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दिल्ली में कूड़े का ढेर: सुप्रीम कोर्ट से LG को फटकार- ‘क्यों ना कचरा राजनिवास के बाहर फेंक दिया जाए’

अदालत ने कहा कि कूड़े को अलग अलग क्यों नहीं किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा, "कूड़ें को अलग-अलग क्यों नहीं किया जाता है, लोगों को इसके बारे में जागरूक किये जाने की जरूरत है, जो इसका पालन नहीं करता है उस पर जुर्माना लगाया जाए।" इस मामले की अगली सुनवाई अब 17 अगस्त को होगी।

पिछले साल गाजीपुर में कूड़े के पहाड़ का एक हिस्सा ढह गया था, जिससे दो लोगों की मौत हो गई थी। हालांकि यह पहाड़ पिछले कई सालों से खतरे की ओर इशारा कर रहा था।

देश की राजधानी दिल्ली में जगह-जगह कूड़े के ढेर पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (6 अगस्त) को सख्त टिप्पणी की। अदालत ने एलजी को फटकार लगाते हुए कहा कि दिल्ली के वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट दिसंबर तक शुरू होंगे, तक तक आप किसी के घर का कचरा किसी और के घर के सामने फेंकना चाहते हैं। अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि क्यों ना इस कचरे को राजनिवास (एलजी का घर) के घर के बाहर ही फेंक दिया जाए। कोर्ट ने सोनिया विहार में कूड़ा फेंकने पर वहां के लोगों के गुस्से को जायज बताया। अदालत ने कहा कि वहां आम आदमी रहते हैं तो आप वहां कूड़ा फेंकना चाहते हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की, “वहां सामान्य लोग रहते हैं तो आप उनके घरों के पास कूड़े का पहाड़ खड़ा करना चाहते हैं।” इसके अलावा अदालत की नाराजगी कूड़े को मिक्स कर देने पर भी थी। अदालत ने कहा कि कूड़े को अलग अलग क्यों नहीं किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा, “कूड़ें को अलग-अलग क्यों नहीं किया जाता है, लोगों को इसके बारे में जागरूक किये जाने की जरूरत है, जो इसका पालन नहीं करता है उस पर जुर्माना लगाया जाए।” इस मामले की अगली सुनवाई अब 17 अगस्त को होगी।

बता दें कि दिल्ली में कूड़ा प्रबंधन नहीं होने की वजह से यहां कई जगहों पर लैंडफील साइट हैं, इन पर जगहों पर कूड़ों के पहाड़ बन गये हैं। इन्हें हटाने में सरकारी एजेंसियों के लचर रवैये को देखते हुए कई संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इससे पिछली सुनवाई के दौरान भी सुप्रीम कोर्ट ने एलजी, दिल्ली और केन्द्र सरकार पर कड़ी टिप्पणी की थी और पूछा था कि वे ये बताएं लैंडफिल साइट का कूड़ा कितने दिनों में हटेगा। अदालत ने पूछा था कि अदालत को इससे मतलब नहीं है कि केन्द्र, एलजी और दिल्ली सरकार बैठकों में चाय कॉफी पीते हुए क्या कर रही है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अदालत ने लैंडफील साइट की ऊंचाई की तुलना कुतुब मीनार से की थी और कहा था कि कूड़े के पहाड़ कुतुब मीनार से मात्र 8 मीटर ही नीचे रह गये हैं।

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