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कांग्रेस :पिता के मैदान पर अब वारिसों ने संभाली कमान

देश में जब इंदिरा गांधी की सरकार थी तब दिल्ली की सियासत में आरके धवन, एचकेएल भगत, सज्जन कुमार व जगदीश टाइटलर सरीखे नेताओं का दबदबा था।

Author नई दिल्ली, 28 जुलाई। | July 29, 2018 4:44 AM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फाइल फोटो)

अजय पांडेय

देश में जब इंदिरा गांधी की सरकार थी तब दिल्ली की सियासत में आरके धवन, एचकेएल भगत, सज्जन कुमार व जगदीश टाइटलर सरीखे नेताओं का दबदबा था। हालांकि शीला दीक्षित के मुख्यमंत्री बनने के बाद इन सूरमाओं की चमक कुछ धूमिल पड़ी, लेकिन आज इन कद्दावर नेताओं की नई पीढ़ी दिल्ली में मोर्चा संभालने की तैयारी में है। विरासत की सियासत करने निकले इन नए नेताओं ने आगामी लोकसभा व विधानसभा चुनाव में जोर आजमाइश की तैयारी भी शुरू कर दी है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के करीबियों में शुमार पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी न केवल दिल्ली कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता हैं, बल्कि दिल्ली महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी हैं।

पार्टी ने उन्हें ग्रेटर कैलाश विधानसभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़ाया था, लेकिन वह जीत नहीं पार्इं। हालांकि उनकी सक्रियता लगातार बनी हुई है। दूसरी ओर दिल्ली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष व सांसद जयप्रकाश अग्रवाल के बेटे मुदित अग्रवाल की सक्रियता भी यह इशारा कर रही है कि आने वाले दिनों में वह भी चुनावी अखाड़े में कूद सकते हैं। सूबे की कांग्रेसी सियासत में बेहद कद्दावर नेताओं में शुमार किए जाने वाले सज्जन कुमार के बेटे जगप्रवेश की सक्रियता से भी जाहिर है कि अगले लोकसभा चुनाव में वे कांग्रेसी टिकट के दावेदार हैं। उनकी अगुआई में 31 जुलाई को एक बेरोजगार सम्मेलन भी होने जा रहा है जिसमें प्रदेश कांग्रेस के सभी नेताओं के शिरकत करने की संभावना है।

सज्जन कुमार खुद सांसद रहे हैं। पार्टी ने उनके भाई रमेश कुमार को भी टिकट दिया, लेकिन जगप्रवेश की सक्रियता बता रही है कि पुरानी पीढ़ी अब नई पीढ़ी को रास्ता देने को तैयार है। प्रदेश कांग्रेस के अनुसंधान विभाग की कमान पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा की बेटी पूजा बाहरी को सौंपी गई है। कहा यह भी जा रहा है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस चोपड़ा की जगह उनकी बेटी को ही विधानसभा का टिकट दे सकती है।

दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग में एचकेएल भगत के पोते शिवम भगत को जगह मिली है। एचकेएल भगत दिल्ली के बेहद ताकतवर नेताओं में गिने जाते रहे और उनका रुतबा शीला दीक्षित से भी ज्यादा रहा। दिल्ली कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में कई नेताओं के बच्चे उनसे मिले हैं। इनमें से कई लोकसभा चुनाव लड़ने के भी इच्छुक हैं, लेकिन इनमें से कुछेक ही इस लायक हैं जिन्हें पार्टी टिकट दे सकती है।

उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित पहले ही दो-दो बार सांसद रह चुके हैं और जाहिर तौर पर उन्हें फिर मौका मिलेगा। दिल्ली के एक अन्य कद्दावर नेता ने कहा कि जहां तक चुनावी टिकट का सवाल है, इसका फैसला तो केंद्रीय चुनाव समिति करती है, लेकिन अगर नई पीढ़ी मेहनत कर रही है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

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