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अनुशासनहीनता के आरोप में जेएनयू के आठ छात्र निलंबित

प्राथमिक साक्ष्य के आधार पर जिन छात्रों को चिह्नित किया गया है उनके खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई की है।

Author नई दिल्ली | December 28, 2016 3:14 AM
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू)।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में सोमवार को हुई विद्वत परिषद की बैठक में जबरदस्ती घुसकर अनुशासनहीनता करने वाले आठ छात्रों के खिलाफ जेएनयू प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। प्रशासन ने उनको विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों से ही नहीं बल्कि छात्रावास से भी निलंबित कर दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच समिति भी बैठा दी है। जांच समिति की रिपोर्ट आने तक ये छात्र निलंबित रहेंगे। जेएनयू प्रशासन ने कहा है कि जो भी इन छात्रों को कैंपस में बुलाएगा उस पर कार्रवाई होगी। निलंबित छात्रों में बिरसा, अंबेडकर, फुले स्टूडेंट एसोसिएशन (बाप्सा) के समर्थक अधिक हैं। जेएनयू के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि छात्र पहले बैठक स्थल के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। अचानक वे दरवाजा तोड़कर कन्वेंशन सेंटर में घुस गए और नारेबाजी करने लगे। संवैधानिक रूप से ये छात्र बैठक में नहीं आ सकते।

प्राथमिक साक्ष्य के आधार पर जिन छात्रों को चिह्नित किया गया है उनके खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई की है। एक प्रॉक्टोरियल जांच समिति गठित की जा रही है जो मामले की जांच करेगी। बाप्सा के जेएनयू अध्यक्ष राहुल सोनपिंपली ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि उनके कितने लोगों को निलंबित किया गया है। यह संवादहीनता की स्थिति में उठाया गया कदम है। हम वहां कुलपति को ज्ञापन देने गए थे। जिस तरह से साक्षात्कार के अंकों का निर्धारण हो रहा है उसको लेकर हमारा विरोध है, जो इस समस्या का समाधान होने तक जारी रहेगा। उधर, जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष मोहित पांडेय का कहना है कि जेएनयू प्रशासन द्वारा छात्रों को निलंबित करना विरोधाभासी है। एक तरफ कुलपति ने कहा है कि विद्वत परिषद की बैठक में सभी प्रस्ताव पास हो गए वहीं दूसरी ओर इन छात्रों की अनुशासनहीनता की बात कही जा रही है। निलंबित छात्रों के नाम दिलीप कुमार, प्रशांत कुमार, देवा शेरपा, मृत्युंजय यादव, शकील अंजुम, मुलायम सिंह, राहुल सोनपिंपली, मारगेट भूपाली विट्ठल हैं।

 

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