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दस साल से सत्ता पर काबिज भाजपा ने हर सीट पर देखी हार

अगले साल प्रस्तावित निगम चुनाव के ठीक पहले हुए पांच वार्डों में हुए उप चुनाव के नतीजों ने कई तस्वीरें उकेर दी।

Author नई दिल्ली | Updated: March 4, 2021 7:15 AM
M C Dसांकेतिक फोटो।

अगले साल प्रस्तावित निगम चुनाव के ठीक पहले हुए पांच वार्डों में हुए उप चुनाव के नतीजों ने कई तस्वीरें उकेर दी। कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। आकड़े बताते हैं कि लगातार दस साल तक सत्ता में रहने वाली भाजपा की साख पिछले चुनाव के मुकाबले हर सीट पर गिरी है। वह न केवल सभी सीटों पर हार गई बल्कि एक सीट पर केवल 105 वोट ही ला सकी। आम आदमी पार्टी एक बार फिर आम जन का भरोसा जीतने में सफल हुई। जबकि कांग्रेस के लिए यह चुनाव संजीवनी साबित हुआ। दिल्ली की राजनीति में हाशिए पर चली गई कांग्रेसी उम्मीद्वार को मिले वोट ने साबित कर दिया कि दिल्ली वाले न केवल भाजपा की नीतियों से किस हद तक खफा हैं।

आकड़ो के मुताबिक सबसे ज्यादा अंतर से कांग्रेस ने चौहान बांगर सीट जीती है। चौहान बांगर वार्ड में कांग्रेस के चौधरी जुबेर अहमद को 16203 वोट मिले जबकि आम आदमी पार्टी के मोहम्मद इशराक को 5561 वोट ही मिले। कांग्रेस के चौधरी जुबेर अहमद ने 10642 वोटों के बड़े अंतराल से जीत हासिल की है जो कि पांच वार्ड में सबसे ज्यादा अंतराल से यहां जीत दर्ज की गई है।

रोहिणी-सी और शालीमार बाग सीट पर भाजपाई अपनी जीत पक्की मानकार चल रहे थे। लेकिन इन सीटों पर पार्टी को न केवल हार का मुंह देखना पड़ा है बल्कि हार का अंतर बढ़ा। रोहिणी-सी पर 2017 में भाजपा हारी थी लेकिन तब यहां से भाजपा उम्मीदवार का हार का अंतर 2669 वोट था लेकिन इस बार भाजपा करीब तीन हजार से ज्यादा के अंतर से हारी है। आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार रामचंद्र को 14328 वोट हासिल हुए हैं और आप ने यह सीट बीजेपी से 2985 वोट के अंतर से जीती है।

शालीमार बाग की हालत तो इससे भी ज्यादा खराब रही है। 2017 में यहां भाजपा 3553 वोट से आप से जीती थी। इस बार पासा साफ उलट गया। यहां भाजपा 2705 वोटों के अंतर से हारी है। इस हिसाब से यहां भाजपा को पिछले चुनाव के मुकाबले 6,258 वोटों का फासला हो गया। वार्ड के हिसाब से यह आंकड़ा बहुत ज्यादा माना जाता है।

त्रिलोकपुरी सीट पर 2017 के निगम चुनाव में भाजपा 3049 वोट से हारी थी। लेकिन इस बार इस सीट पर इस बार भाजपा की हार का अंतर बढ़कर 4986 हो गया है। कल्याणपुरी सीट पर तो 2017 के चुनाव में भाजपा केवल 874 वोट से हारी थी। जबकि इस बार 7043 वोटों से हारी है। यहां भाजपा की हार का अंतर आठ गुणा तक बढ़ गया। नोटा को भी 0.63 फीसद वोट , बसपा ने भी जमाए रंग।

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