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किसानों की आत्‍महत्‍या पर सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को लगाई फटकार, कहा- ऐसी खबरों से तकलीफ होती है

राज्य सरकार ने कहा कि इस मुश्किल की घड़ी में केंद्र सरकार को आगे आकर मदद करनी चाहिए।

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तमिलनाडु सरकार को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार द्वारा किसानों की आत्महत्या रोकने के लिए किसी भी प्रकार के ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह सुनकर बहुत दुख होता है कि राज्य में किसान अभी भी आत्महत्या कर रहे हैं और इन घटनाओं को रोकने के लिए सरकार द्वारा पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी करते हुए इस मामले पर दो हफ्ते में जवाब देने को कहा है। इससे पहले 4 अप्रैल को मद्रास हाईकोर्ट ने किसानों के हित में फैसला सुनाते हुए तमिलनाडु सरकार को किसानों का कर्ज माफ करने को कहा था। राज्य सरकार ने कोर्ट से कहा था कि उनके पास इतना पैसा नहीं है कि वह सभी किसानों का कर्ज माफ कर सके। राज्य सरकार ने कहा कि इस मुश्किल की घड़ी में केंद्र सरकार को आगे आकर मदद करनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि इतनी दुखद और अमानवीय घटना पर सरकार क्या कर रही है। इस मामले पर कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। इसके बाद कोर्ट केंद्र सरकार को इस मामले पर अपना जवाब देने के लिए नोटिस भेजेगा। जस्टिस एस नागामुथु और एम.वी मुरलीदरन की बेंच ने निर्देश दिया कि सरकार को किसानों का कर्ज माफ करना होगा। किसान पिछले एक महीने से दिल्ली  के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। बेंच ने कहा कि हम जानते हैं कि तमिलनाडू सरकार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है लेकिन इसके चलते किसानों को आत्महत्या करने नहीं दिया जा सकता।

आपको बता दें कि तमिलनाडु के कावेरी बेसिन के सूखा-पीड़ित किसान पिछले तीन हफ्तों से इंसानी खोपड़ियों के साथ दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हैं। इनका दावा है कि ये खोपड़ियां उन किसानों की हैं जिन्होंने कर्ज के दुश्चक्र में फंस कर आत्महत्या कर ली या भूख ने जिनकी जान ले ली। किसानों का कहना है कि कभी अपनी उपजाऊ जमीन के लिए प्रसिद्ध कावेरी बेसिन इलाके में अब किसानों को आत्महत्या करनी पड़ रही है।

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