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सेंट स्टीफन के प्राचार्य झुके, इस्तीफे की पेशकश

शोध की छात्रा के यौन उत्पीड़न मामले को लेकर विवादों में घिरे सेंट स्टीफंस के प्रिंसिपल वालसन थंपू ने आज कहा कि अगर यह साबित हो जाए कि ‘‘संस्थान के लिए वह शर्मिंदगी का कारण...

Author Updated: July 7, 2015 8:51 AM
सेंट स्टीफंस कालेज के प्राचार्य वाल्सन थंपू (फाइल फोटो)

विवादों के बीच सेंट स्टीफन के प्राचार्य झुकने को तैयार हो गए हैं। शोध छात्रा के यौन उत्पीड़न पर सेंट स्टीफंस के प्राचार्य वाल्सन थम्पू ने सोमवार को कहा कि अगर यह साबित हो जाए कि संस्थान के लिए वे शर्मिंदगी का कारण बने हैं, तो इस्तीफा दे देंगे। 2008 में कालेज का प्राचार्य बनने के बाद से ही वह विवादों में हैं।

शिकायत वापस लेने के लिए पीड़िता पर कथित तौर पर दबाव बनाने को लेकर थम्पू से इस्तीफे की मांग की जा रही है। उन्होंने कहा- अगर मैं संस्थान के लिए शर्मिंदगी का कारण हूं और यह बात साबित होती है तो उसी वक्त मैं इस्तीफा दे दूंगा। इस मुद्दे पर काफी संख्या में छात्रों, शिक्षकों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने उनके इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनों से आहत थम्पू ने कहा, मैं खुल कर बोलना चाहता हूं। इस मुद्दे पर न्यायेतर दबाव बनाने की क्या जरूरत है? परिसर की शांति भंग करने के लिए दूसरे संगठनों को लाने की क्या जरूरत है? उन्होंने कहा, दिल्ली पुलिस की ईमानदारी पर मुझे पूरा भरोसा है लेकिन मुझे लगता है कि शिकायतकर्ता और उसके साथ काम कर रही ताकतों को विश्वास नहीं है। मामले की सीबीआइ जांच की मांग करते हुए थम्पू ने इससे पहले दावा किया कि कालेज के कुछ तत्व पीड़िता का इस्तेमाल उनके खिलाफ कर रहे हैं। बहरहाल उन्होंने उन कुछ लोगों के नामों का खुलासा नहीं किया।

शोध छात्रा ने आरोप लगाए थे कि कालेज के एक प्रोफेसर ने उसके साथ छेड़छाड़ की और थम्पू ने उस प्रोफेसर को बचाने का प्रयास किया। पीड़िता ने पिछले हफ्ते पुलिस से संपर्क कर चार रिकॉर्डिंग सौंपे जिसमें दावा किया कि प्राचार्य के साथ मुलाकात के दौरान ये रिकॉर्डिंग की गई जिन्होंने उसे शिकायत वापस लेने का कथित तौर पर दबाव बनाया।

प्रदर्शनकारियों ने थम्पू के इस्तीफे के अलावा मांग की कि पीड़िता के शोध पर्यवेक्षक को तुरंत बदला जाए ताकि मामले की जांच होने तक उसकी पीएचडी में कोई बाधा नहीं आए। सेंट स्टीफंस कॉलेज में एक रिसर्च स्कॉलर से कथित छेड़छाड़ और मुद्दे को दबाने के प्राचार्य की कोशिश के विरोध में सोमवार को लगातार चौथी बार छात्रों, शिक्षकों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया।

कॉलेज प्राचार्य ने इस मामले में यह आरोप लगा कर सीबीआइ जांच की मांग की है कि पीड़िता का उनके खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि उनके खिलाफ जांच लंबित रहने के कारण उन्हें पद से हटा दिया जाए। आॅल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन और स्टूडेंट फेडरेशन आॅफ इंडिया सहित विभिन्न छात्र संगठनों के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों के एक तबके ने कॉलेज परिसर के बाहर प्रदर्शन किया।

इस मौके पर दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा ने कहा, समूचा देश महिला सुरक्षा की बात करता है, लेकिन यदि एक लड़की दिल्ली विश्वविद्यालय और सेंट स्टीफंस जैसे जाने माने संस्थानों में खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर सकती और न्याय नहीं पा सकती तो यह हमारी शिक्षा प्रणाली के लिए शर्मनाक है। आॅल इंडिया डेमोक्रेटिक वूमंस एसोसिएशन, सेंटर फॉर स्ट्रगलिंग वूमन, सहेली और आॅल इंडिया प्रोग्रेसिव वीमेन एसोसिएशन तथा अन्य महिला संगठनों की कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शन में भाग लिया और थम्पू के इस्तीफे तथा पीड़िता के लिए इंसाफ की मांग की।
खुल कर बोलना चाहता हूं

प्रदर्शनों से आहत थम्पू ने कहा, मैं खुल कर बोलना चाहता हूं। इस मुद्दे पर न्यायेतर दबाव बनाने की क्या जरूरत है? परिसर की शांति भंग करने के लिए दूसरे संगठनों को लाने की क्या जरूरत है? उन्होंने कहा, दिल्ली पुलिस की ईमानदारी पर मुझे पूरा भरोसा है लेकिन मुझे लगता है कि शिकायतकर्ता और उसके साथ काम कर रही ताकतों को विश्वास नहीं है। मामले की सीबीआइ जांच की मांग करते हुए थम्पू ने इससे पहले दावा किया कि कालेज के कुछ तत्व पीड़िता का इस्तेमाल उनके खिलाफ कर रहे हैं।

बहरहाल उन्होंने उन कुछ लोगों के नामों का खुलासा नहीं किया।

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