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दिल्ली: फिर भी मौत के सीवर में उतारे जा रहे हैं मजदूर

राजधानी में सीवर की सफाई के दौरान मजदूरों की मौत होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।

निर्भय कुमार पांडेय

राजधानी में सीवर की सफाई के दौरान मजदूरों की मौत होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल में ही मोती नगर और डाबरी में ऐसी ही दो घटनाओं में छह मजदूरों की मौत हो गई थी। कभी पैसों का लालच देकर तो कभी नौकरी से निकालने की धमकी देकर मजदूरों से सीवर की सफाई करवाई जाती है। अकसर देखने को मिलता है कि मजदूरों पर या तो दवाब डालकर या फिर अधिक रुपए का प्रलोभन देकर सीवर सफाई का काम करवाया जाता है। मोती नगर की डीएलएफ सोसायटी में पांच कर्मचारियों को जबरदस्ती सीवर की सफाई के लिए सेप्टिक टैंक में उतारा गया और वहीं डाबरी में एक ठेकेदार ने मजदूर को ज्यादा पैसों का लालच देकर इस जानलेवा काम के लिए राजी किया, लेकिन रस्सी टूटने से मैनहोल में गिरने और दम घुटने से उसकी मौत हो गई। हैरानी की बात यह है कि अदालत की पाबंदी के बावजूद मजदूरों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है।

जानकारों की मानें तो इन घटनाओं के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार दिल्ली जल बोर्ड है। दिल्ली के पॉश इलाके हों या फिर अनधिकृत कॉलोनियां। उन इलाकों में सीवर लाइन की नियमित सफाई नहीं होती। यही कारण है कि थोड़ी सी बारिश होने पर ही दिल्ली डूब जाती है। शहर की अधिकतर सीवर लाइनें जाम पड़ी हैं। अनधिकृत कॉलोनियों का हाल तो और बुरा है, जहां सीवर ओवरफ्लो होने की वजह से मल व गंदगी नालियों या गलियों में बहती रहती है। संबंधित कॉलोनियों के आरडब्लूए और स्थानीय निवासी जब-तब इसकी शिकायत करते हैं, लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं है। थक-हारकर लोग मजदूरों को बुलाते हैं और पैसों का लालच देकर उन से सीवर की सफाई करवाते हैं। कई मामलों में देखा गया है कि मजदूरों को नौकरी से निकालने की धमकी देकर उन पर दवाब डाला जाता है। मजबूरी में मजदूर सीवर की सफाई करने के लिए मैनहोल या फिर सेप्टिक टैंक में उतरते हैं और जहरीली गैस की चपेट में आकर अपनी जान गंवा देते हैं।

सुरक्षा उपकरण मुहैया कराना जरूरी

दिल्ली नगर निगम स्वच्छता कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष संजय गहलोत का कहना है कि मजदूरों से सीवर की सफाई कराने पर अदालत ने रोक लगा रखी है। फिर भी अगर ऐसा किया जाता है तो मजदूरों को गैस मॉस्क, गैस डिटेक्टर, ऑक्सीजन सिलेंडर, टॉर्चयुक्त हेलमेट, कमर में बेल्ट (जिसमें रस्सी बंधी हो) और घुटने तक का बूट (जूता) देना जरूरी है। गहलोत का कहना है कि अब तो दिल्ली सरकार ने सफाई मशीन भी खरीद ली है, जिसकी मदद से सफाई करवाई जा सकती है, इसके बावजूद मजदूरों से सफाई करवाई जा रही है। हालांकि, जागरूक सफाई कर्मचारी सीवर लाइन या फिर सेप्टिक टैंक की सफाई करने से पहले माचिस की तीली जलाकर मैनहोल में डालते हैं। अगर आग लग जाती है तो कुछ समय के लिए मजदूर रुक जाते हैं।

दिल्ली में घटनाएं

15 जुलाई 2017- घिटोरनी में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान दम घुटने से पांच मजदूरों की मौत।
7 अगस्त 2017- घिटोरनी में ही सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान दम घुटने से चार मजदूरों की मौत
12 अगस्त 2017- लाजपत नगर में सीवर लाइन की सफाई के दौरान तीन मजदूरों की मौत।
22 अगस्त 2017- एलएनजेपी अस्पताल में सीवर की सफाई के दौरान एक मजदूर की मौत।
24 अगस्त 2015- स्वरूप नगर में सेप्टिक टैंक में सफाई करने के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से दो मजदूरों की मौत।
9 सितंबर 2018– मोती नगर की डीएलएफ सोसायटी में सीवर की सफाई के दौरान जहरीली गैस की वजह से पांच लोगों की मौत।
14 सितंबर 2018- डाबरी में सीवर के मैनहोल की सफाई के दौरान एक मजदूर की मौत।