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वजीफा खत्म किए जाने के विरोध में प्रदर्शन

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से एमफिल और पीएचडी छात्रों को दी जाने वाली नॉन नेट वजीफा खत्म किए जाने के फैसले और उसकी समीक्षा के लिए बनी समिति के..

Author नई दिल्ली | November 4, 2015 12:23 AM

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से एमफिल और पीएचडी छात्रों को दी जाने वाली नॉन नेट वजीफा खत्म किए जाने के फैसले और उसकी समीक्षा के लिए बनी समिति के खिलाफ बड़ी तादाद में छात्रों ने सोमवार को यूजीसी के सामने विरोध प्रदर्शन किया। आक्युपाई यूजीसी नाम से बने मंच से तमाम विश्वविद्यालयों के छात्रों ने आरोप लगाया कि इस समिति के जरिए मामले को हल्का करने या छात्रों का ध्यान भटकाने क ी कोशिश की जा रही है। दरअसल यह केंद्र सरकार के इशारे पर संघ के एजंडे को ही लागू करने के लिए गठित की गई है। इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

छात्रों ने समीक्षा समिति का विरोध किया। इस समिति की सोमवार को पहली बैठक हो रही थी। यूजीसी पर सैकड़ों छात्रों ने इस समिति को फर्जी करार देते हुए इसे रद्द करने की मांग दोहराई। आल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा )की अगुआई में देश भर के तमाम विश्वविद्यालयों में भी प्रतिरोध की आवाज उठाई गई। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय क ी ओर से नॉन नेट फे लोशिप मुद्दे पर बनाई गई समिति की पहली बैठक की सूचना मिलते ही फिर छात्रों का हुजूम आक्युपाई यूजीसी स्थल पर उमड़ पड़ा।

आइसा ने इस बैठक को देखते हुए सोमवार को देश भर में प्रतिरोध दिवस मनाने की अपील की थी। इस क्रम में सागर विश्वविद्यालय, गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय, राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय, जादवपुर विश्वविद्यालय समेत तमाम जगहों पर छात्रों ने ज्ञापन देकर या स्थानीय यूजीसी कार्यालय का घेराव और अपनी मांगों को बुलंद किया। इनके साथ दिल्ली विश्वविद्यालय, जामिया, जेएनयू और आंबेडकर विश्वविद्यालय के सैकड़ों छात्र-छात्राएं विरोध प्रदर्शन के लिए आए।

जेएनयू छात्र संघ की उपाध्यक्ष शेहला राशिद ने कहा कि इस बात को दरकिनार नहीं किया जा सकता कि यूजीसी का असल मकसद छात्र-छात्राओं की मांगों से ध्यान भटकाकर समितियों की लालफीताशाही में अटका देना है। इसीलिए यह समिति बनी है। शेहला ने कहा कि जब हम अपनी मांगों के साथ सड़कों पर उतरे हैं तब एक और समिति का झुनझुना हमें दिया जा रहा है। हमने यह तय किया है कि ज्यादा से ज्यादा अभियान चलाकर, छात्र-छात्राओं को जोड़कर बार-बार यूजीसी से वही सवाल पूछेंगे जिनसे यूजीसी बचना चाहता है। आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुचेता डे ने कहा कि पूरे देश में आक्युपाई यूजीसी आंदोलन को मिलते समर्थन से एक बात साफ है कि पूरे देश के छात्र छात्राओं ने एमएचआरडी- यूजीसी केंद्र व परिषद के फरमानों को मानने से साफ इनकार कर दिया है। इसीलिए पूरे देश में आंदोलन जारी है। सुचेता ने कहा कि देश-विदेश से तमाम लोग हमारे समर्थन में खड़े हैं।

सुचेता ने कहा कि सरकार इस मसले पर सवालों का सामना करने से इस कदर डरी हुई है कि दमन का बार-बार सहारा ले रही है। सोमवार को ही कोलकाता में स्थानीय यूजीसी कार्यालय पर गए लोगों पर लाठियां बरसाई गईं। उन्हें हिरासत में भी लिया गया

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