठ वकील के तौर पर यह सब पैसा कमा सकते थे। हमें निश्चित रूप से उनका आदर करना चाहिए। पीएम को सुनिश्चित करना चाहिए कि 4 जज और मुख्य न्यायाधीश, अच्छा होगा पूरा सुप्रीम कोर्ट को एक राय पर आना चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए।’

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  1. Premdayal Gupta
    Jan 13, 2018 at 11:29 am
    इस कानून मन्तरी की परेशानी यह है कि पत्रकार वार्ता आयोजित करने वाले इन न्यायाधीशों को नौकरी से निकालने के लिए भाजपा की सरकार के पास महाभियोग के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है। जबकि, विकल्प की जरूरत कई दशकों से महसूस की जा रही है। भाजपा की दिलचस्पी तो उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में अपने कुत्तों की नियुक्ति को लेकर थी । इसलिए , सत्ता संभालते ही (मई 2014) भाजपा ने अगस्त 2014 में ही एक राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग के गठन का विधेयक संसद से पारित करा लिया। तथापि , 16 अक्तूबर 2015 को सर्वोच्च न्यायालय ने उक्त अधिनियम को असंवैधानिक बता कर खारिज कर दिया । तत्पश्चात 2017 में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष न्यायाधीश सी. एस. कर्णन के कदाचरण का प्रकरण उपस्थित हुआ । कर्णन के प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय उसे नौकरी से ही बर्खास्त करना चाहता था , लेकिन यह विकल्प न होने की वजह से न्यायालय कर्णन को केवल 6 माह के कारावास की सज़ा ही सुना सका । कब तक भाजपा यह समझेगी कि देश को आज एक राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग की नहीं , बल्कि राष्ट्रीय न्यायिक बर्खास्तगी आयोग की जरूरत है ।
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